औपसर्गिक ऐश्वर्यब्राह्म ऐश्वर्य क्या है?बिना कारण जगत् की सृष्टि, अनुग्रह, प्रलय, अधिकार, लोकवृत्त प्रवर्तन और संसार का कर्तृत्व ब्राह्म ऐश्वर्य है।#ब्राह्म ऐश्वर्य#सृष्टि#अनुग्रह
सृष्टिस्थावर-जंगम जगत क्या है?स्थावर-जंगम जगत वही सम्पूर्ण जगत है जिसे ब्रह्मा ने जरा-मरण से युक्त बनाया।#स्थावर जंगम#जगत#ब्रह्मा
श्रीमद्भागवतपुरुष अवतार क्या है?सृष्टि के आरंभ में भगवान ने महत्तत्त्व आदि से पुरुष रूप ग्रहण किया, जिसमें दस इंद्रियाँ, मन और पाँच भूत सोलह कलाएँ थीं।#पुरुष अवतार#नारायण#विराट रूप
सर्गऊर्ध्वस्रोत सृष्टि क्या है?ऊर्ध्वस्रोत सृष्टि सात्त्विक रूप कही गई है और देवताओं की सृष्टि से जुड़ी है।#ऊर्ध्वस्रोत#देवसर्ग#देवता
सर्गतिर्यक्स्रोत सृष्टि क्या है?तिर्यक्स्रोत सृष्टि पशु आदि तिर्यक् योनिवाले जीवों की सृष्टि है।#तिर्यक्स्रोत#पशु#पक्षी
सर्गमुख्य सर्ग क्या है?मुख्य सर्ग वृक्षादि सृष्टि है, जिसमें वृक्ष, गुल्म, लता, वीरुध् और तृणरूप सर्ग बताए गए हैं।#मुख्य सर्ग#वृक्ष#गुल्म
श्रीमद्भागवतभागवत पुराण में परम सत्य किसे कहा गया है?परम सत्य उस स्वयंप्रकाश परमात्मा को कहा गया है, जिससे जगत की सृष्टि, स्थिति और लय होते हैं।#परम सत्य#परमात्मा#सृष्टि
ब्रह्मा कालब्रह्मा का दिन क्या होता है?ब्रह्मा की प्राकृत सृष्टि का समय ही उनका दिन बताया गया है।#ब्रह्मा#ब्रह्मा का दिन#कल्प
सृष्टि तत्त्वराजस अहंकार क्या है?राजस अहंकार महत्तत्त्व से उत्पन्न रजोगुण की अधिकता वाला अहंकार है।#राजस अहंकार#रजोगुण#महत्तत्त्व
शिव तत्त्वसृष्टि स्थिति और संहार क्या हैं?सृष्टि उत्पत्ति, स्थिति पालन या स्थिरता, और संहार अंत से जुड़ा भाव है।#सृष्टि#स्थिति#संहार
लोकआदिनाद और कालचक्र की कथा क्या है?आदिनाद ने मौन तोड़ा और विष्णु की प्रथम श्वास से कालचक्र चल पड़ा।#आदिनाद#कालचक्र#सृष्टि
लोकविष्णु की श्वास बाहर आने पर क्या होता है?श्वास बाहर आने पर सृष्टि और कालचक्र की गति शुरू होती है।#विष्णु श्वास#सृष्टि#कालचक्र
लोकवैकुण्ठ की आधारशक्ति क्या है?वैकुण्ठ की आधारशक्ति शाश्वत धाम की दिव्य ऊर्जा है।#वैकुण्ठ#आधारशक्ति#सृष्टि
लोकअहंकार तत्त्व क्या है?अहंकार तत्त्व एकत्व से भेद और पहचान बनने की अवस्था है।#अहंकार तत्त्व#सृष्टि#द्वैत
लोकमहत् तत्त्व क्या है?महत् तत्त्व सृष्टि की प्रथम ब्रह्मांडीय बुद्धि है।#महत् तत्त्व#सृष्टि#वैष्णव दर्शन
लोकमहाप्राण क्या है?महाप्राण विष्णु की वह प्रथम श्वास है जिससे ब्रह्मांड में गति आई।#महाप्राण#विष्णु श्वास#सृष्टि
लोकएकोऽहं बहुस्याम का अर्थ क्या है?इसका अर्थ है कि एक परम चेतना अनेक रूपों में प्रकट होना चाहती है।#एकोऽहं बहुस्याम#सृष्टि#वेदांत
लोककारण जल क्या है?कारण जल वह सूक्ष्म आधार है जिसमें सृष्टि बीज रूप में रहती है।#कारण जल#महाप्रलय#सृष्टि
लोकहिंदू धर्म में ध्वनि और सृष्टि का संबंध क्या है?ध्वनि को सृष्टि का पहला कंपन और ब्रह्मांडीय गति का आधार माना गया है।#हिंदू धर्म#ध्वनि#सृष्टि
लोकनाद-ब्रह्म का अर्थ क्या है?नाद-ब्रह्म का अर्थ है ध्वनि या कंपन को सृष्टि का मूल आधार मानना।#नाद-ब्रह्म#ध्वनि#सृष्टि
