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रामचरितमानस — बालकाण्ड⏱ 2 मिनट पठन

पार्वतीजी का बचपन का क्या वर्णन है बालकाण्ड में?

नारदजी ने कहा — पार्वतीजी सब गुणों की खान हैं, स्वभाव से सुन्दर, सुशील और सयानी।

संक्षिप्त उत्तर

नारदजी ने कहा — पार्वतीजी सब गुणों की खान हैं, स्वभाव से सुन्दर, सुशील और सयानी। सब सुलक्षणों से सम्पन्न, पति को सदा प्यारी होंगी, सुहाग अचल रहेगा। सारे जगत में पूज्य होंगी। नाम — उमा, अम्बिका, भवानी।

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विस्तृत उत्तर

बालकाण्ड में पार्वतीजी के बचपन का बहुत सुन्दर वर्णन है। नारदजी ने उनके गुण बताये:

चौपाई — 'कह मुनि बिहसि गूढ़ मृदु बानी। सुता तुम्हारि सकल गुन खानी। सुंदर सहज सुसील सयानी। नाम उमा अंबिका भवानी॥'

अर्थ — नारद मुनिने हँसकर रहस्ययुक्त कोमल वाणीसे कहा — तुम्हारी कन्या सब गुणोंकी खान है। यह स्वभावसे ही सुन्दर, सुशील और समझदार है। उमा, अम्बिका और भवानी इसके नाम हैं।

आगे — 'सब लच्छन संपन्न कुमारी। होइहि संतत पियहि पिआरी। सदा अचल एहि कर अहिवाता। एहि तें जसु पैहहिं पितु माता॥'

अर्थ — कन्या सब सुलक्षणोंसे सम्पन्न है, यह अपने पतिको सदा प्यारी होगी। इसका सुहाग सदा अचल रहेगा और इससे इसके माता-पिता यश पावेंगे।

नारदजी ने भविष्यवाणी भी की — 'होइहि पूज्य सकल जग माहीं। एहि सेवत कछु दुर्लभ नाहीं॥' — यह सारे जगतमें पूज्य होगी और इसकी सेवा करनेसे कुछ भी दुर्लभ न होगा।

इस प्रकार बचपन से ही पार्वतीजी सब सुलक्षणों से सम्पन्न, स्वभाव से सुन्दर, सुशील और सयानी थीं।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

पार्वतीजी का बचपन का क्या वर्णन है बालकाण्ड में को संदर्भ सहित समझें

पार्वतीजी का बचपन का क्या वर्णन है बालकाण्ड में का सबसे सीधा सार यह है: नारदजी ने कहा — पार्वतीजी सब गुणों की खान हैं, स्वभाव से सुन्दर, सुशील और सयानी। सब सुलक्षणों से सम्पन्न, पति को सदा प्यारी होंगी, सुहाग अचल रहेगा।...

रामचरितमानस — बालकाण्ड जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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रामचरितमानस — बालकाण्ड प्रश्नोत्तर
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