विस्तृत उत्तर
आदित्य मोक्षोन्मुखी पितृ अवस्था के प्रतीक इसलिए हैं क्योंकि वे परम शुद्ध, प्रकाशमय और उच्चतम पितृ अवस्था को दर्शाते हैं। वे काल, प्रकाश और ब्रह्माण्डीय नियमों के नियामक हैं और सम्पूर्ण जगत में ज्ञान का संचार करते हैं। पितृकर्म में आदित्य उस अवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं जो जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होने, मोक्ष प्राप्त करने या उच्चतम स्वर्गीय गति प्राप्त करने के निकट है। वसु स्थूलता, रुद्र सूक्ष्म प्राणिक अवस्था और आदित्य कारण-शरीर तथा परमसत्य के प्रतीक हैं।
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