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वायु पुराण प्रश्नोत्तरी — 27 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित वायु पुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 27 प्रश्न

लोक

भुवर्लोक की 'प्राण-मनस' अवधारणा का क्या अर्थ है?

प्राण-मनस अवधारणा का अर्थ है कि भुवर्लोक प्राण (जीवन ऊर्जा) और मन (चेतना) का संगम क्षेत्र है। योग साधक प्राण-नियंत्रण से यहाँ की सिद्धियाँ प्राप्त कर सकते हैं।

प्राण मनसभुवर्लोकवायु पुराण
लोक

वायु पुराण भुवर्लोक को 'प्राण-मनस लोक' क्यों कहता है?

वायु पुराण भुवर्लोक को प्राण-मनस लोक इसलिए कहता है क्योंकि यह वायु (प्राण) तत्व से बना है, यहाँ की सत्ताएं प्राणमय हैं और यह स्थूल तथा आध्यात्मिक जगत के बीच की कड़ी है।

वायु पुराणभुवर्लोकप्राण मनस
लोक

वायु पुराण में एकादशी श्राद्ध फल क्या है?

ऐश्वर्य और पाप-नाश।

वायु पुराणएकादशी फलऐश्वर्य
लोक

एकादशी श्राद्ध से ऐश्वर्य मिलता है क्या?

हाँ, सतत ऐश्वर्य का फल है।

ऐश्वर्यवायु पुराणएकादशी
लोक

नवमी श्राद्ध में मांस मदिरा क्यों वर्जित है?

इससे पितर रुष्ट होते हैं।

मांसमदिरावायु पुराण
पितृ पक्ष

पितृ पक्ष में पितर कहाँ से आते हैं?

वायु पुराण के अनुसार पितर चंद्रलोक के माध्यम से दक्षिण दिशा से अपने वंशजों के घर के द्वार पर वायु रूप में उपस्थित होते हैं। 16 दिनों तक वे सम्मान, तर्पण और अन्नादि की प्रतीक्षा करते हैं।

पितरचंद्रलोकवायु पुराण
लोक

वायु पुराण में पाताल लोकों का वर्णन कैसे है?

वायु पुराण पाताल लोकों के नामों के साथ उनमें स्थित नगरों, दैत्यों और नाग अधिपतियों का विस्तृत वर्णन देता है।

वायु पुराणपाताल लोकअधोलोक
लोक

वायु पुराण और शिव पुराण में महातल का क्या वर्णन है?

वायु पुराण में महातल में हिरण्याक्ष और किर्मीर के नगर बताए गए हैं, जबकि शिव पुराण में इसे तल या महातल कहा गया है।

वायु पुराणशिव पुराणमहातल
लोक

महातल में किर्मीर के नगर का क्या वर्णन है?

महातल में किर्मीर के नाम से जुड़े भव्य दैत्य नगर और उसकी दानवी सभ्यता का वर्णन मिलता है।

किर्मीरमहातलवायु पुराण
लोक

महातल में हिरण्याक्ष के नगर का क्या वर्णन है?

वायु पुराण के अनुसार महातल में हिरण्याक्ष के नाम से जुड़े भव्य दैत्य नगर और उसके वंशजों की सभ्यता विद्यमान है।

हिरण्याक्ष नगरमहातलवायु पुराण
लोक

वायु पुराण में महातल के बारे में क्या कहा गया है?

वायु पुराण में महातल को पांचवां पाताल बताया गया है, जहाँ नागों के साथ हिरण्याक्ष और किर्मीर के नगर भी हैं।

वायु पुराणमहातलहिरण्याक्ष
लोक

ब्रह्मांड पुराण और वायु पुराण में रसातल कैसा है?

ब्रह्मांड और वायु पुराण रसातल को छठा अधोलोक बताते हैं, जिसकी भूमि पथरीली और कंकड़-पत्थर युक्त है।

ब्रह्मांड पुराणवायु पुराणरसातल
लोक

वितल लोक में हयग्रीव और तक्षक के नगर कहाँ हैं?

हयग्रीव और तक्षक के भव्य नगर दूसरे अधोलोक वितल लोक में स्थित हैं।

हयग्रीव नगरतक्षक नगरवितल लोक
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वितल लोक में तक्षक कौन है?

तक्षक वितल लोक में स्थित प्रसिद्ध, विषैला और अत्यंत बलवान नागराज बताया गया है।

तक्षकनागराजवितल लोक
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वितल लोक में हयग्रीव कौन है?

वितल लोक में हयग्रीव एक अत्यंत शक्तिशाली और मायावी दैत्य बताया गया है।

हयग्रीववितल लोकदैत्य
लोक

सुतल लोक में महाजम्भ कौन बताया गया है?

महाजम्भ वायु पुराण में सुतल लोक के प्रशासन से जुड़ा एक शक्तिशाली दैत्य बताया गया है।

महाजम्भसुतल लोकवायु पुराण
लोक

सुतल लोक की भूमि का रंग कैसा बताया गया है?

सुतल लोक की भूमि हल्के पीले और नीले रंग की अलौकिक आभा वाली बताई गई है।

सुतल भूमि रंगपीली नीली आभावायु पुराण
लोक

वायु पुराण में तलातल का कौन सा नाम मिलता है?

वायु पुराण में तलातल को गभस्तल कहा गया है।

वायु पुराणतलातलगभस्तल
लोक

गभस्तल क्या है?

गभस्तल वायु पुराण में तलातल लोक के लिए प्रयुक्त नाम है।

गभस्तलतलातलवायु पुराण
लोक

वायु पुराण में तलातल को किस नाम से बताया गया है?

वायु पुराण में तलातल को गभस्तल कहा गया है।

वायु पुराणतलातलगभस्तल
लोक

वायु पुराण में वैराज देवगणों की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?

वायु पुराण के अनुसार वैराज देवगण ब्रह्मा जी के विराज स्वरूप से उत्पन्न हुए।

वायु पुराणवैराजउत्पत्ति
लोक

वैराज देवगणों की उत्पत्ति कैसे हुई?

वैराज देवगण ब्रह्मा जी के विराज या विराट स्वरूप से प्रकट हुए अयोनिज देव हैं।

वैराज उत्पत्तिविराजब्रह्मा
लोक

वायु पुराण में ऋषियों के अलग-अलग मतों का क्या तात्विक अर्थ है?

वायु पुराण के ऋषियों के अलग-अलग मत यह दर्शाते हैं कि सत्यलोक अनिर्वचनीय और अतीन्द्रिय है। हर ऋषि ने एक आयाम देखा — पूर्ण स्वरूप केवल ब्रह्मा जानते हैं।

वायु पुराणऋषि मततात्विक
लोक

वायु पुराण में ऋषियों ने सत्यलोक का आकार कैसा बताया?

वायु पुराण में ऋषियों के अलग-अलग मत हैं — अत्रि (100 कोण), भृगु (1000 कोण), सावर्णि (अष्टकोण), वार्ष्यायणि (निराकार), गार्ग्य (वेणी जैसा)। निष्कर्ष — केवल ब्रह्मा ही जानते हैं।

वायु पुराणआकारऋषि मत

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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