ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
क्या है

मृत्यु क्या है?(18)

मृत्यु का अर्थमृत्यु क्या है?मृत्यु का महत्व
सरल उत्तर

मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से करोड़ों पाप भस्म हो जाते हैं। अजामिल ने 'नारायण' नाम लिया और यमदूतों से बच गया। इसीलिए मृत्यु के समय तुलसी-शालग्राम रखते हैं।

स्रोत प्रश्न: मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से क्या होता है? →
लोक

मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से क्या होता है?

मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से करोड़ों पाप भस्म हो जाते हैं। अजामिल ने 'नारायण' नाम लिया और यमदूतों से बच गया। इसीलिए मृत्यु के समय तुलसी-शालग्राम रखते हैं।

#मृत्यु#भगवान नाम#पाप नाश
लोक

भूलोक का संबंध मृत्यु के बाद की यात्रा से क्या है?

मृत्यु के बाद भूलोक में किए कर्मों के अनुसार स्वर्ग-नरक मिलता है लेकिन वहाँ का भोग पूरा होने पर पुनः भूलोक में ही लौटना पड़ता है। यहीं जन्म-मरण का चक्र तोड़ा जा सकता है।

#भूलोक#मृत्यु#परलोक
दिव्यास्त्र

यमदण्ड क्या है?

यमदण्ड के अनेक अर्थ हैं — यमराज का निजी अस्त्र, अर्जुन को मिला दिव्यास्त्र, मृत्यु के बाद पापी आत्मा का दण्ड, और जैन कथाओं में एक पात्र का नाम।

#यमदण्ड#यमराज#कालदण्ड
दिव्यास्त्र

मृत्यु के समय तुलसी रखने से क्या होता है?

मृत्यु के समय सिरहाने तुलसी या मुख में तुलसी पत्ता होने पर यमदूत आत्मा को नहीं ले जाते और स्वयं यमराज भी उस आत्मा को प्रणाम करते हैं।

#तुलसी#मृत्यु#यमदूत
श्रीमद्भागवत

बुरे कर्मों का फल मृत्यु के बाद क्या होता है?

धुंधुकारी के उदाहरण में बुरे कर्मों का फल मृत्यु के बाद प्रेत योनि, भूख-प्यास, भटकाव और असहायता के रूप में आया।

#बुरे कर्म#कर्मफल#मृत्यु
लोक

नित्य प्रलय क्या है?

नित्य प्रलय दैनिक मृत्यु और क्षय है।

#नित्य प्रलय#मृत्यु#क्षय
लोक

गरुड़ पुराण में प्रेत अवस्था क्या है?

मृत्यु के बाद की सूक्ष्म वायवीय अवस्था।

#प्रेत अवस्था#गरुड़ पुराण#मृत्यु
श्राद्ध दर्शन

प्रेत योनि क्या है?

प्रेत योनि = मृत्यु के बाद आत्मा स्थूल शरीर त्यागकर सूक्ष्म शरीर धारण कर जिस अवस्था में जाती है। सपिण्डीकरण संस्कार से पहले आत्मा प्रेत रूप में भटकती है। गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प में विस्तृत वर्णन।

#प्रेत योनि#गरुड़ पुराण#सूक्ष्म शरीर
लोक

अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर क्या होता है?

अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर अंगूठे के आकार की वह देह है जिसे यमदूत शरीर से निकालते हैं और जिससे आत्मा यातनाएँ भोगती है।

#अंगुष्ठमात्र#सूक्ष्म शरीर#यातना देह
लोक

यमदूत कौन हैं?

यमदूत यमराज के दंडाधिकारी हैं, जो मृत्यु के बाद पापी आत्मा को यमलोक तक ले जाते हैं।

#यमदूत#यमराज#मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

अशौच या सूतक क्या होता है?

मृत्यु से सपिण्डीकरण तक घर और परिजनों में रहने वाली अशुद्धि को अशौच या सूतक कहा जाता है।

#अशौच#सूतक#मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

प्राण कंठ में रुकने पर क्या होता है?

प्राण कंठ में रुकने पर चेतना सिमटती है और पापी जीव को यमदूत दिखाई देते हैं।

#प्राणोत्क्रमण#कंठ#यमदूत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूक्ष्म शरीर क्या होता है?

सूक्ष्म शरीर सत्रह तत्त्वों से बना वह शरीर है जिसमें आत्मा मृत्यु के बाद कर्म-संस्कारों के साथ आगे बढ़ती है।

#सूक्ष्म शरीर#लिंग शरीर#मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

स्थूल शरीर क्या होता है?

स्थूल शरीर पञ्चभौतिक देह है, जिसे आत्मा मृत्यु के समय छोड़ देती है।

#स्थूल शरीर#पञ्चभौतिक देह#मृत्यु
लोक

देवयान मार्ग क्या है?

देवयान मार्ग वह दिव्य मार्ग है जिससे आत्मा मृत्यु के बाद अर्चिस, दिन, शुक्ल पक्ष, उत्तरायण के देवताओं के लोकों से होते हुए सत्यलोक पहुँचती है।

#देवयान#मार्ग#आत्मा
लोक

सुदर्शन चक्र के भय का तात्विक अर्थ क्या है?

सुदर्शन चक्र काल का प्रतीक है। चाहे कितनी भी माया हो, ईश्वरोऽहं कहो — काल से कोई नहीं बचता। यही अतल लोक का तात्विक सत्य है।

#सुदर्शन चक्र#तात्विक अर्थ#काल
जीवन एवं मृत्यु

पशु-पक्षियों की मृत्यु के बाद क्या होता है?

पशु-पक्षी भोग योनि में होते हैं। मृत्यु के बाद उनकी जीवात्मा अपने संचित कर्मों के अनुसार अगली योनि धारण करती है और क्रमशः उच्च योनियों की ओर बढ़ती है जब तक मनुष्य जन्म न मिले।

#पशु पक्षी#मृत्यु#योनि
तीर्थ एवं मोक्ष

गंगातट पर मृत्यु से मोक्ष का विधान क्या है?

गंगातट, विशेषकर काशी-वाराणसी में, मृत्यु होने पर स्वयं शिव तारक मंत्र देते हैं जिससे मोक्ष मिलता है — यह काशीखण्ड में वर्णित है। गरुड़ पुराण के अनुसार मुख में गंगाजल पड़ने से आत्मा शुद्ध होती है और पाप नष्ट होते हैं।

#गंगातट#मृत्यु#मोक्ष
और क्या है
अन्य शब्दों के क्या है

सनातन धर्म के सभी प्रमुख शब्दों के क्या है।

मृत्यु टैग
मृत्यु पर सम्पूर्ण संग्रह

सभी मृत्यु सम्बन्धित प्रश्नोत्तर एक स्थान पर।