नीलकंठ स्वरूप और कालकूट विषपानशिव के कंठ का रंग नीला कैसे हुआ?विषपान के समय देवी पार्वती ने शिव का कंठ दबा दिया जिससे विष कंठ में रुक गया और उसके प्रभाव से कंठ का रंग नीला हो गया।#नीला कंठ#पार्वती#विष
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्यऋषि भृंगी ने पार्वती की पूजा क्यों नहीं की?ऋषि भृंगी केवल शिव के भक्त थे और शिव-शक्ति में भेद मानते थे, इसीलिए उन्होंने पार्वती की पूजा से इनकार किया।#ऋषि भृंगी#पार्वती#शिव भक्त
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्यपार्वती ने महादेव से क्या इच्छा प्रकट की थी?पार्वती ने महादेव से 'अंग से अंग' मिलाकर हमेशा के लिए साथ रहने की इच्छा प्रकट की थी, जिससे अर्धनारीश्वर स्वरूप का प्राकट्य हुआ।#पार्वती#महादेव#भक्ति
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्यस्कंदपुराण में अर्धनारीश्वर रूप कैसे प्रकट हुआ?स्कंदपुराण के अनुसार, पार्वती ने शिव से 'अंग से अंग' मिलाकर रहने की इच्छा प्रकट की — उनकी इस परम भक्ति और प्रेम से अर्धनारीश्वर रूप का प्राकट्य हुआ।#स्कंदपुराण#अर्धनारीश्वर#पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्डतपस्या और दृढ़ संकल्प की शिक्षा — पार्वती प्रसंग से?'जन्म कोटि लगि रगर हमारी' — करोड़ जन्म हठ, सप्तर्षियों की परीक्षा में अडिग। शिक्षा — दृढ़ संकल्प से असम्भव भी सम्भव।#बालकाण्ड#तपस्या#दृढ़ संकल्प
पौराणिक कथामाता पार्वती के श्राप से लंगड़ा बालक कैसे ठीक हुआ?नाग कन्याओं के बताने पर उस बालक ने लगातार 21 'संकष्टी चतुर्थी' का अत्यंत कठोर व्रत किया, जिससे भगवान गणेश ने खुश होकर उसे पूरी तरह से ठीक कर दिया।#विकट संकष्टी#श्राप मुक्ति#व्रत प्रभाव
पौराणिक कथाशिव-पार्वती के चौसर (पांसे) की कहानी?चौसर के खेल में एक बालक ने माता पार्वती के जीतने पर भी पक्षपात करते हुए शिव जी को जीता हुआ बता दिया, जिस पर गुस्सा होकर माता ने उसे लंगड़ा होने का श्राप दे दिया।#चौसर#शिव पार्वती#श्राप
रामचरितमानस — बालकाण्डबालकाण्ड में सबसे पहले कौन सी कथा आती है — शिव-सती या पार्वती जन्म?शिव-सती कथा पहले — पार्वती जन्म बाद में। क्रम: मंगलाचरण → नाम महिमा → याज्ञवल्क्य-भरद्वाज → शिव-सती → दक्ष यज्ञ → सती देहत्याग → पार्वती जन्म → तपस्या → शिव-पार्वती विवाह → रामावतार कारण → राम जन्म।#बालकाण्ड#कथा क्रम#शिव सती
रामचरितमानस — बालकाण्ड'गिरिजा' कौन हैं?पार्वतीजी — गिरि (पर्वत/हिमवान) की पुत्री। 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए।' अन्य नाम — उमा, भवानी, अम्बिका, गौरी, शैलकुमारी, अपर्णा।#बालकाण्ड#गिरिजा#पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्डसीताजी की सखियों ने पार्वती मूर्ति का हिलना देखकर क्या कहा?सखियों ने पार्वती मूर्ति को प्रसन्न होते (हिलते/मुस्कुराते) देखकर कहा कि देवी प्रसन्न हुईं — सीताजी का मनोरथ पूरा होगा, मनवांछित वर मिलेंगे। सीताजी को बड़ा हर्ष हुआ।#बालकाण्ड#सखी#पार्वती मूर्ति
