विस्तृत उत्तर
त्रिपुर सुंदरी को षोडशी, ललिता, राजराजेश्वरी और महात्रिपुरसुंदरी के नाम से भी जाना जाता है। दस महाविद्याओं में उनका चौथा स्थान है। षोडशी का अर्थ है सोलह कलाओं से सम्पन्न। वे महाशिव की ऊर्जा और सौन्दर्य का साक्षात स्वरूप हैं — देवीपुराण में उनका वर्णन सर्वांग-सुंदरी और जगत-जननी के रूप में है। जो उनका आश्रय ग्रहण करते हैं उनमें और ईश्वर में कोई भेद नहीं रह जाता।
त्रिपुर सुंदरी का मुख्य बीज मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः॥
इस मंत्र में तीन प्रमुख बीजाक्षर हैं:
'ऐं' — सरस्वती बीज (ज्ञान-शक्ति)
'ह्रीं' — माया-शक्ति बीज (भुवनेश्वरी)
'श्रीं' — लक्ष्मी बीज (श्री-शक्ति)
त्रिपुर का अर्थ है — तीन पुर (त्रिगुण, त्रिलोक, त्रिकाल) — और वे इन तीनों में सुंदरतम हैं, इसीलिए 'त्रिपुरसुंदरी' कहलाती हैं।
श्रीविद्या परम्परा में इनकी उपासना श्रीचक्र-यंत्र के माध्यम से की जाती है। इनकी साधना से सौंदर्य-प्राप्ति, सुखी वैवाहिक जीवन, मनोनियंत्रण और आत्मिक शांति मिलती है।
नोट: श्रीविद्या की गुरु-परम्परा से दीक्षा के बिना इनकी गहरी साधना नहीं की जाती।





