ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
क्या है

धर्म क्या है?(22)

धर्म का अर्थधर्म क्या है?धर्म का महत्व
सरल उत्तर

धर्म = 'धृ' धातु — जो धारण करे/टिकाए। कर्तव्य + नैतिकता + सही आचरण। मनुस्मृति: 10 लक्षण (धैर्य, क्षमा, सत्य, अहिंसा...)। कणाद: जो उन्नति और मोक्ष दे। महाभारत: 'अहिंसा परमो धर्मः'। गीता: स्वधर्म ही श्रेष्ठ। उपनिषद: 'न हि सत्यात् परो धर्मः'।

स्रोत प्रश्न: धर्म का अर्थ क्या है? →
दिव्यास्त्र

संवर्त अस्त्र का पौराणिक महत्व क्या है?

संवर्त अस्त्र यम और काल की अंतिम शक्ति का प्रतीक है। यह सिखाता है कि धर्म की स्थापना के लिए कभी-कभी पूर्ण विनाश आवश्यक है लेकिन परम शक्ति बड़ी नैतिक जिम्मेदारी माँगती है।

#संवर्त अस्त्र#महत्व#प्रतीक
सनातन सिद्धांत

धर्म का अर्थ क्या है?

धर्म = 'धृ' धातु — जो धारण करे/टिकाए। कर्तव्य + नैतिकता + सही आचरण। मनुस्मृति: 10 लक्षण (धैर्य, क्षमा, सत्य, अहिंसा...)। कणाद: जो उन्नति और मोक्ष दे। महाभारत: 'अहिंसा परमो धर्मः'। गीता: स्वधर्म ही श्रेष्ठ। उपनिषद: 'न हि सत्यात् परो धर्मः'।

#धर्म#स्वधर्म#कर्तव्य
भगवद गीता

भगवद गीता का संदेश क्या है?

गीता का केंद्रीय संदेश: कर्म करो, फल की चिंता मत करो (2.47)। आत्मा अमर है। स्वधर्म श्रेष्ठ। कर्म योग + ज्ञान योग + भक्ति योग — तीनों मोक्ष-मार्ग। सुख-दुख में समभाव। अंतिम उपाय — ईश्वर की शरण (18.66)। 18 अध्याय, 700 श्लोक।

#गीता#संदेश#कर्म
वेद ज्ञान

वेदों का महत्व क्या है?

वेद धर्म का मूल ('वेदोऽखिलो धर्ममूलम्' — मनुस्मृति)। विश्व का सर्वप्राचीन ज्ञान। खगोल, आयुर्वेद, गणित, दर्शन सब समाहित। चार पुरुषार्थों का मार्गदर्शक। परलौकिक उपाय केवल वेद से जाना जाता है। सभी दर्शन, उपनिषद, पुराण वेद पर आधारित।

#वेद#महत्व#सनातन धर्म
श्रीमद्भागवत

आततायी का मतलब क्या है?

आततायी वह है जो घोर हिंसक अपराध करे; टिप्पणी में आग लगाने वाला, विष देने वाला, हथियार लेकर हमला करने वाला आदि छह प्रकार बताए गए हैं।

#आततायी#धर्म#अश्वत्थामा
दान और साधुधर्म

साधुधर्म क्या है?

श्रुति-स्मृति से विहित, वर्णाश्रम से सम्बद्ध और शिष्टाचार के अनुकूल धर्म साधुधर्म है।

#साधुधर्म#श्रुति#स्मृति
धर्म और आचार

सत्य बोलने का सही अर्थ क्या है?

पूछे जाने पर देखे गए कथनयोग्य और अकथनीय विषय को बिना छिपाए व्यक्त करना सत्य कहा गया है।

#सत्य#वाणी#देखा हुआ
धर्म और आचार

धर्म और अधर्म का सही अर्थ क्या है?

कुशल कर्म धर्म और अकुशल कर्म अधर्म है; जिससे अभीष्ट मिले वह धर्म और जिससे अनिष्ट मिले वह अधर्म है।

#धर्म#अधर्म#कुशल कर्म
श्रीमद्भागवत

धर्म का असली उद्देश्य क्या है?

धर्म का असली उद्देश्य मोक्ष, भगवान को प्रसन्न करना और जीवन को तत्त्व-जिज्ञासा की ओर ले जाना है।

#धर्म#मोक्ष#भगवान
श्रीमद्भागवत

सच्ची भक्ति क्या है?

सच्ची भक्ति वह है जो भगवान कृष्ण में हो, बिना किसी कामना के हो और निरंतर बनी रहे।

#भक्ति#सच्ची भक्ति#कृष्ण
दक्ष वंश

धर्म की पत्नियाँ कौन थीं?

श्रद्धा से लेकर कीर्ति तक तेरह कन्याएँ प्रजापति धर्म की पत्नियाँ बनीं।

#धर्म#धर्म की पत्नियाँ#श्रद्धा
श्रीमद्भागवत

कृष्ण के धाम जाने के बाद धर्म का सहारा क्या है?

