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सृष्टि से जुड़े सभी प्रश्न(141)

सृष्टि पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 141 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

योगनिद्रा के बाद सृष्टि कैसे शुरू होती है?

काल-शक्ति और रजोगुण से सृष्टि-बीज जागता है।

#योगनिद्रा#सृष्टि#रजोगुण
लोक

कल्प क्या होता है?

कल्प ४.३२ अरब वर्षों का ब्रह्मांडीय काल-चक्र है।

#कल्प#कालचक्र#सृष्टि
लोक

योगनिद्रा में सृष्टि कहाँ रहती है?

सृष्टि विष्णु के भीतर सूक्ष्म बीज रूप में रहती है।

#योगनिद्रा#सृष्टि#विष्णु
लोक

विष्णु योगनिद्रा में क्यों सोते हैं?

वे सृष्टि के अगले चक्र तक ब्रह्मांड को बीज रूप में धारण करते हैं।

#विष्णु#योगनिद्रा#सृष्टि
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धाता यथा पूर्वमकल्पयत् का अर्थ क्या है?

अर्थ है कि सृष्टि फिर पूर्ववत् रची जाती है।

#धाता#सृष्टि#कल्प
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सृष्टि का ब्लूप्रिंट क्या है?

यह सृष्टि के अगले प्रकट होने की सुरक्षित बीज-योजना है।

#सृष्टि#ब्लूप्रिंट#प्रलय
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प्रलय को ब्रह्मांडीय विश्राम क्यों कहते हैं?

क्योंकि प्रलय में सृष्टि नष्ट नहीं, अव्यक्त विश्राम में जाती है।

#प्रलय#विश्राम#सृष्टि
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विष्णु की श्वास बाहर आए तो क्या होता है?

सृष्टि और कालचक्र आरंभ होते हैं।

#विष्णु श्वास#सृष्टि#कालचक्र
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क्षीरसागर और वैकुण्ठ का संबंध क्या है?

क्षीरसागर कारण क्षेत्र, वैकुण्ठ शाश्वत धाम।

#क्षीरसागर#वैकुण्ठ#सृष्टि
लोक

आदिनाद को दिव्य कोड क्यों कहा गया?

उसमें सृष्टि के सभी नियम बीज रूप में थे।

#आदिनाद#दिव्य कोड#सृष्टि
लोक

जीवात्माएँ कब जागृत हुईं?

सृष्टि गति शुरू होने के बाद।

#जीवात्मा#सृष्टि#चेतना
लोक

ब्रह्मांड में द्वैत कैसे उत्पन्न हुआ?

गति और विभाजन से।

#द्वैत#सृष्टि#प्रकाश अंधकार
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क्रिया शक्ति क्या है?

सृष्टि को गति देने वाली शक्ति।

#क्रिया शक्ति#सृष्टि#गति
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ज्ञान शक्ति क्या है?

सृष्टि के ज्ञान और नियम की शक्ति।

#ज्ञान शक्ति#सृष्टि#महत् तत्त्व
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इच्छा शक्ति क्या है?

भगवान की सृजन-संकल्प शक्ति।

#इच्छा शक्ति#सृष्टि#विष्णु
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अहंकार तत्त्व क्या है?

अलग अस्तित्व का सूक्ष्म कारण।

#अहंकार तत्त्व#सृष्टि#द्वैत
लोक

महत् तत्त्व क्या है?

सृष्टि की ब्रह्मांडीय बुद्धि।

#महत् तत्त्व#सृष्टि#कॉस्मिक इंटेलिजेंस
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विष्णु की श्वास से दिशा कैसे बनी?

श्वास से देश-काल और दिशाएँ बनीं।

#विष्णु श्वास#दिशा#सृष्टि
लोक

एकपाद विभूति क्या है?

सृष्टि-प्रलय वाला भौतिक ब्रह्मांड।

#एकपाद विभूति#भौतिक ब्रह्मांड#सृष्टि
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वैकुण्ठ की आधारशिला का अर्थ क्या है?

वैकुण्ठ ऊर्जा का सृष्टि से जुड़ना।

#वैकुण्ठ आधारशिला#आधार शक्ति#सृष्टि
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तन्मात्रा क्या होती है?

