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यमराज प्रश्नोत्तरी — 84 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित यमराज विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 84 प्रश्न

दिव्यास्त्र

संवर्त अस्त्र का यमराज से क्या संबंध है?

संवर्त अस्त्र यमराज का अस्त्र है जो काल और अंतिम न्याय का प्रतीक है। यह काल का शस्त्र है और काल के निर्णय से कोई परे नहीं है।

संवर्त अस्त्रयमराजसंहार
दिव्यास्त्र

संवर्त अस्त्र किस चीज़ से बना था?

कुछ ग्रंथों के अनुसार संवर्त अस्त्र 'काले लोहे' से बना था। काला रंग भय, गंभीरता और अटल शक्ति का प्रतीक है जो यमराज के स्वभाव से मेल खाता है।

संवर्त अस्त्रकाला लोहास्वरूप
दिव्यास्त्र

संवर्त अस्त्र के अधिपति देवता कौन हैं?

संवर्त अस्त्र के अधिपति देवता यमराज हैं जिन्हें 'काल' भी कहते हैं। यह संहार और अंतिम न्याय का अस्त्र है जिससे कोई बच नहीं सकता।

संवर्त अस्त्रयमराजअधिपति देवता
दिव्यास्त्र

संवर्त अस्त्र क्या है?

संवर्त अस्त्र यमराज का दिव्यास्त्र है जो प्रलय जैसा विनाश करता है। इसका महाकाव्यों में केवल एक बार प्रयोग हुआ जब भरत ने तीन करोड़ गंधर्वों का संहार किया था।

संवर्त अस्त्रदिव्यास्त्रयमराज
दिव्यास्त्र

रावण और यमराज के बीच युद्ध क्यों हुआ?

अपने बल के अहंकार में रावण ने यमलोक पर आक्रमण कर दिया। इसी कारण यमराज और रावण के बीच भयंकर युद्ध हुआ।

रावणयमराजयुद्ध
दिव्यास्त्र

यमराज सत्यवान के प्राण लौटाने को क्यों विवश हुए?

यमराज ने बिना सोचे तीसरा वरदान दे दिया — सत्यवान से सौ पुत्र। पतिव्रता स्त्री बिना पति के पुत्र नहीं पा सकती, इसलिए अपने वचन से बंधकर सत्यवान के प्राण लौटाने पड़े।

यमराजसत्यवानप्राण
दिव्यास्त्र

सावित्री ने यमराज से कौन से तीन वरदान माँगे?

सावित्री ने तीन वरदान माँगे — ससुर की नेत्र-ज्योति, खोया हुआ राज्य, और सत्यवान से सौ पुत्र। तीसरे वरदान से यमराज अपने वचन में फँस गए।

सावित्रीतीन वरदानयमराज
दिव्यास्त्र

सावित्री ने यमराज से सत्यवान के प्राण कैसे वापस लिए?

सावित्री ने धर्म और दर्शन की ज्ञानपूर्ण बातों से यमराज को प्रभावित किया। बुद्धिमत्ता से तीन वरदान माँगकर यमराज को अपने ही वचन से बाँध दिया और सत्यवान के प्राण वापस लिए।

सावित्रीसत्यवानयमराज
दिव्यास्त्र

यमराज मार्कण्डेय के प्राण लेने क्यों आए थे?

मार्कण्डेय की निश्चित आयु 16 वर्ष पूरी होने पर यमराज अपने दूतों के साथ उनके प्राण हरने आए। यह मृत्यु के विधान का पालन था।

यमराजमार्कण्डेयप्राण
दिव्यास्त्र

यमराज के पास कालदण्ड के अलावा और कौन से अस्त्र हैं?

यमराज के पास कालदण्ड के अलावा एक गदा और एक पाश भी है। पाश से वे आत्मा को खींचते हैं लेकिन कालदण्ड उनकी सर्वोच्च शक्ति का प्रतीक है।

यमराजकालदण्डगदा
दिव्यास्त्र

यमराज को कालदण्ड कैसे मिला?

