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समय प्रश्नोत्तरी — 90 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित समय विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 90 प्रश्न

लोक

कालचक्र की उत्पत्ति कैसे हुई?

कालचक्र विष्णु की प्रथम श्वास से गति प्राप्त कर शुरू हुआ।

कालचक्रसमयविष्णु
लोक

क्या समय विष्णु की श्वास से शुरू हुआ?

हाँ, कथा के अनुसार विष्णु की प्रथम श्वास से कालचक्र चलना शुरू हुआ।

समयविष्णु श्वासकालचक्र
लोक

समय फिर सही दिशा में कैसे चला?

ऋत और स्पंदन लौटने से समय फिर संतुलित हो गया।

समयऋतस्पंदन
लोक

समय उल्टा कैसे घूमने लगा?

ऋत टूटने से कालचक्र का क्रम उलटा होने लगा।

समयकालचक्रब्रह्मांड
लोक

समय का संतुलन कैसे बिगड़ा?

स्पंदन रुकने से समय का क्रम टूट गया।

समयस्पंदनसंतुलन
लोक

ब्रह्मा की रात कितनी लंबी होती है?

ब्रह्मा की रात ४.३२ अरब मानव वर्षों की मानी गई है।

ब्रह्माकल्पसमय
लोक

समय विष्णु की श्वास से कैसे जुड़ा है?

श्वास बाहर तो सृष्टि, भीतर तो प्रलय।

समयविष्णु श्वासकालचक्र
लोक

कालचक्र पहली बार कैसे चला?

विष्णु की प्रथम श्वास से।

कालचक्रविष्णु श्वाससमय
लोक

समय की मृत्यु क्या है?

गति और परिवर्तन का पूर्ण अभाव।

समयकालचक्रमहाप्रलय
लोक

कालचक्र कब रुका था?

महाप्रलय के पूर्ण शून्य में।

कालचक्रमहाप्रलयसमय
लोक

महाप्रलय में समय का क्या होता है?

समय रुक जाता है।

महाप्रलयसमयकालचक्र
लोक

पाताल लोक के निवासी समय को क्यों भूल जाते हैं?

पाताल में दिन-रात और सौर समय नहीं है; इसलिए निवासी भोग-विलास में रहते हुए समय के बीतने को भूल जाते हैं।

पाताल लोककालसमय
लोक

महातल लोक में दिन और रात क्यों नहीं होते?

महातल में सूर्य-चंद्र का उदय-अस्त नहीं होता, इसलिए दिन और रात का विभाजन नहीं है।

महातल दिन रातसूर्य चंद्रसमय
लोक

रसातल लोक में दिन और रात क्यों नहीं होते?

रसातल में सूर्य का प्रकाश नहीं पहुँचता, इसलिए दिन-रात का प्राकृतिक विभाजन नहीं होता।

रसातल दिन रातसमयसूर्य प्रकाश
लोक

वितल लोक में दिन और रात क्यों नहीं होते?

वितल लोक में सूर्य का सीधा प्रकाश और सूर्योदय-सूर्यास्त नहीं होता, इसलिए दिन-रात का भेद नहीं है।

वितल दिन रातसमयसूर्यास्त
लोक

तलातल में काल का प्रभाव कैसा है?

तलातल में दिन-रात का भेद नहीं है, इसलिए काल का सामान्य भय अनुभव नहीं होता।

तलातलकालदिन रात
लोक

जनलोक में काल का प्रभाव कैसा होता है?

जनलोक में काल का प्रभाव धीमा और भिन्न होता है, और आत्माएँ शाश्वत चिंतन में रहती हैं।

जनलोककालसमय
साधना का समय

गृहस्थों के लिए बटुक भैरव साधना कब करें?

गृहस्थों के लिए बटुक भैरव साधना का शुभ समय प्रदोष काल (शाम दिन-रात का मिलन) या शाम 7 बजे से 10 बजे के बीच है।

गृहस्थ साधकप्रदोष कालशाम 7 से 10
साधना का समय

बटुक भैरव साधना का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

तांत्रिक पूजा के लिए निशिता काल (मध्यरात्रि) सर्वोत्तम है। गृहस्थों के लिए प्रदोष काल या शाम 7 से 10 बजे के बीच का समय शुभ है।

निशिता कालमध्यरात्रितांत्रिक पूजा
दक्षिणामूर्ति साधना

साधना की दिशा और समय क्या है?

साधना के लिए दक्षिण दिशा और ब्रह्ममुहूर्त का समय सबसे उत्तम माना गया है।

दिशासमयब्रह्ममुहूर्त
श्री रुद्र-कवच-संहिता

शिव-साधना के लिए सर्वोत्तम समय कौन सा बताया गया है?

सूर्योदय से पहले का समय (ब्रह्म-मुहूर्त) और सूर्यास्त का समय (प्रदोष-काल) शिव साधना के लिए श्रेष्ठ है।

समयब्रह्म-मुहूर्तप्रदोष-काल
जीवन एवं मृत्यु

कालसूत्र नरक क्या है?

कालसूत्र = 'काल के धागे का नरक'। 21 प्रमुख नरकों में से एक। 'समय बर्बाद करने वालों को आग पर चलाया जाता है।' कालसूत्र से बाँधकर यातना — भागना असंभव।

कालसूत्र नरकपरिभाषासमय
जीवन एवं मृत्यु

पाप का फल कब मिलता है?

पाप का फल — इसी जन्म में (दुर्भाग्य-रोग), मृत्यु के तुरंत बाद (यमलोक में लेखा), नरक में (दंड-भोग) और अगले जन्म में। 'बिना भोगे कर्म का फल करोड़ों कल्पों में भी नष्ट नहीं होता।'

पापफलसमय
जीवन एवं मृत्यु

श्राद्ध कब करना चाहिए?

श्राद्ध कब करें — मृत्यु के बाद 10 दिन (पिंडदान), 13वाँ दिन (सपिंडन), प्रतिमास, पितृपक्ष (भाद्र कृष्ण से आश्विन अमावस्या तक), वार्षिक और गया में। कुतुप मुहूर्त (अपराह्नकाल) श्राद्ध का उचित समय है।

श्राद्धसमयपितृपक्ष

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।