पंचभूतों के सूक्ष्म गुण।

#तन्मात्रा#पंचभूत#सृष्टि
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स्पंदन से सृष्टि कैसे शुरू हुई?

स्पंदन से आदिनाद और प्राण ऊर्जा जागी।

#स्पंदन#सृष्टि#आदिनाद
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प्रथम स्पंदन क्या था?

सृजन-संकल्प का पहला चेतन कंपन।

#प्रथम स्पंदन#इच्छा शक्ति#सृष्टि
लोक

आदिनाद क्या है?

सृष्टि की प्रथम अव्यक्त ध्वनि।

#आदिनाद#ध्वनि#सृष्टि
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प्रथम श्वास से क्या हुआ?

कालचक्र और सृष्टि की गति शुरू हुई।

#प्रथम श्वास#कालचक्र#सृष्टि
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विष्णु की नाभि से कमल कब निकला?

सृष्टि आरंभ के बाद।

#नाभि कमल#ब्रह्मा#सृष्टि
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महातल का भगवान नारायण से क्या संबंध है?

महातल भगवान नारायण के विराट रूप के टखनों में स्थित है, इसलिए यह भी उनके शरीर का अंग माना गया है।

#महातल#भगवान नारायण#विराट पुरुष
लोक

जनलोक का संबंध प्रजापतियों से कैसे है?

जनलोक प्रजापतियों का आश्रय है, जो प्रलय के बाद नई सृष्टि में भूमिका निभाते हैं।

#जनलोक#प्रजापति#सृष्टि
लोक

वैराज प्रजापति का तपोलोक से क्या संबंध है?

वैराज प्रजापति तपोलोक की वैराज परंपरा से जुड़े हैं और सृष्टि-विस्तार में उनका योगदान बताया गया है।

#वैराज प्रजापति#तपोलोक#वंशावली
लोक

कल्प-भेद और ब्रह्मांड-भेद क्या होते हैं?

कल्प-भेद अलग कल्पों की संरचनात्मक भिन्नता और ब्रह्मांड-भेद अलग ब्रह्मांडों के परिमाण का भेद है।

#कल्प-भेद#ब्रह्मांड-भेद#तपोलोक
लोक

शिव पुराण में सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा जी पर अविद्या का प्रभाव क्या दर्शाता है?

शिव पुराण का यह प्रसंग दर्शाता है — सृष्टि की इच्छा भी अविद्या है। सत्यलोक में भी जब तक सृष्टि-इच्छा है तब तक माया का सूक्ष्म प्रभाव रहता है। तप और शिव-कृपा से ही इसे पार किया जा सकता है।

#शिव पुराण#ब्रह्मा#अविद्या
शब्द ब्रह्म और मंत्र शक्ति

शब्द ब्रह्म का सिद्धांत क्या है?

तंत्र शास्त्र के अनुसार सृष्टि एक आदि-नाद (शब्द ब्रह्म) से उत्पन्न हुई — प्रत्येक देवी का मंत्र उनका ध्वनि-स्वरूप है और मंत्र जपने से उनकी चेतना की आवृत्ति का आवाहन होता है।

#शब्द ब्रह्म#आदि नाद#तंत्र शास्त्र
शब्द ब्रह्म और मंत्र विज्ञान

'एकोऽहं बहुस्याम' का क्या अर्थ है?

'एकोऽहं बहुस्याम' का अर्थ है 'मैं एक हूँ, बहुत हो जाऊँ' — यह परब्रह्म का वह संकल्प है जिसके प्रथम स्पंदन (नाद) से सम्पूर्ण ब्रह्मांड की रचना हुई।

#एकोऽहं बहुस्याम#परब्रह्म संकल्प#नाद
प्राण प्रतिष्ठा परिचय

प्राण प्रतिष्ठा का दार्शनिक आधार क्या है?

