विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड में पार्वतीजी के बचपन का बहुत सुन्दर वर्णन है। नारदजी ने उनके गुण बताये:
चौपाई — 'कह मुनि बिहसि गूढ़ मृदु बानी। सुता तुम्हारि सकल गुन खानी। सुंदर सहज सुसील सयानी। नाम उमा अंबिका भवानी॥'
अर्थ — नारद मुनिने हँसकर रहस्ययुक्त कोमल वाणीसे कहा — तुम्हारी कन्या सब गुणोंकी खान है। यह स्वभावसे ही सुन्दर, सुशील और समझदार है। उमा, अम्बिका और भवानी इसके नाम हैं।
आगे — 'सब लच्छन संपन्न कुमारी। होइहि संतत पियहि पिआरी। सदा अचल एहि कर अहिवाता। एहि तें जसु पैहहिं पितु माता॥'
अर्थ — कन्या सब सुलक्षणोंसे सम्पन्न है, यह अपने पतिको सदा प्यारी होगी। इसका सुहाग सदा अचल रहेगा और इससे इसके माता-पिता यश पावेंगे।
नारदजी ने भविष्यवाणी भी की — 'होइहि पूज्य सकल जग माहीं। एहि सेवत कछु दुर्लभ नाहीं॥' — यह सारे जगतमें पूज्य होगी और इसकी सेवा करनेसे कुछ भी दुर्लभ न होगा।
इस प्रकार बचपन से ही पार्वतीजी सब सुलक्षणों से सम्पन्न, स्वभाव से सुन्दर, सुशील और सयानी थीं।
