पंचांग एवं ज्योतिषशूल योग क्या होता है?शूल 27 नित्ययोगों में नवम, 9 अशुभ योगों में से एक। 'तीव्र पीड़ा-बाधा' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 106°40'–120°। स्वामी सर्प। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में कठोर, संघर्षशील, दृढ़ इच्छाशक्ति।#शूल योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषधृति योग क्या होता है?धृति 27 नित्ययोगों में अष्टम, शुभ योग। 'धैर्य-दृढ़ता' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 93°20'–106°40'। स्वामी जलदेवता। दीर्घकालीन कार्यों के लिए उत्तम। जन्म में धैर्यशाली, दृढ़, स्थिर पारिवारिक जीवन।#धृति योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषसुकर्मा योग क्या होता है?सुकर्मा 27 नित्ययोगों में सप्तम, शुभ योग। 'उत्तम कर्म' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 80°–93°20'। स्वामी इन्द्र। धार्मिक-सामाजिक कार्यों के लिए उत्तम। जन्म में धर्मपरायण, परिश्रमी, यशस्वी।#सुकर्मा योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषअतिगण्ड योग क्या होता है?अतिगण्ड 27 नित्ययोगों में षष्ठ, 9 अशुभ योगों में से एक। 'अत्यधिक बाधा' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 66°40'–80°। स्वामी चंद्रमा। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में साहसी, धर्मप्रेमी, किंतु दुर्घटना-सावधान।#अतिगण्ड योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषशोभन योग क्या होता है?शोभन 27 नित्ययोगों में पंचम, शुभ योग। 'सुंदर-शोभायमान' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 53°20'–66°40'। स्वामी बृहस्पति। यात्रा के लिए सर्वोत्तम। जन्म में आकर्षक, चतुर, कलाप्रेमी।#शोभन योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषसौभाग्य योग क्या होता है?सौभाग्य 27 नित्ययोगों में चतुर्थ, शुभ योग। 'उत्तम भाग्य' का द्योतक। सूर्य-चंद्र योगफल 40°–53°20'। स्वामी ब्रह्मा। सभी मांगलिक कार्यों के लिए शुभ। जन्म में भाग्यशाली, परोपकारी, समाज में मान्य।#सौभाग्य योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषआयुष्मान योग क्या होता है?आयुष्मान 27 नित्ययोगों में तृतीय, शुभ योग। 'दीर्घायु' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 26°40'–40°। स्वामी रुद्र/शिव। स्वास्थ्य कार्य और विवाह के लिए उत्तम। जन्म में दीर्घायु, स्वस्थ, ऊर्जावान।#आयुष्मान योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषप्रीति योग क्या होता है?प्रीति 27 नित्ययोगों में द्वितीय, अत्यंत शुभ योग। 'प्रेम और मित्रता' का प्रतीक। सूर्य-चंद्र योगफल 13°20'–26°40'। स्वामी भगवान विष्णु। विवाह-व्यापार-यात्रा शुभ। जन्म में मिलनसार, वाणी-मधुर, समृद्ध।#प्रीति योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषविष्कुम्भ योग क्या होता है?विष्कुम्भ 27 नित्ययोगों में प्रथम और 9 अशुभ योगों में एक है। 'विष + कुम्भ' = जहर का घड़ा। सूर्य-चंद्र योगफल 0°–13°20' पर होता है। स्वामी यक्ष। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में प्रभावशाली किंतु शत्रु-पीड़ित।#विष्कुम्भ योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं कैलेंडरपूर्णिमांत और अमांत पंचांग में अंतरअमांत: माह = अमावस्या तक (गुजरात/दक्षिण/सरकारी)। पूर्णिमांत: माह = पूर्णिमा तक (उत्तर भारत)। शुक्ल पक्ष = दोनों समान; कृष्ण = माह नाम भिन्न।#पूर्णिमांत#अमांत#पंचांग
पंचांग एवं कैलेंडरपंचांग कैसे पढ़ें सरल भाषा में5 अंग: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह), नक्षत्र (चंद्र स्थिति), योग (सूर्य+चंद्र), करण (तिथि आधा)। शुभ = शुभ तिथि+नक्षत्र+योग। ऑनलाइन: = सरलतम।#पंचांग#पढ़ना#सरल
मुहूर्तशुभ मुहूर्त कैसे निकालें किसी भी काम के लिएसरल: अभिजित मुहूर्त (दोपहर ~11:36-12:24, बुधवार छोड़कर)। पंचांग: शुभ तिथि+नक्षत्र+योग। राहु काल टालें। महत्वपूर्ण कार्य: ज्योतिषी अनिवार्य। ऑनलाइन:।#शुभ मुहूर्त#विधि#पंचांग
पुरश्चरणपुरश्चरण के पांच अंग क्या हैं?पुरश्चरण के पाँच अंग (मंत्रमहार्णव): जप (मूल — अक्षर × लाख), हवन (जप का 10वाँ — अग्नि में आहुति), तर्पण (हवन का 10वाँ — देव-ऋषि-पितर को जल), मार्जन (तर्पण का 10वाँ — जल-छिड़काव), ब्राह्मण अर्चन (मार्जन का 10वाँ — भोजन-दक्षिणा)। अनुपात: 10 लाख → 1 लाख → 10000 → 1000 → 100।#पुरश्चरण के अंग#पंचांग#हवन
पुरश्चरणपुरश्चरण कैसे किया जाता है?पुरश्चरण के छह चरण: संकल्प → नित्य जप (ब्रह्ममुहूर्त, एक संख्या) → हवन (जप का 10वाँ) → तर्पण (हवन का 10वाँ) → मार्जन → ब्राह्मण भोजन। कठोर नियम: एकाहार, भूमि-शयन, ब्रह्मचर्य, मंत्र-गोपनीयता, एक दिन न छूटे। खंड-पुरश्चरण (40-90 दिन) गुरु-मार्गदर्शन में स्वीकार्य।#पुरश्चरण विधि#अनुष्ठान विधि#पंचांग