लोकभगवान विष्णु की पहली श्वास क्या है?विष्णु की पहली श्वास वह महाप्राण है जिससे समय और सृष्टि की गति शुरू हुई।#विष्णु#प्रथम श्वास#सृष्टि
लोकक्षीरसागर का रहस्य क्या है?क्षीरसागर सृष्टि से पहले का दिव्य कारण-जल है, जहाँ विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं।#क्षीरसागर#भगवान विष्णु#सृष्टि
लोककारणोदकशायी विष्णु का काम क्या है?वे अनंत ब्रह्मांडों की उत्पत्ति और विलय का आधार हैं।#कारणोदकशायी विष्णु#कार्य#सृष्टि
लोकमहाविष्णु श्वास बाहर छोड़ते हैं तो क्या होता है?उनके प्रश्वास से अनंत ब्रह्मांड प्रकट होते हैं।#प्रश्वास#महाविष्णु#सृष्टि
लोकअनंत कोटि ब्रह्मांड क्या हैं?अनंत कोटि ब्रह्मांड असंख्य ब्रह्मांडों की अवधारणा है।#अनंत कोटि ब्रह्मांड#महाविष्णु#सृष्टि
लोककारणोदकशायी विष्णु कौन हैं?कारणोदकशायी विष्णु कारण सागर में शयन करने वाले महाविष्णु हैं।#कारणोदकशायी विष्णु#महाविष्णु#सृष्टि
लोकमहाविष्णु की ब्रह्मांडीय श्वास क्या है?महाविष्णु की श्वास से ब्रह्मांडों की उत्पत्ति और विलय होता है।#महाविष्णु#ब्रह्मांडीय श्वास#सृष्टि
लोकनाभि-कमल का सरल अर्थ क्या है?यह विष्णु की नाभि से निकला सृष्टि-आरंभ का कमल है।#नाभि-कमल#सरल अर्थ#सृष्टि
लोकयोगनिद्रा से जागरण का मतलब क्या है?यह सृष्टि के नए चक्र की शुरुआत का संकेत है।#योगनिद्रा#जागरण#सृष्टि
लोकनाभि-कमल क्या होता है?नाभि-कमल विष्णु की नाभि से निकला सृष्टि-आधार कमल है।#नाभि-कमल#ब्रह्मा#सृष्टि
लोकधाता यथा पूर्वमकल्पयत् का अर्थ क्या है?अर्थ है कि सृष्टि फिर पूर्ववत् रची जाती है।#धाता#सृष्टि#कल्प
लोकसृष्टि का ब्लूप्रिंट क्या है?यह सृष्टि के अगले प्रकट होने की सुरक्षित बीज-योजना है।#सृष्टि#ब्लूप्रिंट#प्रलय
लोकविष्णु की श्वास बाहर आए तो क्या होता है?सृष्टि और कालचक्र आरंभ होते हैं।#विष्णु श्वास#सृष्टि#कालचक्र
लोकक्षीरसागर और वैकुण्ठ का संबंध क्या है?क्षीरसागर कारण क्षेत्र, वैकुण्ठ शाश्वत धाम।#क्षीरसागर#वैकुण्ठ#सृष्टि
लोकवैकुण्ठ की आधारशिला का अर्थ क्या है?वैकुण्ठ ऊर्जा का सृष्टि से जुड़ना।#वैकुण्ठ आधारशिला#आधार शक्ति#सृष्टि
शब्द ब्रह्म और मंत्र शक्तिशब्द ब्रह्म का सिद्धांत क्या है?तंत्र शास्त्र के अनुसार सृष्टि एक आदि-नाद (शब्द ब्रह्म) से उत्पन्न हुई — प्रत्येक देवी का मंत्र उनका ध्वनि-स्वरूप है और मंत्र जपने से उनकी चेतना की आवृत्ति का आवाहन होता है।#शब्द ब्रह्म#आदि नाद#तंत्र शास्त्र
प्राण प्रतिष्ठा परिचयप्राण प्रतिष्ठा का दार्शनिक आधार क्या है?प्राण प्रतिष्ठा का दार्शनिक आधार: सृष्टि का मूल शब्द (नाद-ब्रह्म) है — इसलिए मंत्र (शब्द) के द्वारा ही परमात्मा का किसी रूप में आवाहन और प्रतिष्ठापन संभव है।#दार्शनिक आधार#नाद ब्रह्म#शब्द ब्रह्म
वेद ज्ञानवेदों में तपस्या का महत्व क्या है?वेदों में तपस्या को सृष्टि का आदि-कारण माना गया है (ऋग्वेद 10/129)। अथर्ववेद (11/5/1) में ब्रह्मचर्य-तप से देवताओं ने मृत्यु पर विजय पाई। तैत्तिरीय उपनिषद (3/1) — 'तपो ब्रह्म' — तप ही ब्रह्म है।#तपस्या#वेद#तप