तिथि शास्त्रक्षय तिथि क्या है — इसमें कौन से काम न करें?क्षय तिथि=एक सूर्योदय में समाप्त(नष्ट)। सभी मांगलिक कार्य वर्जित(गृहप्रवेश/विवाह/खरीद)। दान/पूजा/जप मान्य। पंचांग/.com।#क्षय तिथि#वर्जित#पंचांग
पितृ पक्षपितृ पक्ष कब समाप्त होता है?पितृ पक्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) पर समाप्त होता है। इसे महालया अमावस्या भी कहते हैं। यह उन पूर्वजों के श्राद्ध का दिन है जिनकी मृत्यु तिथि याद नहीं।#पितृ पक्ष समाप्ति#सर्वपितृ अमावस्या#आश्विन
पितृ पक्षपितृ पक्ष कब शुरू होता है?पितृ पक्ष भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से आरंभ होता है। इसका प्रथम दिन 'प्रतिपदा' कहलाता है, जिसे प्रतिपदा श्राद्ध या पड़वा श्राद्ध भी कहते हैं। कुल 16 दिनों तक चलता है।#पितृ पक्ष आरंभ#भाद्रपद पूर्णिमा#तिथि
पितृ पक्षपितृ पक्ष क्या है?पितृ पक्ष = पितरों को समर्पित 16 दिवसीय अवधि। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक। 'महालय' भी कहते हैं। इस काल में पितर वायु रूप में दक्षिण दिशा से घर आते हैं और तर्पण-अन्न की प्रतीक्षा करते हैं।#पितृ पक्ष#महालय#श्राद्ध काल
वसंत पंचमी परिचयवसंत पंचमी कब होती है — कौन सी तिथि?वसंत पंचमी = माघ मास, शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि। वर्ष 2026 में: 23 जनवरी, शुक्रवार। पंचमी तिथि: 23 जनवरी प्रातः 02:28 से 24 जनवरी प्रातः 01:46 तक।#वसंत पंचमी तिथि#माघ शुक्ल पंचमी#2026
पंचांग एवं ज्योतिषरेवती नक्षत्र क्या होता है?रेवती 27 नक्षत्रों में 27वाँ और अंतिम। मीन 16°40'–30°। स्वामी बुध, देवता पूषा। प्रतीक मछलियों का जोड़ा। यात्रा-समापन और नई यात्रा के लिए शुभ। जन्म में कोमल, दयालु, कलाप्रेमी, आध्यात्मिक।#रेवती नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषउत्तरभाद्रपद नक्षत्र क्या होता है?उत्तरभाद्रपद 27 नक्षत्रों में 26वाँ। मीन 3°20'–16°40'। स्वामी शनि, देवता अहिर्बुध्न्य। प्रतीक साँप की पूंछ। दान-आध्यात्म-मोक्ष साधना के लिए शुभ। जन्म में शांत, गहरे, करुणामय, उत्कृष्ट मार्गदर्शक।#उत्तरभाद्रपद नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषपूर्वभाद्रपद नक्षत्र क्या होता है?पूर्वभाद्रपद 27 नक्षत्रों में 25वाँ। कुंभ 20°–मीन 3°20'। स्वामी बृहस्पति, देवता अजैकपाद। प्रतीक तलवार/खाट-पाये। साधना-तंत्र के लिए अनुकूल। जन्म में आदर्शवादी, परिवर्तनशील, प्रेरक वाणी।#पूर्वभाद्रपद नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषशतभिषा नक्षत्र क्या होता है?शतभिषा 27 नक्षत्रों में 24वाँ। कुंभ 6°40'–20°। स्वामी राहु, देवता वरुण। प्रतीक खाली वृत्त। चिकित्सा-अनुसंधान के लिए अनुकूल। जन्म में स्वतंत्र विचारक, रहस्यप्रिय, उपचारकर्ता।#शतभिषा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषधनिष्ठा नक्षत्र क्या होता है?धनिष्ठा 27 नक्षत्रों में 23वाँ। मकर 23°20'–कुंभ 6°40'। स्वामी मंगल, देवता अष्टवसु। प्रतीक मृदंग। संगीत-वाहन के लिए अनुकूल, विवाह में मंगल-विचार आवश्यक। जन्म में साहसी, उदार, संगीतप्रेमी।#धनिष्ठा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषश्रवण नक्षत्र क्या होता है?श्रवण 27 नक्षत्रों में 22वाँ। मकर 10°–23°20'। स्वामी चंद्रमा, देवता विष्णु। प्रतीक तीन पदचिह्न। विद्यारंभ-मंत्रदीक्षा के लिए शुभ। जन्म में बुद्धिमान, जिज्ञासु, सुशील, यात्राप्रिय।