रामचरितमानस — बालकाण्डसीताजी ने पार्वती पूजन में क्या-क्या अर्पित किया?मानस में विस्तृत सामग्री वर्णन संक्षिप्त है। सीताजी ने पार्वतीजी के मन्दिर में चरणों में वन्दना की, हाथ जोड़कर स्तुति की, और प्रेमपूर्वक पूजन किया। मुख्य भाव — हृदय से प्रार्थना और मनोरथ निवेदन।#बालकाण्ड#सीता पूजन#पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्डगिरिजा (पार्वती) की मूर्ति ने सीताजी को क्या वरदान दिया?पार्वती मूर्ति ने प्रसन्न होकर मुस्कुराई और वरदान दिया — मनवांछित वर (रामजी) मिलेंगे, मनोरथ पूर्ण होगा। सखियों ने मूर्ति का हिलना देखा — 'देवी प्रसन्न हुईं।' सीताजी को बड़ा हर्ष हुआ।#बालकाण्ड#पार्वती वरदान#सीता
रामचरितमानस — बालकाण्डसीताजी ने माता पार्वती से कैसा वर माँगा?सीताजी ने सीधे शब्दों में नहीं कहा — 'मोर मनोरथु जानहु नीकें' — मेरा मनोरथ आप जानती हैं। नारदजी के वचन स्मरण कर मन में पवित्र प्रीति जागी — रामजी उनके वर बनें, यही हृदय भाव से प्रार्थना।#बालकाण्ड#सीता#पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्डसीताजी ने गिरिजा (पार्वती) मन्दिर में क्या प्रार्थना की?सीताजी ने पार्वतीजी की स्तुति की — 'जय जय गिरिबरराज किसोरी' — और कहा कि मेरा मनोरथ आप जानती हैं, आप सबके हृदय में बसती हैं, इसलिये प्रकट नहीं किया। चरण पकड़कर मनोवांछित वर (रामजी) की प्रार्थना की।#बालकाण्ड#सीता प्रार्थना#पार्वती मन्दिर
रामचरितमानस — बालकाण्डशिवजी ने राम अवतार के कितने कारण बताये?शिवजी ने अनेक कारण बताये पर कहा — 'इदमित्थं कहि जाइ न सोई' — निश्चित संख्या नहीं कही जा सकती। प्रमुख कारण — धर्म हानि, जय-विजय शाप, नारद शाप, मनु-शतरूपा वरदान, प्रतापभानु कथा, भक्त प्रेम। कारण अनन्त हैं।#बालकाण्ड#अवतार कारण संख्या#शिवजी
रामचरितमानस — बालकाण्डशिव-पार्वती विवाह कहाँ सम्पन्न हुआ?हिमवान (पर्वतराज) की नगरी में। हिमाचल ने अत्यन्त विचित्र मण्डप बनवाया। नगर की शोभा इतनी सुन्दर थी कि ब्रह्माजी की रचना-चतुरी भी तुच्छ लगती। घर-घर तोरण-पताकाएँ शोभित थीं।#बालकाण्ड#शिव विवाह स्थान#हिमवान नगरी
रामचरितमानस — बालकाण्डशिव-पार्वती विवाह के बाद विदाई का वर्णन कैसा है?हिमाचल ने भव्य दहेज दिया — दासी, दास, घोड़े, रथ, हाथी, गायें, मणि, सोने के बर्तन। शिवजी पार्वतीजी को लेकर कैलास गये। 'सकल भुवन भरि रहा उछाहू' — सारे ब्रह्माण्ड में आनन्द भर गया। बाद में कार्तिकेय का जन्म हुआ।#बालकाण्ड#शिव पार्वती विदाई#दहेज
रामचरितमानस — बालकाण्डशिव-पार्वती विवाह में वेद मंत्रों से किसने विवाह करवाया?महामुनियों (श्रेष्ठ मुनिगणों) ने वेद मंत्रों की रीति से विवाह करवाया। हिमाचल ने हाथ में कुश लेकर कन्या का हाथ पकड़कर उन्हें भवानी जानकर शिवजी को समर्पित किया। पहले गणेशजी का पूजन किया गया।#बालकाण्ड#शिव पार्वती विवाह#वेद मंत्र
