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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

पितृ पक्ष

पितृ पक्ष क्या है?

पितृ पक्ष = पितरों को समर्पित 16 दिवसीय अवधि। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक। 'महालय' भी कहते हैं। इस काल में पितर वायु रूप में दक्षिण दिशा से घर आते हैं और तर्पण-अन्न की प्रतीक्षा करते हैं।

पितृ पक्षमहालयश्राद्ध काल
श्राद्ध दर्शन

सपिण्डीकरण के बाद आत्मा कहाँ जाती है?

सपिण्डीकरण के बाद जीवात्मा प्रेत कोटि से पितृ कोटि में सम्मिलित होकर पितृलोक की यात्रा आरंभ करती है और श्राद्ध का अधिकार प्राप्त करती है। इससे पहले आत्मा प्रेत रूप में भटकती है। गरुड़ पुराण का दर्शन।

सपिण्डीकरणपितृलोकआत्मा यात्रा
श्राद्ध दर्शन

सपिण्डीकरण संस्कार क्या है?

सपिण्डीकरण = प्रतीकात्मक अनुष्ठान जिसमें पके चावल, दूध, काले तिल से बने पिण्डों को मिलाकर जीवात्मा को प्रेत कोटि से पितृ कोटि में सम्मिलित किया जाता है। इसके बाद ही आत्मा पितृलोक जाती है और श्राद्ध की अधिकारी बनती है।

सपिण्डीकरणसंस्कारपिण्ड
श्राद्ध दर्शन

प्रेत योनि क्या है?

प्रेत योनि = मृत्यु के बाद आत्मा स्थूल शरीर त्यागकर सूक्ष्म शरीर धारण कर जिस अवस्था में जाती है। सपिण्डीकरण संस्कार से पहले आत्मा प्रेत रूप में भटकती है। गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प में विस्तृत वर्णन।

प्रेत योनिगरुड़ पुराणसूक्ष्म शरीर
श्राद्ध दर्शन

सर्प योनि वाले पितर को श्राद्ध कैसे प्राप्त होता है?

सर्प आदि रेंगने वाली योनियों में स्थित पितर को श्राद्ध का अंश 'वायु' बनकर तृप्ति देता है। मंत्र शक्ति से अन्न उनकी योनि के योग्य रूप में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।

सर्प योनिवायुपितर
श्राद्ध दर्शन

पशु योनि वाले पितर को श्राद्ध का अंश क्या बनकर मिलता है?

पशु योनि में स्थित पितर को श्राद्ध का अंश 'तृण' (घास) बनकर मिलता है। पशु अन्न नहीं खा सकते — इसलिए मंत्र शक्ति से अन्न उनके योग्य घास में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।

पशु योनितृणघास
श्राद्ध दर्शन

असुर योनि में पितर को श्राद्ध कैसे मिलता है?

असुर योनि में स्थित पितर को श्राद्ध का अन्न 'विविध भोगों' के रूप में प्राप्त होता है। मंत्र शक्ति + श्रद्धा से अन्न उनकी योनि के योग्य रूप में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।

असुर योनिविविध भोगपितर
श्राद्ध दर्शन

देवता बने पितर को श्राद्ध का अन्न किस रूप में मिलता है?

श्रेष्ठ कर्मों से देवत्व प्राप्त पितर को श्राद्ध का अन्न 'अमृत' रूप में मिलता है। मंत्र शक्ति + श्रद्धा से स्थूल अन्न देव योनि के लिए दिव्य अमृत में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।

देव योनिअमृतपितर
श्राद्ध दर्शन

पृथ्वी पर अर्पित अन्न पितरों को कैसे मिलता है?

मत्स्य/स्कंद पुराण: पितर की योनि के अनुसार अन्न रूपांतरित होता है — देव योनि = अमृत, असुर योनि = भोग, पशु योनि = तृण (घास), सर्प योनि = वायु। मंत्र शक्ति + श्रद्धा से यह सूक्ष्म रूपांतरण होता है।

पारलौकिक विज्ञानमत्स्य पुराणस्कंद पुराण
श्राद्ध के प्रकार

पार्वण श्राद्ध क्या है?

पार्वण श्राद्ध = पितृ पक्ष में किया जाने वाला श्राद्ध। 'पर्व' (विशेष काल) से नाम। तीन पीढ़ियों (पिता, पितामह, प्रपितामह) के पितरों का संयुक्त तर्पण और पिण्डदान। प्रतिपदा श्राद्ध भी इसी कोटि का।

पार्वण श्राद्धपितृ पक्षतीन पीढ़ी
श्राद्ध के प्रकार

काम्य श्राद्ध क्या होता है?

काम्य श्राद्ध = किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए किया जाने वाला श्राद्ध। रोहिणी आदि नक्षत्रों में किया जाता है। 'काम' (इच्छा) से नाम — सकाम कर्म।

काम्य श्राद्धमनोकामनारोहिणी नक्षत्र
श्राद्ध के प्रकार

नैमित्तिक श्राद्ध किसे कहते हैं?

नैमित्तिक श्राद्ध = किसी विशेष अवसर (निमित्त) पर किया जाने वाला श्राद्ध। मुख्य उदाहरण = पुत्र जन्म के अवसर पर। 'निमित्त' से बना — विशेष कारण के लिए किया गया।

नैमित्तिक श्राद्धपुत्र जन्मविशेष अवसर
श्राद्ध के प्रकार

नित्य श्राद्ध क्या है?

