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विस्तृत उत्तर
पहले दिन के पिण्डदान से प्रेत के पिण्डज शरीर का सिर, जिसे मूर्धा कहा गया है, निर्मित होता है। मृत्यु के बाद प्रथम दस दिनों में प्रतिदिन दिए गए पिण्ड से शरीर के अलग-अलग अंग बनते हैं। इस क्रम की शुरुआत पहले दिन सिर के निर्माण से होती है।
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