#श्रवण नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषउत्तराषाढ़ा नक्षत्र क्या होता है?उत्तराषाढ़ा 27 नक्षत्रों में 21वाँ। धनु 26°40'–मकर 10°। स्वामी सूर्य, देवता विश्वदेव। प्रतीक हाथी-दाँत। दीर्घकालीन और अटल कार्यों के लिए शुभ। जन्म में दृढ़, सिद्धांतवादी, सच्चे नेता।#उत्तराषाढ़ा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषपूर्वाषाढ़ा नक्षत्र क्या होता है?पूर्वाषाढ़ा 27 नक्षत्रों में 20वाँ। धनु 13°20'–26°40'। स्वामी शुक्र, देवता अपः (जल)। प्रतीक हाथी-दाँत/पंखा। जल-शुद्धि-यात्रा के लिए अनुकूल। जन्म में आत्मविश्वासी, अजेय, प्रभावशाली वाणी।#पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषमूल नक्षत्र क्या होता है?मूल 27 नक्षत्रों में 19वाँ। धनु 0°–13°20'। स्वामी केतु, देवता निर्रति। प्रतीक बँधी जड़ें। खनन-शोध-औषधि के लिए अनुकूल। जन्म में गहरे विचारक, परिवर्तनकारी, दार्शनिक।#मूल नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषज्येष्ठा नक्षत्र क्या होता है?ज्येष्ठा 27 नक्षत्रों में अष्टादश। वृश्चिक 16°40'–30°। स्वामी बुध, देवता इन्द्र। प्रतीक छाता/वलय। शक्ति-नेतृत्व-शत्रु-विजय के लिए अनुकूल। जन्म में साहसी, नेतृत्व-कुशल, स्वाभिमानी।#ज्येष्ठा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषअनुराधा नक्षत्र क्या होता है?अनुराधा 27 नक्षत्रों में सप्तदश। वृश्चिक 3°20'–16°40'। स्वामी शनि, देवता मित्र। प्रतीक खिला कमल। मित्रता-साझेदारी के लिए शुभ। जन्म में मित्रभावी, अनुशासित, भक्तिप्रवण।#अनुराधा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषविशाखा नक्षत्र क्या होता है?विशाखा 27 नक्षत्रों में षोडश। तुला 20°–वृश्चिक 3°20'। स्वामी बृहस्पति, देवता इन्द्र-अग्नि। प्रतीक तोरण-द्वार। लक्ष्य-प्राप्ति के लिए शुभ। जन्म में उद्देश्यवान, दृढ़, प्रतिस्पर्धी।#विशाखा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषस्वाति नक्षत्र क्या होता है?स्वाति 27 नक्षत्रों में पंचदश। तुला 6°40'–20°। स्वामी राहु, देवता वायु। प्रतीक उड़ता तिनका। व्यापार-साझेदारी के लिए शुभ। जन्म में स्वतंत्र, अनुकूलनशील, व्यापारकुशल, कूटनीतिक।#स्वाति नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषचित्रा नक्षत्र क्या होता है?चित्रा 27 नक्षत्रों में चतुर्दश। कन्या 23°20'–तुला 6°40'। स्वामी मंगल, देवता विश्वकर्मा। प्रतीक मोती/रत्न। कला-वास्तु-आभूषण के लिए शुभ। जन्म में आकर्षक, रचनात्मक, शिल्पकुशल।#चित्रा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषहस्त नक्षत्र क्या होता है?हस्त 27 नक्षत्रों में त्रयोदश। कन्या 10°–23°20'। स्वामी चंद्रमा, देवता सविता। प्रतीक हथेली। हस्त-कौशल और व्यापार के लिए शुभ। जन्म में कुशल, चतुर, कलात्मक, श्रमशील।#हस्त नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषउत्तराफाल्गुनी नक्षत्र क्या होता है?उत्तराफाल्गुनी 27 नक्षत्रों में द्वादश। सिंह 26°40'–कन्या 10°। स्वामी सूर्य, देवता अर्यमन। प्रतीक शय्या के दो पाये। विवाह-साझेदारी के लिए शुभ। जन्म में सेवाभावी, कर्तव्यनिष्ठ, न्यायप्रिय।#उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषपूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र क्या होता है?