रामचरितमानस — बालकाण्ड'भगत हेतु भगवान प्रभु राम धरेउ तनु भूप' — इसका अर्थ?अर्थ — भक्तों के लिये भगवान ने राजा (मनुष्य) का शरीर धारण किया। भक्त-प्रेम ही अवतार का मूल कारण।#बालकाण्ड#भगत हेतु#राम
रामचरितमानस — बालकाण्ड'जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी। सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी' — इसका अर्थ?अर्थ — रामजी के विवाह की जो विधि बताई, उसी रीति से सब राजकुमार (भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न) भी विवाहे गये। चारों विवाह एक ही वेदविधि, एक मण्डप, एक अवसर पर। दहेज से मण्डप सोने-मणियों से भरा।#बालकाण्ड#चौपाई अर्थ#चारों विवाह
रामचरितमानस — बालकाण्ड'भरे भुवन घोर कठोर रव रबि बाजि तजि मारगु चले' — इसका अर्थ?अर्थ — भयंकर कठोर ध्वनि से सब लोक भरे, सूर्य के घोड़े मार्ग छोड़ भटके, दिग्गज चिंघाड़े, पृथ्वी डोली, शेष-वाराह-कच्छप कलमलाये। धनुष भंग की ध्वनि से सारी सृष्टि काँप उठी।#बालकाण्ड#छन्द अर्थ#धनुष भंग ध्वनि
रामचरितमानस — बालकाण्ड'कोदंड खण्डेउ राम तुलसी जयति बचन उचारहीं' — इसका अर्थ?अर्थ — तुलसीदासजी कहते हैं — जब सबको निश्चय हुआ कि रामजी ने कोदण्ड (शिवजी का धनुष) तोड़ डाला, तब सब 'जयति' (जय हो) बोलने लगे। धनुष भंग के क्षण की जयकार।#बालकाण्ड#छन्द अर्थ#धनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड'भूप सहस दस एकहिं बारा। लगे उठावन टरइ न टारा' — इसका अर्थ?अर्थ — दस हज़ार राजा एक साथ उठाने लगे पर धनुष टस-से-मस नहीं हुआ। शिवजी का धनुष इतना भारी और दिव्य कि कोई हिला तक नहीं सका। इसके बाद जनक ने निराश वाणी कही।#बालकाण्ड#दोहा अर्थ#दस हज़ार राजा
रामचरितमानस — बालकाण्ड'कोउ कह जौं ए बर बरैं तौ सखि कहा बुझाइ' — इसका अर्थ?जनकपुर की स्त्रियों का संवाद — यदि विधाता उचित फल देते हैं तो जानकी को यही वर मिलेगा, सन्देह नहीं। यदि ऐसा संयोग बने तो सब कृतार्थ होंगे — सखी कहती हैं 'ये ससुराल यहाँ आयें' इसकी आतुरता है।#बालकाण्ड#जनकपुर स्त्रियाँ#सखी संवाद
रामचरितमानस — बालकाण्ड'सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाई। राम देत नहिं बनइ गोसाई' — इसका अर्थ?अर्थ — सब पुत्र मुझे प्राणों समान प्यारे हैं, राम को देना सम्भव नहीं। दशरथ ने कहा — पृथ्वी, गौ, धन, प्राण सब दे दूँगा पर राम नहीं दे सकता। कहाँ भयानक राक्षस, कहाँ मेरा सुकुमार पुत्र।#बालकाण्ड#दशरथ वचन#चौपाई अर्थ
रामचरितमानस — बालकाण्ड'राम' नाम का अर्थ वसिष्ठजी ने क्या बताया?'राम' = जो सबके हृदय में रमण करते हैं, आनन्दस्वरूप। 'र' 'आ' 'म' — अग्नि, सूर्य, चन्द्रमा का बीज। ब्रह्मा, विष्णु, शिव स्वरूप। वेदों का प्राण, निर्गुण, अनुपम, गुणनिधान।#बालकाण्ड#राम नाम अर्थ#वसिष्ठ
रामचरितमानस — बालकाण्ड'बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार' — इसका अर्थ?अर्थ — ब्राह्मण, गौ, देवता और संतों के लिये भगवान ने मनुष्य अवतार लिया। उनका शरीर माया-गुणों से परे, स्वेच्छा से निर्मित है।#बालकाण्ड#दोहा अर्थ#मनुज अवतार
रामचरितमानस — बालकाण्ड'असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु' — इसका अर्थ?अर्थ — भगवान असुरों को मारकर देवताओं को स्थापित करते हैं, अपने वेदरूपी सेतु (धर्ममार्ग) की रक्षा करते हैं और जगत में निर्मल यश फैलाते हैं — यही श्रीराम जन्म का कारण है। 'श्रुति सेतु' = वेदमार्ग/धर्ममार्ग।#बालकाण्ड#दोहा अर्थ#अवतार उद्देश्य
रामचरितमानस — बालकाण्ड'करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटिहि कलेसू' — इसका अर्थ?अर्थ — ऐसा तप करो जिससे शिवजी मिल जायें, दूसरे किसी उपाय से यह कष्ट नहीं मिटेगा। नारदजी ने स्पष्ट किया कि शिवजी प्राप्ति का एकमात्र मार्ग कठोर तपस्या है, कोई और उपाय काम नहीं करेगा।#बालकाण्ड#चौपाई अर्थ#तपस्या
रामचरितमानस — बालकाण्ड'योगाग्नि' से शरीर त्यागने का क्या अर्थ है?'योगाग्नि' = योगशक्ति से प्रकट आन्तरिक दिव्य अग्नि। यह बाहरी आग नहीं, बल्कि प्राणशक्ति और योगसाधना से शरीर के भीतर अग्नि तत्व जाग्रत करना है। यह इच्छामृत्यु का उच्चतम रूप है जो केवल सिद्ध योगी कर सकते हैं।#बालकाण्ड#योगाग्नि#अर्थ
रामचरितमानस — बालकाण्ड'रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा' — इसका अर्थ क्या है?अर्थ — इसका नाम 'रामचरितमानस' है, जिसके कानों से सुनते ही शान्ति (विश्राम) मिलती है। विषय-तापसे जलता मनरूपी हाथी इस मानसरूपी सरोवर में आकर सुखी हो जाता है।#बालकाण्ड#मानस नामकरण#चौपाई
रामचरितमानस — बालकाण्ड'नौमी भौम बार मधुमासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा' — इसका अर्थ क्या है?अर्थ — चैत्र मास (मधुमास) की नवमी तिथि, मंगलवार (भौम बार) को अयोध्यापुरी (अवधपुरी) में यह चरित्र (रामचरितमानस) प्रकाशित हुआ। यही रामनवमी का दिन है जब भगवान राम का जन्म हुआ था।#बालकाण्ड#रचना तिथि#अयोध्या