यमराज को कालदण्ड स्वयं सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने प्रदान किया था ताकि वे जीवों के कर्मों का न्याय कर सकें।

कालदण्डयमराजब्रह्मा
दिव्यास्त्र

यमराज कौन हैं और उन्हें धर्मराज क्यों कहते हैं?

यमराज सूर्य देव के पुत्र और दक्षिण दिशा के दिक्पाल हैं। वे केवल प्राण नहीं हरते बल्कि जीवों के कर्मों का न्याय भी करते हैं, इसीलिए उन्हें धर्मराज कहते हैं।

यमराजधर्मराजसूर्य देव
दिव्यास्त्र

यमदण्ड क्या है?

यमदण्ड के अनेक अर्थ हैं — यमराज का निजी अस्त्र, अर्जुन को मिला दिव्यास्त्र, मृत्यु के बाद पापी आत्मा का दण्ड, और जैन कथाओं में एक पात्र का नाम।

यमदण्डयमराजकालदण्ड
दिव्यास्त्र

मृत्यु के समय तुलसी रखने से क्या होता है?

मृत्यु के समय सिरहाने तुलसी या मुख में तुलसी पत्ता होने पर यमदूत आत्मा को नहीं ले जाते और स्वयं यमराज भी उस आत्मा को प्रणाम करते हैं।

तुलसीमृत्युयमदूत
दिव्यास्त्र

अर्जुन को यमदण्ड दिव्यास्त्र कैसे मिला?

वनवास काल में अर्जुन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर यमराज ने उनके पराक्रम और धर्मनिष्ठा को देखकर उन्हें यमदण्ड दिव्यास्त्र प्रदान किया।

अर्जुनयमदण्डदिव्यास्त्र
दिव्यास्त्र

ब्रह्मा जी ने यमराज को कालदण्ड न चलाने के लिए क्यों कहा?

ब्रह्मा जी ने दो कारणों से रोका — रावण को मनुष्य से मृत्यु का वरदान था, और कालदण्ड की शक्ति से समस्त सृष्टि का विनाश हो सकता था।

ब्रह्मायमराजकालदण्ड
दिव्यास्त्र

यमराज ने कालदण्ड का प्रयोग रावण पर क्यों नहीं किया?

ब्रह्मा जी ने हस्तक्षेप किया क्योंकि रावण को वरदान था कि वह मनुष्य के हाथों मरेगा, देवता के नहीं। साथ ही कालदण्ड से समस्त सृष्टि नष्ट हो सकती थी।

कालदण्डयमराजरावण
श्रीमद्भागवत

यमराज वैष्णवों को दंड क्यों नहीं देते?

यमराज अपने दूतों से कहते हैं कि जो भगवान की कथा में मत्त हैं, उनसे दूर रहो; मैं वैष्णवों को दंड नहीं देता।

यमराजवैष्णवभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

यमराज का भय कैसे मिटे?

कहा गया है कि जिनके हृदय में प्रेमरूप भक्ति रहती है, वे स्वप्न में भी यमराज को नहीं देखते।

यमराजभक्तिभय
श्रीमद्भागवत

भक्ति से क्या मिलता है?

भक्ति से कृष्ण धाम, यमराज से निर्भयता, बाधा से रक्षा और मुक्ति का फल बताया गया है।

भक्तिकृष्ण धाममोक्ष
लोक

दशमी श्राद्ध में श्वान बलि क्यों?

यमराज के श्वानों की तुष्टि के लिए।

श्वान बलिश्याम शबलयमराज
लोक

वैवस्वताय स्वाहा किसके लिए है?

यमराज से जुड़ी आहुति।

वैवस्वतयमराजश्राद्ध मंत्र
लोक

दशमी श्राद्ध में दक्षिण दिशा क्यों?

दक्षिण पितरों की दिशा है।

दक्षिण दिशायमराजपितर
लोक

अष्टमी श्राद्ध में कौए को अन्न क्यों देते हैं?

कौआ पितरों का संदेशवाहक माना गया है।

काक बलिकौआयमराज

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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