विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना के देवताओं का वर्णन महानिर्वाण तंत्र और शाक्त आगम में मिलता है:
शाक्त तंत्र — दस महाविद्याएं (सर्वप्रमुख)
देवी भागवत और महानिर्वाण तंत्र में दस महाविद्याओं का वर्णन:
| क्र. | महाविद्या | स्वरूप |
|-----|-----------|--------|
| 1 | काली | प्रथम, उग्रतम — काल की शक्ति |
| 2 | तारा | उद्धारक — नीला वर्ण |
| 3 | त्रिपुर सुंदरी (षोडशी) | सौंदर्य और मोक्ष |
| 4 | भुवनेश्वरी | जगत की माता |
| 5 | भैरवी | उग्र, अग्नि शक्ति |
| 6 | छिन्नमस्ता | स्वयंभुजा |
| 7 | धूमावती | विधवा, वैराग्य शक्ति |
| 8 | बगलामुखी | वाक् स्तंभन |
| 9 | मातंगी | वाक्, ज्ञान |
| 10 | कमला | लक्ष्मी स्वरूप |
शैव तंत्र के देवता
- ▸शिव / महाकाल — कश्मीर शैवाद्वैत
- ▸भैरव / काल भैरव / बटुक भैरव
- ▸रुद्र — वैदिक-तांत्रिक
अन्य तांत्रिक देवता
- ▸गणेश — विघ्नराज; सभी तंत्र साधनाओं में प्रथम पूजा
- ▸हनुमान — रक्षा तंत्र
- ▸योगिनियाँ (64) — तांत्रिक क्षेत्र रक्षक
- ▸नवग्रह — ज्योतिष-तंत्र में
सर्वाधिक लोकप्रिय तांत्रिक देवता
काली, भैरव और त्रिपुर सुंदरी (श्री विद्या) — ये तीन तांत्रिक परंपरा के केंद्र हैं।





