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रामचरितमानस — बालकाण्ड⏱ 2 मिनट पठन

'कोउ कह जौं ए बर बरैं तौ सखि कहा बुझाइ' — इसका अर्थ?

जनकपुर की स्त्रियों का संवाद — यदि विधाता उचित फल देते हैं तो जानकी को यही वर मिलेगा, सन्देह नहीं।

संक्षिप्त उत्तर

जनकपुर की स्त्रियों का संवाद — यदि विधाता उचित फल देते हैं तो जानकी को यही वर मिलेगा, सन्देह नहीं। यदि ऐसा संयोग बने तो सब कृतार्थ होंगे — सखी कहती हैं 'ये ससुराल यहाँ आयें' इसकी आतुरता है।

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विस्तृत उत्तर

यह जनकपुर की स्त्रियों का संवाद है जब उन्होंने श्रीरामजी को देखकर सीताजी से उनके विवाह की कामना की।

पूरा प्रसंग — 'कोउ कह जौं भल अहइ बिधाता। सब कहँ सुनिअ उचित फलदाता। तौ जानकिहि मिलिहि बरु एहू। नाहिन आलि इहाँ संदेहू॥'

अर्थ — कोई कहती है — यदि विधाता भले हैं और सुना जाता है कि वे सबको उचित फल देते हैं, तो जानकीजीको यही वर मिलेगा। हे सखी! इसमें सन्देह नहीं है।

आगे — 'जौं बिधि बस अस बनै सँजोगू। तौ कृतकृत्य होइ सब लोगू। सखि हमरें आरति अति ताते। कबहुँक ए आवहिं एहि नातें॥'

अर्थ — जो दैवयोगसे ऐसा संयोग बन जाय, तो हम सब लोग कृतार्थ हो जायँ। हे सखी! मेरे तो इसीसे इतनी अधिक आतुरता हो रही है कि ये कभी ये इसी नातेसे (ससुराल) यहाँ आवें।

तात्पर्य — जनकपुर की स्त्रियों ने रामजी को जानकी का योग्य वर माना और उनके विवाह की हार्दिक कामना की।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

'कोउ कह जौं ए बर बरैं तौ सखि कहा बुझाइ' — इसका अर्थ को संदर्भ सहित समझें

'कोउ कह जौं ए बर बरैं तौ सखि कहा बुझाइ' — इसका अर्थ का सबसे सीधा सार यह है: जनकपुर की स्त्रियों का संवाद — यदि विधाता उचित फल देते हैं तो जानकी को यही वर मिलेगा, सन्देह नहीं। यदि ऐसा संयोग बने तो सब कृतार्थ होंगे...

रामचरितमानस — बालकाण्ड जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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रामचरितमानस — बालकाण्ड प्रश्नोत्तर
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