विस्तृत उत्तर
शिव-पार्वती विवाह के बाद विदाई का भव्य वर्णन है। हिमाचल ने बहुत बड़ा दहेज दिया।
चौपाई — 'दासीं दास तुरग रथ नागा। धेनु बसन मनि बस्तु बिभागा। अन्न कनकभाजन भरि जाना। दाइज दीन्ह न जाइ बखाना॥'
इसका अर्थ — दासी, दास, घोड़े, रथ, हाथी, गायें, वस्त्र और मणि आदि अनेक प्रकारकी चीजें तथा अन्न और सोनेके बर्तन गाड़ियोंमें लदवाकर दहेजमें दिये, जिनका वर्णन नहीं हो सकता।
इसके बाद शिवजी पार्वतीजी को लेकर कैलास पधारे। बालकाण्ड में कहा — 'हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू॥'
अर्थ — शिव-पार्वतीका विवाह हो गया। सारे ब्रह्माण्डमें आनन्द भर गया।
इसके बाद शिवजी के पुत्र षण्मुखी (कार्तिकेय/स्वामिकार्तिक) का जन्म हुआ जिन्होंने बड़े होकर युद्ध में तारकासुर को मारा।





