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विस्तृत उत्तर
विष्णु की श्वास बाहर आते ही समय चलने लगता है और श्वास भीतर जाते ही सृष्टि प्रलय की ओर लौटती है।
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श्वास बाहर तो सृष्टि, भीतर तो प्रलय।
विष्णु की श्वास बाहर आते ही समय चलने लगता है और श्वास भीतर जाते ही सृष्टि प्रलय की ओर लौटती है।
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