ऋषि यही प्रश्न पूछते हैं कि धर्मरक्षक कृष्ण के धाम जाने पर धर्म ने अब किसकी शरण ली है।

#धर्म#कृष्ण#धाम
लोक

शरणागत धर्म क्या होता है?

शरणागत धर्म में भयभीत होकर रक्षा माँगने वाले की रक्षा करना धर्म माना जाता है।

#शरणागत धर्म#धर्म#काव्या माता
लोक

सच्ची लक्ष्मी किसे कहते हैं?

सच्ची लक्ष्मी धर्म, श्रम, करुणा और शुभ समृद्धि का नाम है।

#सच्ची लक्ष्मी#समृद्धि#धर्म
जीवन एवं मृत्यु

पाप क्या है?

पाप = धर्म के विरुद्ध, दूसरों को कष्ट देने वाला और स्वयं को अधःपतन की ओर ले जाने वाला कर्म। तीन प्रकार — मानसिक, वाचिक, कायिक। गरुड़ पुराण अध्याय 4 में पाप-कर्मों का विस्तृत वर्णन है।

#पाप#परिभाषा#धर्म
शास्त्र ज्ञान

अहिंसा परमो धर्मः का पूरा श्लोक क्या है?

महाभारत, अनुशासन पर्व 115.23 — 'अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परं तपः। अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥' अर्थ: अहिंसा परम धर्म, परम तप और परम सत्य है। 'धर्म हिंसा तथैव च' वाला अर्धश्लोक प्रामाणिक महाभारत में उपलब्ध नहीं है।

#अहिंसा#महाभारत#धर्म
भक्ति एवं आध्यात्म

चार पुरुषार्थ क्या हैं?

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — ये चार पुरुषार्थ हैं। धर्म नींव है, अर्थ-काम जीवन के साधन हैं, और मोक्ष — जन्म-मरण से मुक्ति — परम लक्ष्य है।

#पुरुषार्थ#धर्म#अर्थ
हिंदू दर्शन

धर्म अर्थ काम मोक्ष चार पुरुषार्थ क्या हैं

चार पुरुषार्थ: धर्म (कर्तव्य/नैतिकता — आधार), अर्थ (धर्मपूर्वक धन — साधन), काम (धर्मयुक्त इच्छापूर्ति — सुख), मोक्ष (जन्म-मृत्यु से मुक्ति — परम लक्ष्य)। मनुस्मृति — धर्म के 10 लक्षण। कौटिल्य — 'अर्थ का मूल धर्म'। चारों में संतुलन = सार्थक जीवन।

#पुरुषार्थ#धर्म#अर्थ
वेद ज्ञान

वेदों में धर्म का अर्थ क्या है?

वेदों में धर्म का मूल रूप 'ऋत' है — ब्रह्मांडीय सत्य-व्यवस्था जिसे वरुण देव संरक्षित करते हैं। 'धारयति इति धर्मः' — जो धारण करे, वह धर्म। मनुस्मृति (2/6) — 'वेदोऽखिलो धर्ममूलम्' — सम्पूर्ण वेद ही धर्म का मूल है।

#धर्म#वेद#ऋत
गीता दर्शन

गीता में भगवान कृष्ण का संदेश क्या है?

गीता में श्रीकृष्ण का मुख्य संदेश है — निष्काम कर्म करो (2/47), आत्मा अमर है (2/19), धर्म की रक्षा करो (4/7), समभाव रखो और ईश्वर की शरण लो (18/66)। यही गीता का सार है।

#श्रीकृष्ण#गीता#संदेश
हिंदू धर्म दर्शन

हिंदू धर्म के मुख्य सिद्धांत क्या हैं?

हिंदू धर्म के मुख्य सिद्धांत हैं — ब्रह्म की एकता, आत्मा की अमरता, कर्म और पुनर्जन्म का सिद्धांत, मोक्ष को परम लक्ष्य मानना, चार पुरुषार्थ (धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष), चार आश्रम और अहिंसा का पालन। ऋग्वेद का 'एकं सत् विप्राः बहुधा वदन्ति' इसका मूल दर्शन है।

#हिंदू धर्म#सिद्धांत#धर्म
दर्शन

धर्म का सही अर्थ क्या है हिंदू दर्शन में?

धर्म = 'जो धारण करे' (धृ धातु)। वैशेषिक: जिससे लौकिक उन्नति और मोक्ष दोनों सिद्ध हों। मनुस्मृति: 10 लक्षण — धैर्य, क्षमा, संयम, शौच, सत्य आदि। 'धर्म' = Religion नहीं, कर्तव्य + नैतिकता + प्राकृतिक व्यवस्था।

#धर्म#अर्थ#धृ धातु
और क्या है
अन्य शब्दों के क्या है

सनातन धर्म के सभी प्रमुख शब्दों के क्या है।

धर्म टैग
धर्म पर सम्पूर्ण संग्रह

सभी धर्म सम्बन्धित प्रश्नोत्तर एक स्थान पर।