पूर्वाफाल्गुनी 27 नक्षत्रों में एकादश। सिंह 13°20'–26°40'। स्वामी शुक्र, देवता भग। प्रतीक शय्या/पंखा। कला-मनोरंजन के लिए अनुकूल। जन्म में आकर्षक, उदार, कलाप्रेमी, सुखभोगी।#पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषमघा नक्षत्र क्या होता है?मघा 27 नक्षत्रों में दशम। सिंह 0°–13°20'। स्वामी केतु, देवता पितर। प्रतीक राजसिंहासन। पितृकर्म-श्राद्ध के लिए अनुकूल। जन्म में महत्वाकांक्षी, नेतृत्व-क्षमता, राजसी व्यक्तित्व।#मघा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषआश्लेषा नक्षत्र क्या होता है?आश्लेषा 27 नक्षत्रों में नवम। कर्क 16°40'–30°। स्वामी बुध, देवता नाग देव। प्रतीक कुण्डलित सर्प। क्रूर-गुप्त कार्यों के लिए अनुकूल। जन्म में बुद्धिमान, कूटनीतिज्ञ, रहस्यमय।#आश्लेषा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषपुष्य नक्षत्र क्या होता है?पुष्य 27 नक्षत्रों में अष्टम, 'नक्षत्रों का राजा'। कर्क 3°20'–16°40'। स्वामी शनि, देवता बृहस्पति। प्रतीक कमल/गाय-थन। गुरु-पुष्य योग सर्वोत्कृष्ट मुहूर्त। जन्म में परोपकारी, धार्मिक, दीर्घायु।#पुष्य नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषपुनर्वसु नक्षत्र क्या होता है?पुनर्वसु 27 नक्षत्रों में सप्तम, श्रीराम का जन्म नक्षत्र। मिथुन 20°–कर्क 3°20'। स्वामी बृहस्पति, देवता अदिति। प्रतीक धनुष-तरकश। यात्रा-व्यापार-विद्यारंभ के लिए शुभ। जन्म में उदार, आशावादी, सहृदय।#पुनर्वसु नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषआर्द्रा नक्षत्र क्या होता है?आर्द्रा 27 नक्षत्रों में षष्ठ। मिथुन 6°40'–20°। स्वामी राहु, देवता रुद्र। प्रतीक आँसू-बूँद। चिकित्सा-शत्रु-नाश के लिए अनुकूल। जन्म में बुद्धिमान, भावुक, तकनीकी-प्रवण।#आर्द्रा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषमृगशिरा नक्षत्र क्या होता है?मृगशिरा 27 नक्षत्रों में पंचम। वृषभ 23°20'–मिथुन 6°40'। स्वामी मंगल, देवता सोम। प्रतीक हिरण-सिर। यात्रा-कला-कृषि के लिए अनुकूल। जन्म में जिज्ञासु, कोमल, बहुमुखी प्रतिभा।#मृगशिरा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषरोहिणी नक्षत्र क्या होता है?रोहिणी 27 नक्षत्रों में चतुर्थ, नक्षत्रों की रानी। वृषभ 10°–23°20'। स्वामी चंद्रमा, देवता ब्रह्मा। प्रतीक बैलगाड़ी। सभी शुभ कार्यों के लिए सर्वोत्तम। जन्म में सुंदर, कलाप्रेमी, समृद्ध।#रोहिणी नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषकृत्तिका नक्षत्र क्या होता है?कृत्तिका 27 नक्षत्रों में तृतीय। मेष 26°40'–वृषभ 10°। स्वामी सूर्य, देवता अग्नि। प्रतीक अग्नि-लौ। सैन्य-अग्नि कार्यों के लिए अनुकूल। जन्म में तेजस्वी, ऊर्जावान, न्यायी।#कृत्तिका नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषभरणी नक्षत्र क्या होता है?भरणी 27 नक्षत्रों में द्वितीय। मेष 13°20'–26°40'। स्वामी शुक्र, देवता यम। प्रतीक योनि। क्रूर कार्यों के लिए अनुकूल। जन्म में दृढ़, महत्वाकांक्षी, न्यायप्रिय।#भरणी नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषअश्विनी नक्षत्र क्या होता है?अश्विनी 27 नक्षत्रों में प्रथम। मेष राशि 0°–13°20'। स्वामी केतु, देवता अश्विनी कुमार। प्रतीक अश्व-मुख। यात्रा-चिकित्सा के लिए शुभ, विवाह वर्जित। जन्म में तेजस्वी, साहसी, चिकित्सा-कुशल।