पौराणिक कथाशिव-पार्वती के चौसर (पांसे) की कहानी?चौसर के खेल में एक बालक ने माता पार्वती के जीतने पर भी पक्षपात करते हुए शिव जी को जीता हुआ बता दिया, जिस पर गुस्सा होकर माता ने उसे लंगड़ा होने का श्राप दे दिया।#चौसर#शिव पार्वती#श्राप
पौराणिक कथाइन्दुमती की कथा क्या है और उसने यह व्रत क्यों किया?भविष्य पुराण के अनुसार, इन्दुमती एक वेश्या थी जिसने जिंदगी में कभी पूजा-पाठ नहीं किया था। बुढ़ापे में मृत्यु के डर से उसने यह व्रत किया, जिसके पुण्य से उसे मोक्ष और 'सूर्य-लोक' मिला।#इन्दुमती#भविष्य पुराण#मोक्ष
पौराणिक कथासुशीला और कौण्डिन्य ऋषि की अनंत चतुर्दशी कथा क्या है?ब्राह्मण की पुत्री सुशीला ने शादी के बाद यमुना तट पर यह व्रत किया था, जिसके चमत्कार से उसके पति कौण्डिन्य ऋषि का आश्रम अपार धन-संपत्ति और वैभव से भर गया था।#सुशीला#कौण्डिन्य ऋषि#मूल कथा
पौराणिक कथाएकादशी माता की उत्पत्ति कैसे हुई (मुर दैत्य की कथा)?देवताओं को परेशान करने वाले 'मुर' दैत्य को मारने के लिए भगवान विष्णु के मन (ग्यारहवीं इंद्रिय) से एक शक्ति प्रकट हुई थी, जिसे भगवान ने 'एकादशी' नाम दिया।#एकादशी उत्पत्ति#मुर दैत्य#भगवान विष्णु
पौराणिक कथाभगवान विष्णु 4 महीने पाताल लोक में क्यों रहते हैं (राजा बलि की कथा)?वामन अवतार के समय राजा बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे वरदान दिया था कि वे 4 महीने (चातुर्मास) पाताल लोक में उसके महल के पहरेदार बनकर रहेंगे।#राजा बलि#पाताल लोक#वामन अवतार
पौराणिक कथासमुद्र मंथन और मोहिनी अवतार की कथा क्या है?समुद्र मंथन से निकले अमृत को असुरों ने छीन लिया था। तब भगवान विष्णु ने 'मोहिनी' नाम की अत्यंत सुंदर स्त्री का रूप धारण कर असुरों को भ्रमित किया और सारा अमृत देवताओं को पिला दिया।#समुद्र मंथन#मोहिनी अवतार#देवासुर संग्राम
पौराणिक कथाएकादशी माता की उत्पत्ति कैसे हुई और इस दिन अनाज क्यों नहीं खाते (पाप पुरुष की कथा)?भगवान विष्णु ने नरक में जीवों का कष्ट दूर करने के लिए एकादशी देवी को प्रकट किया था। एकादशी के दिन 'पाप पुरुष' अनाज में छुपकर बैठता है, इसलिए इस दिन अनाज खाना पाप है।#एकादशी उत्पत्ति#पाप पुरुष#अन्न निषेध
पौराणिक कथाभगवान कालभैरव की उत्पत्ति कैसे हुई? (ब्रह्मा के अहंकार की कथा)शिवपुराण के अनुसार, जब ब्रह्मा जी के पांचवें मुख ने अहंकारवश भगवान शिव की निंदा की, तब शिव जी के क्रोध से कालभैरव की उत्पत्ति हुई थी।#कालभैरव उत्पत्ति#शिवपुराण#ब्रह्मा का अहंकार
पौराणिक कथादुर्गाष्टमी पर रक्तबीज और चंड-मुंड वध की कथा क्या है?दुर्गा सप्तशती के अनुसार, अष्टमी के दिन ही माता ने अपने रौद्र रूप (चामुंडा/कालरात्रि) में चंड-मुंड और 'रक्तबीज' नामक राक्षसों का वध किया था और रक्तबीज का सारा खून पी लिया था।#दुर्गा सप्तशती#रक्तबीज#चंड-मुंड
