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बालकाण्ड प्रश्नोत्तरी — 321 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित बालकाण्ड विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 321 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड

'श्रीगुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिव्य दृष्टि हियँ होती' — इसका क्या अर्थ है?

अर्थ — श्रीगुरु के चरण-नखों की ज्योति मणियों के प्रकाश समान है, जिसके स्मरण करते ही हृदय में दिव्य दृष्टि उत्पन्न हो जाती है। यह प्रकाश अज्ञान रूपी अन्धकार का नाश करता है और जिसके हृदय में आ जाये उसके बड़े भाग्य हैं।

बालकाण्डगुरु वन्दनाचौपाई
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने गुरु के चरणकमलों की रज को किसका सुन्दर चूर्ण कहा है?

गुरु के चरणों की रज को 'अमिअ मूरिमय चूरन चारू' अर्थात् अमृत मूल (संजीवनी जड़ी) का सुन्दर चूर्ण कहा गया है, जो सम्पूर्ण भवरोगों (संसार के दुखों) के परिवार को नष्ट करने वाला है।

बालकाण्डगुरु वन्दनाचरण रज
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि' — इसमें गुरु को क्या कहा गया है?

इस दोहे में गुरु को 'कृपा सिंधु' (कृपा का समुद्र) और 'नररूप हरि' (मनुष्य रूप में साक्षात् भगवान विष्णु) कहा गया है। गुरु के वचनों को महामोह रूपी अन्धकार नष्ट करने वाली सूर्य-किरणें बताया गया।

बालकाण्डगुरु वन्दनानररूप हरि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने गुरु की वन्दना में गुरु के चरणकमल की तुलना किससे की है?

तुलसीदासजी ने गुरु के चरणकमलों की तीन उपमाएँ दीं — (1) गुरु के वचनों को महामोह-अन्धकार नष्ट करने वाली सूर्य-किरणें, (2) गुरु के चरण-रज को संजीवनी जड़ी (अमृत मूल) का सुन्दर चूर्ण, और (3) गुरु के चरण-नखों को मणियों की ज्योति।

बालकाण्डगुरु वन्दनाचरणकमल
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन' — इसमें किसकी स्तुति है?

यह भगवान शंकरजी (शिवजी) की स्तुति है। अर्थ — जिनका कुन्द और चन्द्रमा समान गौर शरीर है, जो पार्वतीजी के प्रियतम और दीनों पर दया करने वाले हैं, वे कामदेव को भस्म करने वाले शंकरजी मुझपर कृपा करें।

बालकाण्डशिव स्तुतिमंगलाचरण
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन' — यह किसका वर्णन है?

यह भगवान विष्णु (नारायण) का वर्णन है। अर्थ — जो नील कमल समान श्यामवर्ण हैं, लाल कमल समान नेत्र हैं और सदा क्षीरसागर में शयन करते हैं, वे भगवान मेरे हृदय में निवास करें।

बालकाण्डभगवान विष्णुमंगलाचरण
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन' — इस दोहे में किसकी कृपा का वर्णन है?

यह दोहा भगवान श्रीराम की कृपा का वर्णन करता है। अर्थ है — जिनकी कृपा से गूँगा सुन्दर बोलने लगता है और लँगड़ा दुर्गम पहाड़ चढ़ जाता है, वे कलियुग के पाप जलाने वाले दयालु भगवान मुझपर दया करें।

बालकाण्डभगवान कृपामंगलाचरण
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन' — यह किसकी स्तुति है?

यह सोरठा श्रीगणेशजी की स्तुति है। इसमें गणेशजी को 'गन नायक' (गणों के स्वामी), 'करिबर बदन' (हाथी के मुखवाले) और 'बुद्धि रासि सुभ गुन सदन' (बुद्धि और शुभ गुणों के धाम) कहा गया है।

बालकाण्डगणेश वन्दनासोरठा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस के बालकाण्ड में सबसे पहले किसकी वन्दना की गई है?

बालकाण्ड में संस्कृत श्लोकों में सबसे पहले शिव-पार्वती की वन्दना है। अवधी छन्दों में सबसे पहले श्रीगणेशजी की वन्दना है — 'जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन।'

बालकाण्डमंगलाचरणवन्दना

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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