#अश्विनी नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषवैधृति योग क्या होता है?वैधृति 27 नित्ययोगों में 27वाँ और अंतिम, 9 अशुभ योगों में व्यतिपात के साथ सर्वाधिक अशुभ। 'विपरीत धारणा-उतार-चढ़ाव'। सूर्य-चंद्र योगफल 346°40'–360°। स्वामी वरुण। सभी मांगलिक कार्य वर्जित। वैधृति श्राद्ध विशेष फलदायी।#वैधृति योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषइन्द्र योग क्या होता है?इन्द्र योग 27 नित्ययोगों में 26वाँ, शुभ योग। 'नेतृत्व-ऐश्वर्य-प्रभुत्व' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 333°20'–346°40'। स्वामी देवराज इन्द्र। पदारोहण और नेतृत्व कार्य के लिए सर्वोत्तम। जन्म में प्रभावशाली, धनवान, राजसी व्यक्तित्व।#इन्द्र योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषब्रह्म योग क्या होता है?ब्रह्म योग 27 नित्ययोगों में 25वाँ, अत्यंत शुभ। 'सर्वोच्च ज्ञान-विद्या' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 320°–333°20'। स्वामी ब्रह्मा। वेदाध्ययन-दीक्षा के लिए सर्वोत्तम। जन्म में विद्वान, गुह्य-ज्ञानी, सत्यनिष्ठ।#ब्रह्म योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषशुक्ल योग क्या होता है?शुक्ल योग 27 नित्ययोगों में 24वाँ, शुभ योग। 'शुद्धता-तेज-ज्ञान' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 306°40'–320°। स्वामी पार्वती। विद्यारंभ और कला-साधना के लिए उत्तम। जन्म में तेजस्वी, ज्ञानवान, शुद्ध अंतःकरण।#शुक्ल योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषशुभ योग क्या होता है?शुभ योग 27 नित्ययोगों में 23वाँ, अत्यंत शुभ। 'मंगल-पवित्रता' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 293°20'–306°40'। स्वामी लक्ष्मी। दान-विवाह-धार्मिक कार्य के लिए सर्वोत्तम। जन्म में सत्यवादी, गुणी, मृदुभाषी।#शुभ योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषसाध्य योग क्या होता है?साध्य योग 27 नित्ययोगों में 22वाँ, शुभ योग। 'क्रमिक साधना-सफलता' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 280°–293°20'। स्वामी विश्वदेव। दीर्घकालीन कार्यों के लिए उत्तम। जन्म में साधनाशील, परिश्रमी, सत्यनिष्ठ।#साध्य योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषसिद्ध योग क्या होता है?सिद्ध योग 27 नित्ययोगों में 21वाँ, अत्यंत शुभ। 'पूर्ण सफलता' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 266°40'–280°। स्वामी कार्तिकेय। सभी कार्यों में सफलता निश्चित। जन्म में चतुर, धनवान, सुखी जीवन।#सिद्ध योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषशिव योग क्या होता है?शिव योग 27 नित्ययोगों में 20वाँ, अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वोत्तम। 'मंगलकारी-कल्याणकारी'। सूर्य-चंद्र योगफल 253°20'–266°40'। स्वामी भगवान शिव। धार्मिक कार्य, साधना, तीर्थयात्रा के लिए सर्वोत्तम। जन्म में धर्मपरायण, पवित्र हृदय, संन्यास-प्रवण।#शिव योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषपरिघ योग क्या होता है?परिघ 27 नित्ययोगों में 19वाँ, 9 अशुभ योगों में से एक। 'बाड़ा-अवरोध' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 240°–253°20'। स्वामी विश्वकर्मा। यात्रा-व्यापार वर्जित। जन्म में बुद्धिमान, बहुज्ञ, आध्यात्मिक झुकाव।