रामचरितमानस — बालकाण्डसप्तर्षियों ने परीक्षा उत्तीर्ण होने पर पार्वतीजी को क्या आशीर्वाद दिया?सप्तर्षि बोले — 'जय जय जगदंबिके भवानी!' — आप माया हैं, शिवजी भगवान हैं, आप दोनों जगत के माता-पिता हैं। मुनि पार्वतीजी के चरणों में सिर नवाकर बार-बार पुलकित होते हुए चले गये।#बालकाण्ड#सप्तर्षि आशीर्वाद#पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्डपार्वतीजी ने 'अपर्णा' नाम कैसे पाया?'अपर्णा' = अ (बिना) + पर्णा (पत्ते) = पत्तों के बिना रहने वाली। जब पार्वतीजी ने तपस्या में सूखे पत्ते खाना भी छोड़ दिया, तब उनका नाम 'अपर्णा' पड़ा। चौपाई — 'पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नामु तब भयउ अपरना॥'#बालकाण्ड#अपर्णा#पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी ने पार्वतीजी का हाथ देखकर क्या भविष्यवाणी की?नारदजी ने कहा — (1) सब गुणों की खान, सुन्दर, सुशील, (2) पति को सदा प्यारी, सुहाग अचल, (3) जगत में पूज्य होगी। परन्तु एक दोष बताया — वर निर्गुण, निलज, कुबेष, अकुल, अगेह, दिगम्बर होगा — जो शिवजी के ही लक्षण हैं।#बालकाण्ड#नारद#भविष्यवाणी
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी हिमवान के घर क्यों आये?नारदजी ने पार्वतीजी के जन्म के समाचार सुनकर कौतुकवश हिमवान के घर आये। पर्वतराज ने बड़ा आदर किया। नारदजी ने पार्वतीजी का हाथ देखकर भविष्यवाणी की और शिवजी प्राप्ति के लिये तपस्या का उपाय बताया।#बालकाण्ड#नारदजी#हिमवान
रामचरितमानस — बालकाण्डपार्वतीजी का बचपन का क्या वर्णन है बालकाण्ड में?नारदजी ने कहा — पार्वतीजी सब गुणों की खान हैं, स्वभाव से सुन्दर, सुशील और सयानी। सब सुलक्षणों से सम्पन्न, पति को सदा प्यारी होंगी, सुहाग अचल रहेगा। सारे जगत में पूज्य होंगी। नाम — उमा, अम्बिका, भवानी।#बालकाण्ड#पार्वती बचपन#उमा
रामचरितमानस — बालकाण्ड'कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन' — इसमें किसकी स्तुति है?यह भगवान शंकरजी (शिवजी) की स्तुति है। अर्थ — जिनका कुन्द और चन्द्रमा समान गौर शरीर है, जो पार्वतीजी के प्रियतम और दीनों पर दया करने वाले हैं, वे कामदेव को भस्म करने वाले शंकरजी मुझपर कृपा करें।#बालकाण्ड#शिव स्तुति#मंगलाचरण
पौराणिक कथाएँकामदेव को शिव ने क्यों भस्म किया?देवों के आग्रह पर कामदेव ने तारकासुर वध के लिए शिव की तपस्या भंग करने हेतु पुष्प बाण चलाया। क्रोधित शिव ने तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया। तभी से वे 'अनंग' (शरीर रहित) कहलाए।#कामदेव#शिव#भस्म
गृह आचार एवं पूजा विधिभोजन के पहले और बाद में कौन से मंत्र बोलने चाहिए?भोजन से पहले 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे' और 'ब्रह्मार्पणम्' श्लोक बोलें। भोजन के बाद पाचन हेतु 'अगस्त्यं कुम्भकर्णं च' मंत्र बोलें। भोजन से पहले हाथ-पाँव-मुँह धोना जरूरी है।#भोजन मंत्र#अन्नपूर्णा#ब्रह्मार्पणम
