विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड में वसिष्ठजी द्वारा 'राम' नाम के अर्थ का विस्तृत वर्णन संक्षिप्त है, पर नाम महिमा प्रकरण में 'राम' नाम का गहन अर्थ बताया गया है।
राम' शब्द का अर्थ — जो सबके हृदय में रमण (विहार/निवास) करते हैं। 'रमन्ते योगिनो यस्मिन् स रामः' — जिसमें योगी लोग रमण करते हैं (आनन्द अनुभव करते हैं) वही राम हैं।
बालकाण्ड में कहा — 'बंदउँ नाम राम रघुबर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को। बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो॥'
अर्थ — 'राम' नाम अग्नि, सूर्य और चन्द्रमा का बीज है ('र' 'आ' 'म' अक्षरों से)। यह ब्रह्मा, विष्णु और शिव स्वरूप है, वेदों का प्राण है, निर्गुण है, उपमारहित है और गुणों का भण्डार है।
इस प्रकार 'राम' = आनन्दस्वरूप, सर्वव्यापक, ब्रह्मा-विष्णु-शिव तीनों का प्रतिनिधि, वेदों का सार।