प्राण प्रतिष्ठा का दार्शनिक आधार: सृष्टि का मूल शब्द (नाद-ब्रह्म) है — इसलिए मंत्र (शब्द) के द्वारा ही परमात्मा का किसी रूप में आवाहन और प्रतिष्ठापन संभव है।

#दार्शनिक आधार#नाद ब्रह्म#शब्द ब्रह्म
त्रिपुर भैरवी परिचय और स्वरूप

दशमहाविद्याओं में त्रिपुर भैरवी का क्या स्थान है?

दशमहाविद्याएं पराशक्ति के दस दिव्य स्वरूप हैं जो सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करती हैं — त्रिपुर भैरवी इन्हीं में से एक हैं जो भैरव की संघारिणी शक्ति हैं।

#दशमहाविद्या#पराशक्ति#त्रिपुर भैरवी
अर्धनारीश्वर स्वरूप और दर्शन

अर्धनारीश्वर स्वरूप सृष्टि के बारे में क्या सिखाता है?

अर्धनारीश्वर स्वरूप सिखाता है कि जीवन-मृत्यु, भोग-योग जैसे विरोधी गुण परम चेतना में सह-अस्तित्व रख सकते हैं और साधक को बाहर सक्रिय व भीतर वैराग्यपूर्ण रहना चाहिए।

#अर्धनारीश्वर#सृष्टि#द्वंद्व समन्वय
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कामदेव के बाण चलाने पर क्या-क्या प्रभाव पड़ा — सारी सृष्टि पर?

सारी सृष्टि काम-वश हो गयी — ब्रह्मचर्य, धीरज, ज्ञान, सदाचार, योग, वैराग्य सब भागे। स्त्री-पुरुष सब मर्यादा छोड़ बैठे। लताएँ वृक्षों पर झुकीं, नदियाँ समुद्र की ओर दौड़ीं। केवल शिवजी की समाधि अचल रही।

#बालकाण्ड#कामदेव प्रभाव#सृष्टि
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में ब्रह्मांड का वर्णन कैसे है?

उपनिषदों में ब्रह्मांड ब्रह्म से उत्पन्न है। छान्दोग्य (6/2/1) — आरंभ में एकमात्र 'सत्' था, उससे तेज-जल-पृथ्वी की सृष्टि हुई। तैत्तिरीय (2/1-6) में ब्रह्म → आकाश → वायु → अग्नि → जल → पृथ्वी का सृष्टि-क्रम है। 'सर्वं खल्विदं ब्रह्म' — यह सम्पूर्ण जगत ब्रह्म ही है।

#ब्रह्मांड#उपनिषद#सृष्टि
वेद ज्ञान

वेदों में तपस्या का महत्व क्या है?

वेदों में तपस्या को सृष्टि का आदि-कारण माना गया है (ऋग्वेद 10/129)। अथर्ववेद (11/5/1) में ब्रह्मचर्य-तप से देवताओं ने मृत्यु पर विजय पाई। तैत्तिरीय उपनिषद (3/1) — 'तपो ब्रह्म' — तप ही ब्रह्म है।

#तपस्या#वेद#तप
सृष्टि विज्ञान

वेदों में ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?

वेदों में सृष्टि के तीन दृष्टिकोण हैं — नासदीय सूक्त (10/129) दार्शनिक रहस्य-वर्णन, हिरण्यगर्भ सूक्त (10/121) ईश्वर-केन्द्रित सृष्टि और पुरुषसूक्त (10/90) यज्ञात्मक सृष्टि। सबका सार — सृष्टि एक ही परम तत्त्व 'तदेकम्' से प्रकट हुई।

#सृष्टि#ब्रह्मांड#नासदीय सूक्त
सृष्टि विज्ञान

ब्रह्मांड का निर्माण कैसे हुआ?

ऋग्वेद के नासदीय सूक्त (10/129) के अनुसार सृष्टि से पहले न सत था, न असत — एकमात्र परम सत्ता थी जिसकी 'काम' (संकल्प) से सृष्टि हुई। पुराणों में भगवान विष्णु की नाभि से ब्रह्मा प्रकट होकर सृष्टि के रचयिता बने। वेदांत के अनुसार ब्रह्म की माया-शक्ति से यह सृष्टि प्रकट हुई।

#ब्रह्मांड#सृष्टि#नासदीय सूक्त
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