शिवशीघ्र विवाह के लिए भगवान शिव का कौन सा मंत्र जपना चाहिएविवाह हेतु 'ॐ साम्ब सदाशिवाय नमः' मंत्र और सोमवार के दिन शिव-पार्वती की विधिवत पूजा फलदायी होती है।#विवाह#शिव मंत्र#पार्वती
महिला एवं धर्मपार्वती माता तप से स्त्रियां क्या सीखेंदृढ़ संकल्प (मना करने पर भी), आत्म-सम्मान (अपमान सहन नहीं), कठिन परिश्रम (शॉर्टकट नहीं), प्रेम+शक्ति संतुलन, नई शुरुआत। पार्वती=बेटी+तपस्विनी+पत्नी+माता+योद्धा।#पार्वती#तप#स्त्री
तीर्थ यात्राकाशी अन्नपूर्णा मंदिर दर्शन विधानविश्वनाथ निकट; पार्वती अन्न देवी रूप। शिव भिक्षा कथा। गंगा→विश्वनाथ→अन्नपूर्णा = काशी विधि। अन्नदान = काशी सबसे पुण्यदायक।#काशी#अन्नपूर्णा#दर्शन
दैनिक आचारखाना बनाते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' या 'ॐ अन्नपूर्णायै नमः'। शांत मन, स्वच्छ, सकारात्मक भाव से बनाएं। क्रोध/नकारात्मकता में न बनाएं — भोजन भाव ग्रहण करता है।#खाना बनाना#रसोई#मंत्र
व्रत विधिहरतालिका तीज व्रत में बालू से शिव पार्वती बनाने का क्या विधान है?बालू शिव-पार्वती: पार्वती ने बालू शिवलिंग बनाकर तप किया (अनुसरण)। विधि: बालू/मिट्टी→शिवलिंग+पार्वती+गणेश→केले पत्ते→षोडशोपचार→बेलपत्र। 'हरतालिका'=सखी ने हरा (छिपाया)। निर्जला+जागरण। प्रातः विसर्जन।#हरतालिका तीज#बालू#शिव-पार्वती
व्रतहरतालिका तीज व्रत कैसे रखें विधि सहितहरतालिका तीज: भाद्रपद शुक्ल तृतीया। निर्जला व्रत (जल भी वर्जित)। बालू से शिव-पार्वती प्रतिमा → षोडशोपचार पूजा → कथा श्रवण → रात्रि जागरण → अगले दिन पारण। कथा: पार्वती ने शिव प्राप्ति हेतु किया। सौभाग्य, मनचाहा वर।#हरतालिका#तीज#पार्वती
नित्य मंत्रभोजन के बाद कौन सा मंत्र बोलें?भोजन पूर्व: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः...' (गीता 4.24) + पंचप्राण आहुति। भोजन बाद: 'अन्नदाता सुखी भव' + 'ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा' (जल सहित) + आचमन। पूर्व/उत्तर मुख, मौन भोजन श्रेष्ठ।#भोजन मंत्र#अन्नपूर्णा#भोजनोत्तर
दैनिक कर्मभोजन से पहले कौन सा मंत्र बोलना चाहिएभोजन से पहले: (1) गीता 4.24: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्' (2) उपनिषद: 'ॐ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु' (3) 'अन्नब्रह्मा रसो विष्णुः भोक्ता देवो महेश्वरः' (4) अन्नपूर्णा स्तोत्र। पूर्व/उत्तर दिशा में मुख कर भूमि पर बैठकर भोजन करें।#भोजन मंत्र#ब्रह्मार्पणम्#अन्नपूर्णा
पौराणिक कथागणेश जी की कथा क्या है?गणेश जी का जन्म माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से किया। शिव जी ने अनजाने में उनका सिर काट दिया, फिर हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया और 'प्रथम पूज्य' घोषित किया। माता-पिता की परिक्रमा से प्रथम पूज्य का वरदान मिला। परशुराम से युद्ध में एक दाँत टूटने से 'एकदंत' नाम पड़ा।#गणेश कथा#जन्म कथा#हाथी का सिर