पौराणिक कथामाता का नाम 'दुर्गा' कैसे पड़ा? (देवी भागवत पुराण की कथा)देवी भागवत पुराण के अनुसार, आदिशक्ति माता ने 'दुर्गम' (दुर्गमासुर) नामक एक अत्यंत भयंकर असुर का वध किया था। दुर्गम का वध करने के कारण ही उनका नाम 'दुर्गा' पड़ गया।#दुर्गा नामकरण#दुर्गम वध#देवी भागवत
पौराणिक कथामासिक दुर्गाष्टमी पर दुर्गमासुर वध की कथा क्या है?'दुर्गमासुर' नामक दैत्य ने वेदों को चुराकर धरती पर 100 साल का सूखा ला दिया था। तब माता ने प्रकट होकर उसका वध किया और धरती को बचाया। यह वध अष्टमी के दिन ही हुआ था।#दुर्गमासुर#देवी भागवत#शाकम्भरी
पौराणिक कथासमुद्र मंथन की कथा का आध्यात्मिक अर्थक्षीरसागर = मन; मंदराचल = साधना; वासुकि = प्राण; देव-असुर = शुभ-अशुभ गुण; कूर्म = ईश्वर कृपा; हालाहल = साधना में उभरे विकार (शिव/ज्ञान ग्रहण करे); अमृत = आत्मज्ञान/मोक्ष। शिक्षा: विष (कठिनाई) अमृत (ज्ञान) से पहले आता है।#समुद्र मंथन#आध्यात्मिक अर्थ#प्रतीक
पौराणिक कथानचिकेता यमराज कथा से क्या शिक्षा कठोपनिषदशिक्षाएं: श्रेय (ज्ञान) चुनो, प्रेय (भोग) नहीं। सत्य पर दृढ़ रहो। भोग अस्थायी, ज्ञान शाश्वत। आत्मा अमर — मृत्यु भय व्यर्थ। बुद्धि (विवेक) से इंद्रियां नियंत्रित करो (रथ रूपक)। शुद्ध जिज्ञासा सर्वशक्तिमान — बालक ने मृत्यु से अमरत्व सीखा।#नचिकेता#कठोपनिषद#यम
पौराणिक कथाशिव ने गंगा जटाओं में क्यों धारण किया कथासगर पुत्रों (60,000) की मुक्ति हेतु भगीरथ ने तपस्या से गंगा को स्वर्ग से बुलाया। गंगा का प्रचंड वेग पृथ्वी नष्ट कर देता, अतः शिव ने जटाओं में धारण कर वेग नियंत्रित किया। आध्यात्मिक: गंगा=ज्ञान, शिव=गुरु — बिना गुरु ज्ञान नियंत्रित नहीं।#शिव#गंगा#भगीरथ
पौराणिक कथाभक्त प्रह्लाद की कथा से क्या शिक्षाशिक्षा: सच्ची भक्ति सर्वशक्तिमान (5 वर्ष के बालक ने भगवान प्रकट किए)। अहंकार का विनाश निश्चित। भगवान सर्वव्यापी (खंभे में भी)। संकट में भी धर्म न छोड़ो। प्रह्लाद ने नवधा भक्ति (भागवत 7.5.23) का सिद्धांत दिया।#प्रह्लाद#नरसिंह#भक्ति
पौराणिक कथागजेंद्र मोक्ष की कथा का आध्यात्मिक संदेशगजेंद्र (जीवात्मा) को मगरमच्छ (संसार बंधन) पकड़ता है। अपनी शक्ति, परिवार — सब असफल। अंत में पूर्ण शरणागति ('ॐ नमो भगवते') → विष्णु तुरंत आए, मुक्त किया। शिक्षा: अहंकार त्यागकर पूर्ण समर्पण ही एकमात्र मोक्ष मार्ग।#गजेंद्र मोक्ष#विष्णु#शरणागति
पौराणिक कथागणेश जी की कथा क्या है?गणेश जी का जन्म माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से किया। शिव जी ने अनजाने में उनका सिर काट दिया, फिर हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया और 'प्रथम पूज्य' घोषित किया। माता-पिता की परिक्रमा से प्रथम पूज्य का वरदान मिला। परशुराम से युद्ध में एक दाँत टूटने से 'एकदंत' नाम पड़ा।#गणेश कथा#जन्म कथा#हाथी का सिर