विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यमलोक के प्रवेश से पूर्व की प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन है।
वैतरणी नदी पार करना — यमलोक पहुँचने से पहले जीवात्मा को वैतरणी नदी पार करनी होती है जो सबसे बड़ा और कठिन अवरोध है। इसे पार किए बिना यमलोक नहीं मिलता।
चार द्वारों में से प्रवेश — यमलोक के चार द्वार हैं। कर्मों के अनुसार किस द्वार से प्रवेश होगा यह निर्धारित है। पूर्व द्वार — ऋषि, मुनि, योगी और सिद्ध पुरुषों के लिए। अप्सराएँ और गंधर्व स्वागत करते हैं। पश्चिम द्वार — धर्माचरण करने वाले, दान-पुण्य करने वाले और तीर्थ में प्राण त्यागने वालों के लिए। उत्तर द्वार — माता-पिता की सेवा करने वाले, सत्यवादी और अहिंसक के लिए। दक्षिण द्वार — पापी आत्माओं के लिए। यहाँ से प्रवेश अत्यंत कष्टकारी है — यही नरक का रास्ता है।
द्वारपाल — यमलोक के द्वार पर धर्मध्वज नामक द्वारपाल हैं। दो विशाल कुत्ते भी पहरेदार बताए गए हैं।
चित्रगुप्त का सामना — यमलोक में प्रवेश के बाद चित्रगुप्त के समक्ष कर्म-लेखा प्रस्तुत होता है।





