विस्तृत उत्तर
हालाँकि पुराणों में नील सरस्वती की कोई अलग कहानी नहीं मिलती, लेकिन तांत्रिक ग्रंथों में इनका ज़िक्र खूब होता है।
एक कथा के अनुसार, महर्षि वशिष्ठ ने बहुत कठिन तप किया और तारा देवी को प्रसन्न किया। तब तारा ने नील सरस्वती के रूप में प्रकट होकर उन्हें सभी प्रकार के ज्ञान का वरदान दिया। इसीलिए वशिष्ठ को तारा देवी का पहला उपासक भी माना जाता है।
इससे यह समझा जाता है कि नील सरस्वती, तारा विद्या का सबसे गुप्त और विशेष पक्ष हैं, जिसे गुरु-शिष्य परंपरा से ही प्राप्त किया जा सकता है।
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