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तिथि

चतुर्दशी तिथि — तिथि — विधि, व्रत, पूजन प्रश्नोत्तर(64)

चतुर्दशी तिथि से जुड़े 64 प्रश्न — विधि, नियम, मंत्र, लाभ। शास्त्र-सम्मत व्याख्या एक स्थान पर।

पूजन विधान

अनंत चतुर्दशी व्रत में मुख्य रूप से किसकी पूजा होती है?

इस व्रत में मुख्य रूप से भगवान विष्णु के 'अनन्त' स्वरूप और उनकी शय्या बने काल के प्रतीक 'शेषनाग' की पूजा की जाती है।

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तिथि और मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी की पूजा का सही समय (मध्याह्न मुहूर्त) क्या होता है?

शास्त्रों के अनुसार, अनंत चतुर्दशी की पूजा हमेशा 'मध्याह्न काल' (दिन के बीच के समय यानी दोपहर) में करनी चाहिए, क्योंकि इसी समय अनंत सूत्र का निर्माण और पूजन किया जाता है।

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परिचय

अनंत चतुर्दशी क्या है और क्यों मनाई जाती है?

यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में भगवान विष्णु के 'अनन्त' स्वरूप की पूजा का दिन है। यह पर्व ब्रह्मांडीय शक्तियों से जुड़ने और भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए मनाया जाता है।

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तिथि नियम

अकाल मृत्यु (दुर्घटना, आत्महत्या) वालों का श्राद्ध किस दिन (चतुर्दशी) करना चाहिए?

शास्त्रों के अनुसार दुर्घटना, जहर, आग, डूबने या आत्महत्या जैसी अकाल मृत्यु वालों का श्राद्ध केवल पितृ पक्ष की 'चतुर्दशी' (14वीं तिथि) को ही करना चाहिए।

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उद्यापन और दान

मासिक शिवरात्रि व्रत का उद्यापन कैसे करें?

उद्यापन में 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र से हवन करें और 12 या 14 ब्राह्मणों को भोजन व दान देकर विदा करें।

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पूजा विधि

मासिक शिवरात्रि की पूजा में क्या-क्या चढ़ाना चाहिए?

पूजा में दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, बिल्व पत्र और भस्म मुख्य रूप से चढ़ानी चाहिए।

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व्रत कथा

मासिक शिवरात्रि व्रत की कथा क्या है?

यह कथा एक शिकारी की है जिसने अनजाने में बेल के पेड़ पर बैठकर रात भर शिवलिंग पर पत्ते और जल गिराए थे, जिससे प्रसन्न होकर शिव जी ने उसे मोक्ष दिया।

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व्रत नियम और संकल्प

मासिक शिवरात्रि का व्रत किस दिन करते हैं?

यह व्रत उस दिन रखा जाता है जब चतुर्दशी तिथि आधी रात (निशीथ काल) के समय पड़ रही हो।

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व्रत का महत्व

मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है?

महाशिवरात्रि साल में एक बार आती है और सृष्टि के आरंभ का महापर्व है, जबकि मासिक शिवरात्रि हर महीने मन की शांति और नियमित साधना के लिए की जाती है।

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व्रत एवं त्योहार

नरक चतुर्दशी की कथा क्या है?

नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया और 16 हजार बंदी स्त्रियों को मुक्त कराया था। इसी की खुशी में दीप जलाए गए और यह पर्व मनाया जाने लगा।

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व्रत एवं उपवास

मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में अंतर

मासिक शिवरात्रि प्रत्येक माह की कृष्ण चतुर्दशी को आती है, यानी वर्ष में १२ बार। महाशिवरात्रि साल में एक बार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को आती है और इसका महत्व सर्वाधिक है — इस दिन शिव-पार्वती दोनों की पूजा होती है।

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व्रत विधि

अनंत चतुर्दशी पर अनंत धागा बांधने की विधि क्या है?

अनंत धागा: हल्दी रंगा सूत/रेशम → 14 गाँठ (प्रति गाँठ 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय') → विष्णु पूजन → 'अनन्त संसारमहासमुद्रे...' मंत्र → पुरुष दाहिने, स्त्री बाएँ हाथ → 14 वर्ष व्रत → उद्यापन। 14 गाँठ = 14 भुवन।

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व्रत विधि

अनंत चतुर्दशी व्रत की विधि क्या है?

अनंत चतुर्दशी: भाद्रपद शुक्ल 14। विधि: 14 गाँठ पीला धागा (अनंत सूत्र) → शेषनाग/अनंत विष्णु पूजन → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' → कथा श्रवण → सूत्र बंधन (पुरुष दाहिने, स्त्री बाएँ)। 14 वर्ष व्रत। गणेश विसर्जन दिवस।

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त्योहार पूजा

नरक चतुर्दशी पर सुबह तेल स्नान क्यों करते हैं?

नरक चतुर्दशी तेल स्नान: कृष्ण ने नरकासुर वध के बाद प्रातः अभ्यंग स्नान किया — उसी स्मृति में। विधि: ब्रह्म मुहूर्त → तिल/सरसों तेल मालिश → हल्दी-बेसन उबटन → गर्म जल स्नान। फल: नरक यातना मुक्ति, पाप शुद्धि।

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पर्व-पञ्चांग
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