नित्य श्राद्ध = जो श्राद्ध प्रतिदिन किया जाए। दैनिक नियमित कर्म, बिना किसी विशेष अवसर के। तीन मुख्य श्राद्ध प्रकारों में पहला।

नित्य श्राद्धप्रतिदिनदैनिक
श्राद्ध के प्रकार

श्राद्ध कितने प्रकार के होते हैं?

मुख्य 3 प्रकार: (1) नित्य = प्रतिदिन (2) नैमित्तिक = विशेष अवसर जैसे पुत्र जन्म (3) काम्य = मनोकामना हेतु, रोहिणी नक्षत्र में। चौथा विशिष्ट = पार्वण श्राद्ध (पितृ पक्ष में 3 पीढ़ियों का संयुक्त तर्पण-पिण्डदान)।

श्राद्ध प्रकारनित्यनैमित्तिक
श्राद्ध परिचय

कल्पतरु ग्रंथ में श्राद्ध को क्या कहा गया है?

कल्पतरु: 'पितरों के लाभ के लिए यज्ञिय वस्तुओं का त्याग + सुपात्र ब्राह्मणों द्वारा उसका ग्रहण = प्रधान श्राद्ध कर्म।' दोनों अंग आवश्यक — केवल त्याग अधूरा है।

कल्पतरुनिबंध ग्रंथश्राद्ध
श्राद्ध परिचय

मिताक्षरा के अनुसार श्राद्ध क्या है?

मिताक्षरा (याज्ञवल्क्य स्मृति की टीका) = 'पितरों का उद्देश्य करके उनके कल्याण एवं पारलौकिक तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किसी पवित्र वस्तु/द्रव्य का परित्याग = श्राद्ध।' मूल भाव = पवित्र द्रव्य का त्याग।

मिताक्षरायाज्ञवल्क्य स्मृतिश्राद्ध परिभाषा
श्राद्ध परिचय

ब्रह्म पुराण में श्राद्ध की क्या परिभाषा है?

ब्रह्म पुराण: 'उचित काल, उचित पात्र, पवित्र स्थान, शास्त्रानुमोदित विधि से, पितरों को लक्ष्य कर, श्रद्धापूर्वक श्रेष्ठ ब्राह्मणों को जो दिया जाए = श्राद्ध।' काल+पात्र+स्थान+विधि+लक्ष्य+श्रद्धा का संगम।

ब्रह्म पुराणश्राद्ध परिभाषाशास्त्र
श्राद्ध परिचय

पितृ ऋण से मुक्ति कैसे मिलती है?

पितृ ऋण से मुक्ति का एकमात्र शास्त्र-सम्मत मार्ग = श्राद्ध कर्म। और कोई विकल्प नहीं। श्रद्धापूर्वक अन्न/जल/पिण्ड/तर्पण से पितर तृप्त होते हैं और वंशज को आशीर्वाद देते हैं।

पितृ ऋणमुक्तिश्राद्ध
श्राद्ध परिचय

तीन ऋण कौन से हैं?

तीन ऋण = (1) देव ऋण (2) ऋषि ऋण (3) पितृ ऋण। महर्षियों ने तीनों से उऋण होने का कठोर विधान दिया। पितृ ऋण से मुक्ति का एकमात्र शास्त्र-सम्मत मार्ग = श्राद्ध कर्म।

त्रिविध ऋणदेव ऋणऋषि ऋण
श्राद्ध परिचय

श्राद्ध कर्म क्यों किया जाता है?

तीन ऋणों (देव/ऋषि/पितृ) में से पितृ ऋण से मुक्ति का एकमात्र मार्ग = श्राद्ध। पितरों को तृप्ति, वंशजों को आयु/संतान/धन/विद्या/मोक्ष का आशीर्वाद। न करने पर पितृ दोष = संतान-हीनता, दरिद्रता, व्याधि।

श्राद्धउद्देश्यपितृ ऋण
श्राद्ध परिचय

श्राद्ध शब्द का अर्थ क्या है?

'श्रद्धया दीयते यस्मात् तत् श्राद्धम्' = श्रद्धा से जो दिया जाए वही श्राद्ध। पितरों को अन्न/जल/पिण्ड/तर्पण श्रद्धा-आस्तिकता से अर्पण = श्राद्ध। मूल तत्त्व 'श्रद्धा' है।

श्राद्धव्युत्पत्तिअर्थ
श्राद्ध परिचय

श्राद्ध क्या होता है?

श्राद्ध = पितरों के लिए श्रद्धापूर्वक अन्न, जल, पिण्ड, तर्पण अर्पण। 'श्रद्धया दीयते यस्मात् तत् श्राद्धम्'। तीन ऋणों (देव, ऋषि, पितृ) में से पितृ ऋण से मुक्ति का एकमात्र शास्त्र-सम्मत मार्ग। सनातन धर्म का सबसे पवित्र अनुष्ठान।

श्राद्धपरिभाषाअर्थ
लोक

नित्य श्राद्ध और नैमित्तिक श्राद्ध में क्या अंतर है?

नित्य श्राद्ध प्रतिदिन का है, जबकि नैमित्तिक श्राद्ध वार्षिक तिथि या विशेष निमित्त से किया जाता है।

नित्य श्राद्धनैमित्तिक श्राद्धश्राद्ध प्रकार
लोक

भविष्य पुराण और यमस्मृति में श्राद्ध के 12 प्रकार कौन से हैं?

श्राद्ध के 12 प्रकार हैं: नित्य, नैमित्तिक, काम्य, वृद्धि, सपिण्डन, पार्वण, गोष्ठी, शुद्धर्थ, कर्मांग, दैविक, यात्रार्थ और पुष्ट्यर्थ।

श्राद्ध के 12 प्रकारभविष्य पुराणयमस्मृति

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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