तंत्र देवतातंत्र साधना में कौन सा देवता पूजते हैं?तंत्र देवता: दस महाविद्याएं (काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला)। शैव: काल भैरव (64 भैरव), अघोर शिव। वैष्णव: नरसिंह। सर्वाधिक: काली + काल भैरव।#देवता#काली#भैरव
भैरव साधना समयभैरव साधना कब करनी चाहिए?भैरव साधना: भैरव अष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी — सर्वश्रेष्ठ)। प्रत्येक शनिवार। अमावस्या रात्रि। चतुर्दशी। निशीथ काल (रात 12 बाद)। उत्तर/पूर्व मुख। संध्या काल वर्जित।#भैरव#समय#शनिवार
तंत्र मंत्रतंत्र साधना के दौरान कौन सा मंत्र जपें?तंत्र मंत्र: काली — 'ॐ क्रीं काल्यै नमः'। भैरव — 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय।' त्रिपुर सुंदरी — 'ॐ ऐं ह्रीं श्रीं।' सर्वोच्च: श्री विद्या (पंचदशी — केवल गुरु दीक्षा से)। सर्वसुलभ: 'ॐ क्रीं काल्यै नमः।'#मंत्र#बीज मंत्र#काली
काल भैरव पूजाकाल भैरव पूजा कैसे करें?काल भैरव पूजा: भैरव अष्टमी/शनिवार/अमावस्या। काले/लाल वस्त्र। पंचामृत स्नान। नीले फूल, सरसों तेल दीपक (5 बाती)। काल भैरव अष्टकम् पाठ। मंत्र 108 बार। नैवेद्य: उड़द + काले तिल।#काल भैरव#पूजा विधि#अष्टमी
भैरव मंत्रभैरव मंत्र क्या है?भैरव मंत्र: मूल — 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरुकुरु बटुकाय ह्रीं।' सरल — 'ॐ काल भैरवाय नमः।' बटुक — 'ॐ ह्रौं ह्रीं ह्रूं बटुकाय...।' नित्य 108, विशेष 1008 जप। फल: आपदाओं से रक्षा, शत्रु नाश।#भैरव मंत्र#काल भैरव#बटुक भैरव
भैरव साधनाभैरव साधना कैसे करें?भैरव साधना: शनिवार रात्रि/अमावस्या। काले तिल, उड़द, सरसों तेल दीपक (5 बाती)। काल भैरव अष्टकम् पाठ। मंत्र: 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरुकुरु बटुकाय ह्रीं।' 108 जप। नैवेद्य: उड़द + काले तिल। फल: बाधा-शत्रु से रक्षा।#भैरव#विधि#पूजा
तंत्र देवतातंत्र साधना में कौन से देवता पूजे जाते हैं?तंत्र साधना में मुख्यतः दस महाविद्याएं: काली (प्रथम), तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला। शैव तंत्र में: शिव, भैरव। सभी साधनाओं में गणेश पूजा प्रथम। काली, भैरव और त्रिपुर सुंदरी सर्वाधिक लोकप्रिय।#तंत्र देवता#काली#भैरव
भैरव साधनाभैरव मंत्र क्या है?भैरव के प्रमुख मंत्र: बटुक भैरव — 'ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ॐ' (संकट नाश); 'ॐ ह्रीं बटुकाय नमः' (नित्य जप); काल भैरव — 'ॐ काल भैरवाय नमः'; भैरव गायत्री — 'ॐ भैरवाय विद्महे महाकालाय धीमहि।' नित्य 108 बार जप।#भैरव मंत्र#बटुक भैरव#काल भैरव
भैरव साधनाभैरव साधना कैसे करें?भैरव साधना: काले/नीले वस्त्र, सरसों तेल दीप, उड़द की दाल, लाल पुष्प। मंत्र: 'ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ॐ' — 108 बार। काल भैरव अष्टकम् (शंकराचार्य) पाठ करें। भैरव शत्रु भय नाश, स्थान रक्षा और सिद्धि के देवता हैं।#भैरव साधना#काल भैरव#बटुक भैरव
भैरव साधनाभैरव साधना कैसे करें?भैरव साधना में 'ॐ ह्रीं बं भैरवाय नमः' मंत्र, सरसों तेल का दीप, काले तिल और उड़द का भोग, शनिवार या कृष्ण अष्टमी को करें। काल भैरव भय नाश और न्याय के देवता हैं। उच्च भैरव तंत्र (श्मशान साधना) बिना गुरु दीक्षा के न करें।#भैरव साधना#काल भैरव#शिव तंत्र
शिव साधनाशिव के 64 भैरव रूपों की उपासना कैसे करें?8 अष्ट भैरव × 8 उपभैरव = 64 भैरव। 64 भैरव उपासना = तांत्रिक, गुरु दीक्षा अनिवार्य। सामान्य भक्त: काल भैरव पूजा (कालाष्टमी), बटुक भैरव (भय निवारण)। भैरवाष्टमी = वर्ष का प्रमुख भैरव पूजा दिन। काशी काल भैरव सर्वप्रसिद्ध। 64 भैरव समूह साधना अत्यंत दुर्लभ — केवल सिद्ध गुरु मार्गदर्शन में।#अष्ट भैरव#64 भैरव#भैरव उपासना
शिव महिमाब्रह्माजी का सिर काटने के बाद शिव को ब्रह्महत्या का पाप क्यों लगा?ब्रह्मा के सिर की हत्या महापाप (ब्रह्महत्या) है इसलिए भैरव रूप में शिव को यह दोष लगा। भैरव कपाल हाथ में लेकर तीर्थाटन करते रहे। काशी पहुँचने पर कपाल गिरा और पाप-मुक्ति हुई — वह स्थान 'कपाल मोचन' कहलाया।#ब्रह्महत्या#काल भैरव#कपाल मोचन
शिव महिमाशिव के कपाली रूप की कथा क्या है?कपाली रूप में शिव (भैरव) ब्रह्मा का कपाल हाथ में लेकर तीनों लोकों में भिक्षाटन करते हैं — यह ब्रह्महत्या के प्रायश्चित का प्रतीक है। काशी में कपाल गिरने से मुक्ति मिली, वहीं कपाल मोचन तीर्थ बना और भैरव काशी के कोतवाल बने।#कपाली#शिव रूप#भैरव
शिव महिमाशिव ने ब्रह्मा का पाँचवाँ सिर क्यों काटा था?ब्रह्माजी ने वेदों के शिव-श्रेष्ठता उत्तर को नकार कर पाँचवें मुख से शिव को अपना पुत्र कहते हुए अपमानजनक वचन कहे। इससे क्रोधित शिव की भृकुटि से काल भैरव प्रकट हुए और उन्होंने नाखून से ब्रह्मा का वह अहंकारी पाँचवाँ सिर काट दिया।#ब्रह्मा पाँचवाँ सिर#काल भैरव#अहंकार दमन