विस्तृत उत्तर
कामदेव के प्रभाव फैलाने और क्रोध करने पर सारी सृष्टि में व्यापक प्रभाव पड़ा — सारी मर्यादाएँ टूट गयीं।
चौपाई — 'ब्रह्मचर्ज ब्रत संजम नाना। धीरज धरम ग्यान बिग्याना। सदाचार जप जोग बिरागा। सभय बिबेक कटकु सबु भागा॥'
इसका अर्थ — ब्रह्मचर्य, नियम, नाना प्रकारके संयम, धीरज, धर्म, ज्ञान, विज्ञान, सदाचार, जप, योग, वैराग्य आदि विवेककी सारी सेना डरकर भाग गयी।
आगे — 'जे सजीव जग अचर चर नारि पुरुष अस नाम। ते निज निज मरजाद तजि भए सकल बस काम॥'
अर्थ — जगतमें स्त्री-पुरुष संज्ञावाले जितने चर-अचर प्राणी थे, वे सब अपनी-अपनी मर्यादा छोड़कर कामके वश हो गये।
लताएँ वृक्षों की डालियों पर झुकने लगीं, नदियाँ उमड़कर समुद्र की ओर दौड़ीं, पशु-पक्षी अपना संयोग भूलकर काम के वश हो गये। केवल शिवजी की समाधि अचल रही।





