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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद पापी आत्मा किसे देखती है?

पापी आत्मा मृत्यु के बाद भयंकर यमदूतों को देखती है।

पापी आत्मायमदूतमृत्यु के बाद
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद पुण्यात्मा किसे देख सकती है?

पुण्यात्मा मृत्यु के बाद भगवान विष्णु के पार्षदों को देख सकती है।

पुण्यात्माविष्णु पार्षदमृत्यु के बाद
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा क्या देख सकती है?

मृत्यु के बाद आत्मा ब्रह्मांड, यमदूतों और पुण्य होने पर विष्णु पार्षदों को देख सकती है।

मृत्यु के बादआत्मादर्शन
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा अंगूठे के आकार की क्यों कही गई है?

प्राण निकलते ही आत्मा अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म स्वरूप धारण करती है, जिसे यमदूत पाश से बाँधते हैं।

अंगुष्ठमात्र आत्मामृत्युसूक्ष्म शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूतों को देखकर पापी जीव क्या करता है?

यमदूतों को देखकर पापी जीव भय से मल-मूत्र त्याग देता है।

यमदूतपापी जीवभय
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

भागवत पुराण में यमदूतों का वर्णन कैसे है?

भागवत पुराण में यमदूतों को भयंकर, उग्र दृष्टि वाले और पापी जीव को भयभीत करने वाला बताया गया है।

भागवत पुराणयमदूतमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूतों का स्वरूप कैसा बताया गया है?

यमदूत भयंकर, उग्र और क्रोध से भरी आँखों वाले बताए गए हैं।

यमदूतस्वरूपभयंकर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय यमदूत कब आते हैं?

जब प्राण कंठ में अवरुद्ध होते हैं, तब पापी जीव के सामने यमदूत आते हैं।

यमदूतमृत्युप्राण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

प्राण कंठ में रुकने पर क्या होता है?

प्राण कंठ में रुकने पर चेतना सिमटती है और पापी जीव को यमदूत दिखाई देते हैं।

प्राणोत्क्रमणकंठयमदूत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय देह की पवित्रता कैसे रखी जाती है?

गोमय-लेपित भूमि, कुशा, तुलसी, शालिग्राम और नौ द्वारों में स्वर्ण से मृत्यु-समय देह की पवित्रता रखी जाती है।

देह पवित्रतामृत्युतुलसी
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

शरीर के नौ द्वारों में स्वर्ण रखने का क्या विधान है?

नौ द्वारों में स्वर्ण रखना देह की पवित्रता और पारलौकिक शुद्धता का शास्त्रीय विधान है।

नौ द्वारस्वर्णमृत्यु विधि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मरणासन्न व्यक्ति के पास शालिग्राम शिला क्यों रखी जाती है?

शालिग्राम शिला मृत्यु-समय की पवित्रता और पारलौकिक शुद्धता के विधान में रखी जाती है।

शालिग्राम शिलामरणासन्नमृत्यु संस्कार
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय कंठ पर तुलसी पत्र क्यों रखा जाता है?

कंठ पर तुलसी पत्र रखना मृत्यु के समय पवित्रता और पारलौकिक शुद्धता की विधि का भाग है।

तुलसी पत्रकंठमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मरणासन्न व्यक्ति के हाथों पर तुलसी क्यों रखी जाती है?

मरणासन्न व्यक्ति के हाथों पर तुलसी रखना मृत्यु-समय की शास्त्रीय पवित्रता-विधि का भाग है।

तुलसीमरणासन्नमृत्यु विधि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

शय्या या खाट पर प्राण त्यागना क्यों वर्जित है?

शास्त्रों में प्राण त्याग के लिए शय्या के बजाय गोमय-लेपित भूमि और कुशा का विधान है।

शय्याखाटप्राण त्याग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय कुशा क्यों बिछाई जाती है?

कुशा मरणासन्न व्यक्ति को पवित्र भूमि पर स्थापित करने के शास्त्रीय विधान का भाग है।

कुशामरणासन्नगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय गोमय लेपन क्यों किया जाता है?

गोमय लेपन मृत्यु के समय भूमि को शास्त्रीय रूप से पवित्र करने के लिए किया जाता है।

गोमयमृत्यु विधिगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मरणासन्न व्यक्ति को भूमि पर क्यों लिटाया जाता है?

मरणासन्न व्यक्ति को गोमय-लेपित भूमि पर कुशा बिछाकर लिटाना शास्त्रीय विधान है।

मरणासन्न व्यक्तिभूमिगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय पापी जीव को वैराग्य क्यों नहीं होता?

पापी और विषयासक्त जीव मृत्यु के सामने भी मोह के कारण वैराग्य नहीं पाता।

मृत्युपापी जीववैराग्य
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

भागवत पुराण में वृद्धावस्था और मृत्यु का क्या वर्णन है?

भागवत पुराण में वृद्ध जीव रोगग्रस्त, निर्भर, कुरूप और मृत्यु के सम्मुख होते हुए भी वैराग्यहीन बताया गया है।

भागवत पुराणवृद्धावस्थामृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु से पहले जीव की अवस्था कैसी होती है?

मृत्यु से पहले पापी जीव वृद्ध, रोगग्रस्त, वैराग्यहीन और यमदूतों को देखकर भयभीत बताया गया है।

मरणासन्न अवस्थामृत्यु से पहलेभागवत पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यातना देह में आत्मा को पीड़ा कैसे होती है?

यातना देह में आत्मा जलने, कटने, फटने, भूख-प्यास, थकान और यममार्ग के कष्टों को अनुभव करती है।

यातना देहआत्मा की पीड़ायममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यातना देह नष्ट क्यों नहीं होती?

यातना देह कष्ट सहने के लिए बनी होती है; वह पीड़ा अनुभव करती है लेकिन नष्ट नहीं होती।

यातना देहनरकपीड़ा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पापी जीव को यातना देह क्यों मिलती है?

पापी जीव को अपने कर्मों के अनुसार यममार्ग और नरक की यातनाएँ सहने के लिए यातना देह मिलती है।

पापी जीवयातना देहयमदूत

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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