विस्तृत उत्तर
महिषासुर के मायावी प्रहारों को देखकर देवी भगवती अत्यंत क्रोधित हो उठीं। उन्होंने कुबेर द्वारा दिए गए पानपात्र से सुरापान किया और अट्टहास करते हुए कहा—
रे मूढ़! जब तक मैं मधुपान कर रही हूँ, तब तक तू क्षण भर के लिए गर्जना कर ले। मेरे द्वारा तेरा वध हो जाने पर शीघ्र ही देवता यहाँ गर्जना करेंगे।
यह कहकर देवी उछलीं और उन्होंने महिषासुर की छाती पर अपना पैर रख दिया। देवी के पैर के प्रहार से असुर व्याकुल हो गया और जैसे ही वह अपने मूल स्वरूप में भैंसे के मुख से आधा बाहर निकला, देवी ने अपने खड्ग (तलवार) से उसका मस्तक काट गिराया।
महिषासुर का वध होते ही तीनों लोकों में हाहाकार शांत हो गया, देवताओं ने पुष्प वर्षा की और धर्म की पुनः स्थापना हुई।





