विस्तृत उत्तर
एक अन्य मत के अनुसार, लक्ष्मी जी का वह स्वरूप जो केवल लौकिक धन देता है, वह स्वभाव से अस्थिर (चंचला) होता है, परंतु जब वे शिव और नारायण की पूर्ण कृपा के साथ महालक्ष्मी या ईश्वरी के रूप में स्थिर होती हैं, तभी जीव को शाश्वत और स्थिर समृद्धि प्राप्त होती है।





