विस्तृत उत्तर
शरणागत धर्म का अर्थ है कि जो व्यक्ति भयभीत होकर, प्राण-रक्षा के लिए किसी के पास शरण माँगने आए, उसकी रक्षा करना धर्म है। यह सिद्धांत सनातन परंपरा में बहुत ऊँचा माना गया है। शरणागत शत्रु भी हो, तब भी उसे तत्काल मार देना धर्मसम्मत नहीं माना जाता। काव्या माता ने इसी धर्म का पालन किया। असुर उनके द्वार पर भयभीत होकर आए थे, इसलिए उन्होंने उन्हें अभय दिया। इस घटना में शरणागत धर्म और ब्रह्मांडीय व्यवस्था की रक्षा के बीच टकराव हुआ, जिससे पूरी कथा का धर्मसंकट जन्म लेता है।
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