व्रत-पूर्व तैयारीरुद्राक्ष का महत्व और उत्पत्ति क्या है?रुद्राक्ष = शिव के हजारों वर्षों की तपस्या के बाद नेत्र खोलने पर गिरे अश्रुओं से उत्पन्न। मंत्रों के सूक्ष्म स्पंदन अवशोषित कर चेतना ऊर्ध्वगामी बनाता है। एकमुखी = परब्रह्म; पंचमुखी = पाप नाश; चतुर्दशमुखी = परम शिव स्वरूप।#रुद्राक्ष उत्पत्ति#शिव अश्रु#तपस्या
नवदुर्गामाँ ब्रह्मचारिणी का क्या स्वरूप और संदेश है?माँ ब्रह्मचारिणी = द्वितीय स्वरूप (दूसरा दिन)। शिव को पाने के लिए की गई घोर तपस्या का स्वरूप, ज्ञान-तपस्या की प्रतिमूर्ति। संदेश: ज्ञान, तप, वैराग्य और आत्म-नियंत्रण की प्रेरणा।
गुरु कृपा और साधना मर्मगुरु द्वारा दिया गया मंत्र साधारण मंत्र से कैसे अलग है?गुरु का मंत्र केवल शब्द नहीं होता — वह गुरु की तपस्या और मंत्र-चैतन्य से युक्त होता है जो शिष्य के भीतर शीघ्र फलित होता है।#गुरु मंत्र#तपस्या#मंत्र चैतन्य
रामचरितमानस — बालकाण्डतपस्या और दृढ़ संकल्प की शिक्षा — पार्वती प्रसंग से?'जन्म कोटि लगि रगर हमारी' — करोड़ जन्म हठ, सप्तर्षियों की परीक्षा में अडिग। शिक्षा — दृढ़ संकल्प से असम्भव भी सम्भव।#बालकाण्ड#तपस्या#दृढ़ संकल्प
रामचरितमानस — बालकाण्डमनु-शतरूपा ने किस स्थान पर तपस्या की?नैमिषारण्य तीर्थ में, फिर गोमती नदी के किनारे। वहाँ मुनियों ने सब तीर्थ करा दिये। वल्कल वस्त्र धारण करके संत-समाज में नित्य पुराण सुनते और द्वादशाक्षर मन्त्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जप करते थे।#बालकाण्ड#मनु शतरूपा#नैमिषारण्य
रामचरितमानस — बालकाण्ड'करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटिहि कलेसू' — इसका अर्थ?अर्थ — ऐसा तप करो जिससे शिवजी मिल जायें, दूसरे किसी उपाय से यह कष्ट नहीं मिटेगा। नारदजी ने स्पष्ट किया कि शिवजी प्राप्ति का एकमात्र मार्ग कठोर तपस्या है, कोई और उपाय काम नहीं करेगा।#बालकाण्ड#चौपाई अर्थ#तपस्या
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी ने पार्वतीजी को शिवजी प्राप्ति के लिये क्या उपाय बताया?नारदजी ने कहा — 'करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटिहि कलेसू॥' — ऐसी तपस्या करो जिससे शिवजी मिलें, दूसरा कोई उपाय काम नहीं करेगा। शिवजी दुराराध्य हैं पर आशुतोष भी हैं।#बालकाण्ड#नारद उपाय#तपस्या
दार्शनिक आधारदेवशयनी एकादशी से 'चातुर्मास' क्यों शुरू होता है?इस दिन से देवताओं की रात्रि शुरू होती है और वर्षा ऋतु के कारण साधु-संत यात्रा रोककर एक जगह तपस्या करते हैं। इसलिए इस दिन से 4 महीने का 'चातुर्मास' शुरू होता है।#चातुर्मास#वर्षा ऋतु#तपस्या
योग और साधनापिंगलेश्वर शिवलिंग को 'सिद्ध क्षेत्र' क्यों माना जाता है?यह एक सिद्ध क्षेत्र है क्योंकि यहाँ साक्षात् शिव गण 'पिंगल' ने कठोर तपस्या की थी। यहाँ पूर्व काल के सिद्धों की ऊर्जा संचित है जो साधक के संकल्प को तत्काल सिद्ध करती है।#सिद्ध क्षेत्र#ऊर्जा केंद्र#शिव गण
पौराणिक कथाध्रुव ने किस उम्र में तपस्या की क्या प्राप्त कियाध्रुव ने 5 वर्ष की आयु में 6 मास तपस्या की (सौतेली माता के अपमान से प्रेरित)। विष्णु प्रसन्न हुए — ध्रुवलोक (ध्रुव तारा), 36,000 वर्ष राज्य और शाश्वत स्थान प्राप्त। शिक्षा: आयु बाधा नहीं, अपमान प्रेरणा बन सकता है।#ध्रुव#तपस्या#ध्रुव तारा
शास्त्र ज्ञानउपनिषद में तपस्या का महत्व क्या है?तैत्तिरीय उपनिषद (3/1) में 'तपो ब्रह्म' — तप ही ब्रह्म है। भृगु ने बार-बार तप करके आनंदमय ब्रह्म को जाना। छान्दोग्य (8/5/1) — 'ब्रह्मचर्यमेव तपः' — ब्रह्मचर्य ही सबसे श्रेष्ठ तप है। कठोपनिषद (2/24) — आत्मा बलहीन को नहीं मिलती — यह बल तपस्या का है।#तपस्या#उपनिषद#तप
वेद ज्ञानवेदों में तपस्या का महत्व क्या है?वेदों में तपस्या को सृष्टि का आदि-कारण माना गया है (ऋग्वेद 10/129)। अथर्ववेद (11/5/1) में ब्रह्मचर्य-तप से देवताओं ने मृत्यु पर विजय पाई। तैत्तिरीय उपनिषद (3/1) — 'तपो ब्रह्म' — तप ही ब्रह्म है।#तपस्या#वेद#तप
साधना विज्ञानहिंदू धर्म में तपस्या क्यों की जाती है?हिंदू धर्म में तपस्या शरीर, वाणी और मन की शुद्धि, इंद्रिय-निग्रह तथा आध्यात्मिक शक्ति प्राप्ति के लिए की जाती है। गीता (17/14-16) में शारीरिक, वाचिक और मानसिक — तीन प्रकार के तप का वर्णन है।#तपस्या#तप#साधना
साधना विज्ञानतपस्या क्या है?तपस्या (तप) का अर्थ है शरीर, मन और वाणी पर कठोर अनुशासन लगाकर आत्मशुद्धि करना। गीता में तीन प्रकार के तप बताए गए हैं — शारीरिक, वाचिक और मानसिक। यह अष्टांग योग के नियमों में से एक है।#तपस्या#तप#नियम
दस महाविद्याभैरवी देवी की उपासना कैसे करें और किस उद्देश्य से?भैरवी = छठी महाविद्या, तपस्या की देवी, कुण्डलिनी का जागृत रूप। उद्देश्य: तपस्या शक्ति, कुण्डलिनी, शत्रु नाश, वाक् सिद्धि, ज्ञान। मंत्र: 'ॐ ह्रीं भैरव्यै नमः' 108 बार। लाल पुष्प/चंदन। अन्य उग्र महाविद्याओं से अपेक्षाकृत सौम्य — सामान्य भक्ति सभी कर सकते हैं। तांत्रिक = गुरु दीक्षा।#भैरवी#छठी महाविद्या#तपस्या