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विस्तृत उत्तर
छठे दिन के पिण्डदान से कटि और गुह्यांग, अर्थात कमर और जननांगों, की उत्पत्ति होती है। यह पिण्डज शरीर के क्रमिक निर्माण का छठा चरण है। पाँचवें दिन नाभि और उदर बनते हैं और छठे दिन कमर तथा जननांग बनते हैं।
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