विस्तृत उत्तर
वाहन-पूजन में 'श्रीफल' या नारियल फोड़ना एक गंभीर शास्त्रीय क्रिया है। इसके तीन प्रमुख कारण हैं:
१. अहंकार का विसर्जन: नारियल का कठोर आवरण मनुष्य के कठोर अहंकार (Ego) का प्रतीक है। इसे फोड़ने का अर्थ है कि स्वामी ने अपने अहंकार को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर दिया है और अब वह केवल एक 'सारथी' मात्र है।
२. सात्विक बलि: प्राचीन काल में वाहनों की रक्षा हेतु पशु-बलि दी जाती थी। कालान्तर में ऋषियों ने इसे 'नारियल' के रूप में सात्विक बलि में परिवर्तित कर दिया। यह 'बली' मार्ग की बाधाओं को शांत करने के लिए दी जाती है।
३. नकारात्मक ऊर्जा का निष्कासन: नारियल फोड़ने से निकलने वाली ध्वनि तरंगें सूक्ष्म नकारात्मक ऊर्जाओं को विखंडित कर देती हैं। नारियल का जल छिड़कने से वातावरण में शुद्धि आती है।
विधि: नारियल को वाहन के चारों ओर सात बार 'उतारा' करके वाहन के सामने भूमि पर फोड़ा जाता है। ध्यान रहे कि नारियल वाहन पर नहीं, बल्कि भूमि पर फोड़ा जाए।





