व्रत विधिहरतालिका तीज व्रत में बालू से शिव पार्वती बनाने का क्या विधान है?बालू शिव-पार्वती: पार्वती ने बालू शिवलिंग बनाकर तप किया (अनुसरण)। विधि: बालू/मिट्टी→शिवलिंग+पार्वती+गणेश→केले पत्ते→षोडशोपचार→बेलपत्र। 'हरतालिका'=सखी ने हरा (छिपाया)। निर्जला+जागरण। प्रातः विसर्जन।#हरतालिका तीज#बालू#शिव-पार्वती
व्रतहरतालिका तीज व्रत कैसे रखें विधि सहितहरतालिका तीज: भाद्रपद शुक्ल तृतीया। निर्जला व्रत (जल भी वर्जित)। बालू से शिव-पार्वती प्रतिमा → षोडशोपचार पूजा → कथा श्रवण → रात्रि जागरण → अगले दिन पारण। कथा: पार्वती ने शिव प्राप्ति हेतु किया। सौभाग्य, मनचाहा वर।#हरतालिका#तीज#पार्वती
नित्य मंत्रभोजन के बाद कौन सा मंत्र बोलें?भोजन पूर्व: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः...' (गीता 4.24) + पंचप्राण आहुति। भोजन बाद: 'अन्नदाता सुखी भव' + 'ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा' (जल सहित) + आचमन। पूर्व/उत्तर मुख, मौन भोजन श्रेष्ठ।#भोजन मंत्र#अन्नपूर्णा#भोजनोत्तर
दैनिक कर्मभोजन से पहले कौन सा मंत्र बोलना चाहिएभोजन से पहले: (1) गीता 4.24: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्' (2) उपनिषद: 'ॐ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु' (3) 'अन्नब्रह्मा रसो विष्णुः भोक्ता देवो महेश्वरः' (4) अन्नपूर्णा स्तोत्र। पूर्व/उत्तर दिशा में मुख कर भूमि पर बैठकर भोजन करें।#भोजन मंत्र#ब्रह्मार्पणम्#अन्नपूर्णा
पौराणिक कथागणेश जी की कथा क्या है?गणेश जी का जन्म माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से किया। शिव जी ने अनजाने में उनका सिर काट दिया, फिर हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया और 'प्रथम पूज्य' घोषित किया। माता-पिता की परिक्रमा से प्रथम पूज्य का वरदान मिला। परशुराम से युद्ध में एक दाँत टूटने से 'एकदंत' नाम पड़ा।#गणेश कथा#जन्म कथा#हाथी का सिर
शिव पार्वती विवाहशिव की बारात को देखकर मेना ने क्या किया?शिव की भयानक बारात देखकर माता मेना रो पड़ीं और विलाप करने लगीं। उन्होंने नारद को दोष दिया। पार्वती जी ने माँ को समझाया और नारद जी ने शिव की महिमा बताई, तब जाकर मेना विवाह के लिए मान गईं।#मेना#शिव बारात#पार्वती माता
देवी पूजाअन्नपूर्णा देवी की पूजा से अन्न की कमी कैसे दूर होती है?अन्नपूर्णा = पार्वती रूप, सृष्टि को अन्न देने वाली। शिव पुराण: शिव को भी भिक्षा मांगनी पड़ी। तैत्तिरीय उपनिषद: 'अन्नं ब्रह्म'। मंत्र: 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' (शंकराचार्य)। अन्न भोग, अन्न दान सर्वश्रेष्ठ पूजा। शुक्रवार/पूर्णिमा विशेष। काशी अन्नपूर्णा मंदिर प्रसिद्ध।#अन्नपूर्णा#अन्न#काशी
शिव पार्वती विवाहशिव ने पार्वती से विवाह के लिए सुनटनर्तक रूप क्यों धारण किया?शिव ने सुनटनर्तक (ब्राह्मण) रूप इसलिए धारण किया क्योंकि वे पार्वती के प्रेम और निश्चय की परीक्षा लेना चाहते थे। पार्वती ने शिव की निंदा सुनकर भी अपना निश्चय नहीं बदला, तब शिव प्रकट हुए और विवाह स्वीकार किया।#सुनटनर्तक#शिव पार्वती परीक्षा#शिव विवाह
शिव लीलापार्वती ने शिव की आँखें क्यों ढक दी थीं और उससे क्या हुआ?पार्वती ने शिव की आँखें खेल-भाव से ढकी थीं। इससे पूरे जगत में घोर अंधकार हो गया। सृष्टि बचाने के लिए शिव ने तीसरा नेत्र खोला। उसकी उष्मा से पार्वती के पसीने की बूँदों से एक भयंकर बालक 'अंधक' प्रकट हुआ।#पार्वती#शिव आँखें#अंधकार
शिव महिमापार्वती ने शिव का गला क्यों दबाया जब वे विष पी रहे थे?माता पार्वती ने शिव का गला इसलिए दबाया ताकि विष उदर में न जाए — क्योंकि शिव के भीतर सम्पूर्ण सृष्टि है और विष वहाँ पहुँचता तो सृष्टि नष्ट हो जाती। माता की शक्ति ने विष को कंठ में ही स्थिर रखा।#पार्वती#शिव विषपान#गला दबाया
नवदुर्गाशैलपुत्री की पूजा विधि और मंत्र क्या है?नवरात्रि दिन 1। हिमालय पुत्री, वृषभ वाहन, त्रिशूल+कमल। मंत्र: 'ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः'। भोग: शुद्ध घी। रंग: पीला। मूलाधार चक्र। कथा: सती → पुनर्जन्म → हिमालय पुत्री → शिव विवाह।#शैलपुत्री#प्रथम#नवरात्रि
वास्तु तस्वीर नियमघर में शिव पार्वती की तस्वीर किस दिशा में लगाएं?शिव-पार्वती की तस्वीर पूजा घर (ईशान कोण) या उत्तर दिशा में लगाएँ। नंदी पर विराजमान या ध्यान मुद्रा सर्वोत्तम। नटराज/उग्र शिव वर्जित। बेडरूम में दांपत्य प्रेम के लिए भी लगा सकते हैं।#शिव पार्वती#तस्वीर दिशा#वास्तु
शिव महिमाशिव ने हलाहल विष को गले में क्यों रोका, नीचे क्यों नहीं उतरने दिया?शिव के भीतर समस्त सृष्टि समाहित है — विष उदर में जाता तो सृष्टि नष्ट हो जाती। माता पार्वती ने गला दबाकर विष को कंठ में ही रोक दिया। इससे शिव जी का कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए।#हलाहल#शिव गला#नीलकंठ