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पितृ पक्ष प्रश्नोत्तरी — 63 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पितृ पक्ष विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 63 प्रश्न

पितृ पक्ष

आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया क्यों खास है?

आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया खास है क्योंकि यह पितृ पक्ष यानी महालय का दूसरा दिन है। इस दिन पार्वण श्राद्ध से तीन पीढ़ियों का सतीक आवाहन होता है, और विश्वेदेव स्थापित होते हैं। स्कन्द पुराण के अनुसार इस दिन श्राद्ध करने से शिव प्रसन्न होते हैं और कैलास धाम मिलता है। याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार सुयोग्य दामाद और पशु-धन की प्राप्ति होती है।

आश्विन द्वितीयामहालयपितृ पक्ष
तिथि श्राद्ध

कृष्ण पक्ष की द्वितीया का श्राद्ध कब होता है?

कृष्ण पक्ष की द्वितीया का श्राद्ध मुख्यतः पितृ पक्ष यानी आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया को सम्पन्न होता है। यह दिन प्रतिपदा के बाद आता है। पितृ पक्ष की कृष्ण द्वितीया पर पार्वण श्राद्ध होता है, जिसमें तीन पीढ़ियों का सतीक आवाहन होता है। किसी भी मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया को मरे पितर का वार्षिक एकोद्दिष्ट श्राद्ध भी उसी कृष्ण द्वितीया को होता है।

कृष्ण पक्ष द्वितीयामहालय श्राद्धपितृ पक्ष
तिथि श्राद्ध

द्वितीया श्राद्ध क्या है?

द्वितीया श्राद्ध वह श्राद्ध कर्म है जो किसी भी मास की द्वितीया तिथि को, विशेषकर पितृ पक्ष यानी आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को किया जाता है। इसे सामान्य भाषा में दूज का श्राद्ध भी कहते हैं। यह उन पितरों के लिए होता है जिनकी मृत्यु स्वाभाविक रूप से किसी भी पक्ष की द्वितीया तिथि को हुई हो।

द्वितीया श्राद्धदूज श्राद्धतिथि श्राद्ध
प्रतिपदा श्राद्ध

प्रतिपदा श्राद्ध क्या है?

प्रतिपदा श्राद्ध = पितृ पक्ष के पहले दिन (आश्विन कृष्ण प्रतिपदा) किया जाने वाला श्राद्ध। इसे 'पड़वा श्राद्ध' भी कहते हैं। प्रतिपदा को मरे पितरों का वार्षिक पार्वण श्राद्ध इसी दिन होता है। मातामह श्राद्ध की विशेषता इसी दिन है।

प्रतिपदा श्राद्धपड़वा श्राद्धपितृ पक्ष
पितृ पक्ष

महालय पक्ष किसे कहते हैं?

महालय = पितृ पक्ष का दूसरा नाम। दोनों समानार्थी। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक 16 दिनों की अवधि। प्रथम दिन = प्रतिपदा, अंतिम दिन = सर्वपितृ अमावस्या।

महालयपितृ पक्षपर्याय
पितृ पक्ष

पितृ पक्ष क्या है?

पितृ पक्ष = पितरों को समर्पित 16 दिवसीय अवधि। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक। 'महालय' भी कहते हैं। इस काल में पितर वायु रूप में दक्षिण दिशा से घर आते हैं और तर्पण-अन्न की प्रतीक्षा करते हैं।

पितृ पक्षमहालयश्राद्ध काल
श्राद्ध के प्रकार

पार्वण श्राद्ध क्या है?

पार्वण श्राद्ध = पितृ पक्ष में किया जाने वाला श्राद्ध। 'पर्व' (विशेष काल) से नाम। तीन पीढ़ियों (पिता, पितामह, प्रपितामह) के पितरों का संयुक्त तर्पण और पिण्डदान। प्रतिपदा श्राद्ध भी इसी कोटि का।

पार्वण श्राद्धपितृ पक्षतीन पीढ़ी
लोक

संन्यासियों का श्राद्ध द्वादशी को क्यों किया जाता है?

संन्यासियों के श्राद्ध के लिए पितृ पक्ष की द्वादशी तिथि निर्धारित मानी गई है।

संन्यासी श्राद्धद्वादशीपितृ पक्ष
लोक

अकाल मृत्यु वालों का श्राद्ध चतुर्दशी को क्यों किया जाता है?

अकाल मृत्यु वाले पूर्वजों की शांति के लिए पितृ पक्ष की चतुर्दशी को श्राद्ध किया जाता है।

अकाल मृत्युचतुर्दशी श्राद्धपितृ पक्ष
लोक

सर्वपितृ अमावस्या किसके लिए होती है?

जिन पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या को किया जाता है।

सर्वपितृ अमावस्यापितृ पक्षअज्ञात तिथि
लोक

पितृलोक पितृ पक्ष में पृथ्वी के निकट क्यों माना जाता है?

पितृ पक्ष में पितृलोक पृथ्वी के निकट माना जाता है, इसलिए पितरों के तर्पण का यह प्रमुख समय है।

पितृलोकपितृ पक्षमहालय
लोक

पितृ पक्ष कब आता है और इसका महत्व क्या है?

भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक पितृ पक्ष होता है, जब पितृलोक पृथ्वी के निकट माना जाता है।

पितृ पक्षमहालयश्राद्ध
व्रत का महत्व

पितृ पक्ष क्या है और यह कब शुरू होता है?

यह भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक के 16 दिन होते हैं। इन दिनों में पितर (पूर्वज) अपने वंशजों से तर्पण और भोजन ग्रहण करने धरती के करीब आते हैं।

पितृ पक्षमहालयश्राद्ध काल
विशेष अमावस्या

सर्वपितृ अमावस्या का क्या महत्व है?

यह पितृ पक्ष का आखिरी दिन होता है। जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद न हो, उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है। इससे सभी भूले-बिसरे पितर खुश हो जाते हैं।

सर्वपितृ अमावस्यामहालय श्राद्धपितृ पक्ष
श्राद्ध-पितृ कर्म

महालया पक्ष में पितरों की पूजा कैसे करें?

पितृ पक्ष: भाद्रपद पूर्णिमा से अमावस्या (16 दिन)। मृत्यु तिथि पर श्राद्ध (अज्ञात हो तो अमावस्या)। विधि: दक्षिण मुख → अपसव्य जनेऊ → तिल-जौ-कुश-जल तर्पण → पिण्डदान → ब्राह्मण भोज → कौवे को भोजन → दान। गया पिण्डदान सर्वश्रेष्ठ।

महालयापितृ पक्षश्राद्ध

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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