शिव पार्वती विवाहशिव की बारात को देखकर मेना ने क्या किया?शिव की भयानक बारात देखकर माता मेना रो पड़ीं और विलाप करने लगीं। उन्होंने नारद को दोष दिया। पार्वती जी ने माँ को समझाया और नारद जी ने शिव की महिमा बताई, तब जाकर मेना विवाह के लिए मान गईं।#मेना#शिव बारात#पार्वती माता
देवी पूजाअन्नपूर्णा देवी की पूजा से अन्न की कमी कैसे दूर होती है?अन्नपूर्णा = पार्वती रूप, सृष्टि को अन्न देने वाली। शिव पुराण: शिव को भी भिक्षा मांगनी पड़ी। तैत्तिरीय उपनिषद: 'अन्नं ब्रह्म'। मंत्र: 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' (शंकराचार्य)। अन्न भोग, अन्न दान सर्वश्रेष्ठ पूजा। शुक्रवार/पूर्णिमा विशेष। काशी अन्नपूर्णा मंदिर प्रसिद्ध।#अन्नपूर्णा#अन्न#काशी
शिव पार्वती विवाहशिव ने पार्वती से विवाह के लिए सुनटनर्तक रूप क्यों धारण किया?शिव ने सुनटनर्तक (ब्राह्मण) रूप इसलिए धारण किया क्योंकि वे पार्वती के प्रेम और निश्चय की परीक्षा लेना चाहते थे। पार्वती ने शिव की निंदा सुनकर भी अपना निश्चय नहीं बदला, तब शिव प्रकट हुए और विवाह स्वीकार किया।#सुनटनर्तक#शिव पार्वती परीक्षा#शिव विवाह
शिव लीलापार्वती ने शिव की आँखें क्यों ढक दी थीं और उससे क्या हुआ?पार्वती ने शिव की आँखें खेल-भाव से ढकी थीं। इससे पूरे जगत में घोर अंधकार हो गया। सृष्टि बचाने के लिए शिव ने तीसरा नेत्र खोला। उसकी उष्मा से पार्वती के पसीने की बूँदों से एक भयंकर बालक 'अंधक' प्रकट हुआ।#पार्वती#शिव आँखें#अंधकार
शिव महिमापार्वती ने शिव का गला क्यों दबाया जब वे विष पी रहे थे?माता पार्वती ने शिव का गला इसलिए दबाया ताकि विष उदर में न जाए — क्योंकि शिव के भीतर सम्पूर्ण सृष्टि है और विष वहाँ पहुँचता तो सृष्टि नष्ट हो जाती। माता की शक्ति ने विष को कंठ में ही स्थिर रखा।#पार्वती#शिव विषपान#गला दबाया
नवदुर्गाशैलपुत्री की पूजा विधि और मंत्र क्या है?नवरात्रि दिन 1। हिमालय पुत्री, वृषभ वाहन, त्रिशूल+कमल। मंत्र: 'ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः'। भोग: शुद्ध घी। रंग: पीला। मूलाधार चक्र। कथा: सती → पुनर्जन्म → हिमालय पुत्री → शिव विवाह।#शैलपुत्री#प्रथम#नवरात्रि
वास्तु तस्वीर नियमघर में शिव पार्वती की तस्वीर किस दिशा में लगाएं?शिव-पार्वती की तस्वीर पूजा घर (ईशान कोण) या उत्तर दिशा में लगाएँ। नंदी पर विराजमान या ध्यान मुद्रा सर्वोत्तम। नटराज/उग्र शिव वर्जित। बेडरूम में दांपत्य प्रेम के लिए भी लगा सकते हैं।#शिव पार्वती#तस्वीर दिशा#वास्तु
शिव महिमाशिव ने हलाहल विष को गले में क्यों रोका, नीचे क्यों नहीं उतरने दिया?शिव के भीतर समस्त सृष्टि समाहित है — विष उदर में जाता तो सृष्टि नष्ट हो जाती। माता पार्वती ने गला दबाकर विष को कंठ में ही रोक दिया। इससे शिव जी का कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए।#हलाहल#शिव गला#नीलकंठ