विस्तृत उत्तर
शिव-पार्वती विवाह हिमवान (हिमालय/पर्वतराज) की नगरी में सम्पन्न हुआ। हिमाचल ने विवाह के लिये विचित्र मण्डप बनवाया था जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता।
चौपाई — 'इहाँ हिमाचल रचेउ बिताना। अति बिचित्र नहिं जाइ बखाना॥'
इसका अर्थ — इधर हिमाचलने ऐसा विचित्र मण्डप बनाया कि जिसका वर्णन नहीं हो सकता।
नगर की शोभा अत्यन्त सुन्दर थी — 'पुर सोभा अवलोकि सुहाई। लागइ लघु बिरंचि निपुनाई॥' — नगरकी सुन्दर शोभा देखकर ब्रह्माजीकी रचना-चातुरी भी तुच्छ लगती थी। घर-घर से मंगलसूचक तोरण और ध्वजा-पताकाएँ शोभित हो रही थीं।
जिस नगर में स्वयं जगदम्बाने अवतार लिया, उसकी शोभा का वर्णन ही क्या — वहाँ ऋद्धि, सिद्धि, सम्पत्ति और सुख नित-नये बढ़ते जाते थे।