#परिघ योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषवरीयान योग क्या होता है?वरीयान 27 नित्ययोगों में अष्टादश, शुभ योग। 'श्रेष्ठता-विशिष्टता' का द्योतक। सूर्य-चंद्र योगफल 226°40'–240°। स्वामी अग्नि। पदारोहण और उन्नति के लिए उत्तम। जन्म में प्रतिभाशाली, सम्माननीय, उच्च स्थान प्राप्त।#वरीयान योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषव्यतिपात योग क्या होता है?व्यतिपात 27 नित्ययोगों में सप्तदश, 9 अशुभ योगों में सर्वाधिक भयंकर। 'विनाशकारी-आपदा' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 213°20'–226°40'। स्वामी रुद्र। सभी शुभ कार्य वर्जित। व्यतिपात श्राद्ध विशेष फलदायी।#व्यतिपात योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषसिद्धि योग क्या होता है?सिद्धि 27 नित्ययोगों में षोडश, अत्यंत शुभ योग। 'सफलता-उपलब्धि' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 200°–213°20'। स्वामी गणेश। हर कार्य में सफलता। जन्म में चतुर, धनवान, सुखी जीवन।#सिद्धि योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषवज्र योग क्या होता है?वज्र 27 नित्ययोगों में पंचदश, 9 अशुभ योगों में से एक। 'कठोरता-आकस्मिक आपदा' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 186°40'–200°। स्वामी इंद्र। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में कठोर, निर्भीक, अचानक उतार-चढ़ाव।#वज्र योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषहर्षण योग क्या होता है?हर्षण 27 नित्ययोगों में चतुर्दश, शुभ योग। 'हर्ष-आनंद' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 173°20'–186°40'। स्वामी सर्प। उत्सव-विवाह-समारोह के लिए उत्तम। जन्म में प्रसन्नचित्त, उत्साही, सामाजिक रूप से सफल।#हर्षण योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषव्याघात योग क्या होता है?व्याघात 27 नित्ययोगों में त्रयोदश, 9 अशुभ योगों में से एक। 'विघ्न-आघात' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 160°–173°20'। स्वामी वायु। लंबे निवेश और विवाह वर्जित। जन्म में साहसी, किंतु बाधा-पूर्ण जीवन।#व्याघात योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषध्रुव योग क्या होता है?ध्रुव 27 नित्ययोगों में द्वादश, शुभ योग। 'अटल-स्थिर' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 146°40'–160°। स्वामी पृथ्वी देवी। भूमि कार्य और दीर्घकालीन निवेश के लिए सर्वोत्तम। जन्म में दृढ़, स्थिर, संयमी।#ध्रुव योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषवृद्धि योग क्या होता है?वृद्धि 27 नित्ययोगों में एकादश, शुभ योग। 'विकास-उन्नति' का द्योतक। सूर्य-चंद्र योगफल 133°20'–146°40'। स्वामी सूर्य। व्यापार-निवेश-शिक्षा के लिए उत्तम। जन्म में महत्वाकांक्षी, प्रगतिशील, प्रभावशाली।#वृद्धि योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषगण्ड योग क्या होता है?गण्ड 27 नित्ययोगों में दशम, 9 अशुभ योगों में से एक। 'अवरोध-ग्रंथि' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 120°–133°20'। स्वामी अग्नि। महत्वपूर्ण कार्य और निवेश वर्जित। जन्म में मेधावी, संघर्षशील, प्रशासन-कुशल।#गण्ड योग#27 नित्ययोग#पंचांग