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क्या है

यमलोक क्या है?(20)

यमलोक का अर्थयमलोक क्या है?यमलोक का महत्व
सरल उत्तर

यमलोक वह पारलौकिक न्याय-स्थान है जहाँ मृत्यु के बाद जीवात्मा के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन होता है और उनके अनुसार फल दिया जाता है।

स्रोत प्रश्न: यमलोक क्या है? →
लोक

पुष्पोदका नदी क्या है?

पुष्पोदका पुण्यात्माओं के मार्ग की निर्मल, शीतल और कमल-युक्त नदी है, जिसके किनारे उन्हें विश्राम और तर्पण मिलता है।

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वैतरणी नदी क्या है?

वैतरणी यमलोक के मार्ग की १०० योजन चौड़ी भयंकर नदी है, जिसमें पापियों के लिए रक्त, पीब, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं।

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यममार्ग क्या है?

यममार्ग मृत्यु के बाद आत्मा की यमलोक तक ८६,००० योजन लंबी कठिन यात्रा का मार्ग है।

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लोक

यातना-देह क्या है?

यातना-देह वह सूक्ष्म शरीर है जिससे आत्मा नरक की यातनाएँ भोगती है, पर वह आग या शस्त्र से नष्ट नहीं होती।

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लोक

यमदूत कौन हैं?

यमदूत यमराज के दंडाधिकारी हैं, जो मृत्यु के बाद पापी आत्मा को यमलोक तक ले जाते हैं।

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लोक

श्रवण और श्रवणी देव कौन हैं?

श्रवण और श्रवणी यमलोक के दिव्य गुप्तचर हैं, जो पुरुषों और स्त्रियों के शुभ-अशुभ कर्मों को देखते-सुनते हैं।

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लोक

चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका क्या है?

अग्रसंधानी चित्रगुप्त की दिव्य कर्म-पुस्तिका है, जिसमें हर जीव के जन्म से मृत्यु तक के कर्म दर्ज रहते हैं।

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लोक

चित्रगुप्त कौन हैं?

चित्रगुप्त यमलोक के कर्म-अभिलेखक हैं, जो हर जीव के शुभ-अशुभ कर्मों का सूक्ष्म लेखा रखते हैं।

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लोक

यमराज कौन हैं?

यमराज मृत्यु के देवता, धर्मराज, पितरों के अधिपति और ब्रह्मांडीय न्याय के सर्वोच्च अधिकारी हैं।

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लोक

यमलोक क्या है?

यमलोक वह पारलौकिक न्याय-स्थान है जहाँ मृत्यु के बाद जीवात्मा के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन होता है और उनके अनुसार फल दिया जाता है।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमपुरी क्या है?

यमपुरी धर्मराज यम का नगर है, जहाँ आत्मा के कर्मों का निर्णय होता है।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग क्या होता है?

यममार्ग पृथ्वी से यमलोक तक की 86,000 योजन लंबी कठोर यात्रा का मार्ग है।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वैतरणी नदी क्या है?

वैतरणी नदी यमलोक से पहले आने वाली रक्त, मवाद और अस्थियों से भरी भयंकर नदी है।

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जीवन एवं मृत्यु

नरक क्या है?

नरक = पाप का फल भोगने का स्थान। पाताल लोक में। 'नरक का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि है' — गरुड़ पुराण का वचन। शाश्वत नहीं — पाप-फल समाप्त होने पर पुनर्जन्म मिलता है। 84 लाख नरकों का उल्लेख है।

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जीवन एवं मृत्यु

धर्मराज के सामने प्रस्तुत करने की प्रक्रिया क्या है?

धर्मराज के समक्ष जीव को यमलोक के द्वार से लाया जाता है। चित्रगुप्त कर्मों का लेखा प्रस्तुत करते हैं, जीव से पूछताछ होती है, पाप-पुण्य की तुलना की जाती है और यमराज निर्णय सुनाते हैं।

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जीवन एवं मृत्यु

धर्मराज का कार्य क्या है?

धर्मराज यमदूत भेजते हैं, चित्रगुप्त के लेखे से कर्म-न्याय करते हैं और जीव को स्वर्ग-नरक-पुनर्जन्म का निर्णय देते हैं। उनका न्याय पूर्णतः निष्पक्ष और अटल है। यमलोक की समस्त व्यवस्था उनके अधीन है।

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जीवन एवं मृत्यु

चित्रगुप्त कौन हैं?

चित्रगुप्त ब्रह्मा जी के शरीर से उत्पन्न दिव्य पुरुष हैं जो यमराज के सहायक और समस्त जीवों के कर्मों के लेखाकार हैं। 'चित्र' (दृश्य) + 'गुप्त' (छिपा) — वे प्रत्येक गुप्त कर्म को भी देखते हैं।

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जीवन एवं मृत्यु

यमलोक में प्रवेश से पहले क्या होता है?

यमलोक प्रवेश से पहले वैतरणी नदी पार करनी होती है। फिर चार द्वारों में से कर्मानुसार द्वार मिलता है — पूर्व-पश्चिम-उत्तर पुण्यात्माओं के लिए, दक्षिण द्वार पापियों के लिए। अंदर चित्रगुप्त के सामने कर्मों का लेखा होता है।

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आत्मा और मोक्ष

यमलोक क्या है और वहाँ क्या होता है

यमलोक = धर्मराज यम का न्यायालय। मृत्यु बाद यमदूत आत्मा को ले जाते हैं → चित्रगुप्त कर्म लेखा प्रस्तुत → यम कर्मानुसार न्याय (स्वर्ग/नरक/पुनर्जन्म)। भगवत्भक्त यमलोक नहीं जाते (भागवत 6.3 — अजामिल कथा)।

#यमलोक#यमराज#धर्मराज
आत्मा और मोक्ष

स्वर्ग और नरक क्या है हिंदू धर्म में

स्वर्ग = पुण्य कर्मों का फल (दिव्य सुख, इंद्रलोक) — अस्थायी, पुण्य क्षीण होने पर पुनर्जन्म (गीता 9.21)। नरक = पाप कर्मों का दंड (यातनाएं) — अस्थायी। दोनों मोक्ष नहीं हैं। मोक्ष (जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति) ही परम लक्ष्य।

#स्वर्ग#नरक#देवलोक
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