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विष्णु प्रश्नोत्तरी — 319 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित विष्णु विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 319 प्रश्न

श्रद्धा और शिवदर्शन

शिवलिंग में ध्यान क्यों बताया गया है?

क्योंकि शिव ने स्वयं कहा कि ब्रह्मा और विष्णु द्वारा देखे गए लिंग में ही सबको उनका ध्यान करना चाहिए।

शिवलिंगध्यानश्रद्धा
श्रद्धा और शिवदर्शन

शिव का ध्यान कहाँ करना चाहिए?

शिव ने कहा कि ब्रह्मा और विष्णु ने समुद्र में जिस लिंग का दर्शन किया था, उसी में उनका ध्यान करना चाहिए।

शिव ध्यानलिंगश्रद्धा
शिवभक्ति

ब्रह्मा, विष्णु और देवताओं को उत्तम पद कैसे मिला?

ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र और अन्य देवता शिवभक्ति से ही उत्तम पद को प्राप्त हुए।

ब्रह्माविष्णुइन्द्र
शैव पद और वैराग्य

शैव पद वैष्णव पद से परे क्यों कहा गया है?

शैव पद वैष्णव पद से परे बताया गया है; उसे विष्णु भी नहीं जानते और शुद्ध शिवात्मक तत्त्व असंख्य गुणों वाला कहा गया है।

शैव पदवैष्णव पदशिवात्मक तत्त्व
नरक और महादेव

महादेव गुणों के अनुसार कौन-कौन से रूप धारण करते हैं?

तमोगुण प्रधान होने पर वे कालरुद्र, रजोगुण प्रधान होने पर ब्रह्मा, सत्त्वगुण प्रधान होने पर विष्णु और गुणरहित होने पर महेश्वर रूप बताए गए हैं।

महादेवतमोगुणरजोगुण
श्रीमद्भागवत

सत्त्वगुण क्यों जरूरी है?

सत्त्वगुण चित्त को निर्मल करता है, भगवान का दर्शन कराने वाला है और मनुष्य का परम कल्याण श्रीहरि से होता है।

सत्त्वगुणविष्णुमन शुद्धि
शिव तत्त्व

महेश्वर एक ही क्यों बताए गए हैं?

असंख्य कल्प, पितामह और विष्णु उत्पन्न होते हैं, पर महेश्वर मात्र एक बताए गए हैं।

महेश्वरअसंख्य कल्पब्रह्मा
देव काल

विष्णु का एक दिन कितना बताया गया है?

ब्रह्मा के एक हजार युग विष्णु के एक दिन के बराबर बताए गए हैं।

विष्णुविष्णु का दिनब्रह्मा का युग
शिव तत्त्व

सदाशिव सर्वात्मक क्यों कहे गए हैं?

सदाशिव भव, विष्णु, ब्रह्मा आदि रूपों में स्थित होने और लोकों तथा पितामह के रूप में कहे जाने से सर्वात्मक बताए गए हैं।

सदाशिवसर्वात्मकभव
ब्रह्माण्ड वर्णन

करोड़ों ब्रह्माण्डों की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?

प्रधान प्रकृति सदाशिव के आश्रय से करोड़ों ब्रह्माण्डों में ब्रह्मा, विष्णु और शिव का सृजन करती है।

करोड़ों ब्रह्माण्डप्रधानसदाशिव
ब्रह्माण्ड वर्णन

ब्रह्माण्ड अण्ड कैसे उत्पन्न होता है?

महत्तत्त्व से पंचमहाभूत तक सभी तत्त्व अण्ड की उत्पत्ति करते हैं।

ब्रह्माण्डअण्डमहत्तत्त्व
शिव तत्त्व

ब्रह्मा विष्णु शिव की विश्व प्राज्ञ तैजस अवस्थाएँ क्या हैं?

बीजरूप ब्रह्मा, योनिरूप विष्णु और प्रधानरूप शिव की विश्व, प्राज्ञ और तैजस अवस्थाएँ कही गई हैं।

ब्रह्माविष्णुशिव
सृष्टि तत्त्व

विष्णु से जगत की रक्षा कैसे होती है?

तीन प्रधान देवों में विष्णु से जगत् की रक्षा होती है और पालन की स्थिति सत्त्वगुण से जुड़ी बताई गई है।

विष्णुजगत रक्षापालन
शिव तत्त्व

ब्रह्मा विष्णु रुद्र शिवात्मक कैसे हैं?

ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र तीनों प्रधान देव माया-वितत लिंगों से उद्भूत और शिवात्मक बताए गए हैं।

ब्रह्माविष्णुरुद्र
अवतार कथा

पृथ्वी का भार उतारने के लिए विष्णु ने किसकी आराधना की?

पृथ्वी का भार उतारने के लिए विष्णु द्वारा शंकरजी की आराधना का वर्णन बताया गया है।

विष्णुशंकरपृथ्वी का भार
अवतार कथा

वाराहावतार किस कल्प की कथा में बताया गया है?

वाराहावतार की कथा वाराहकल्प में विष्णु के अवतार के रूप में बताई गई है।

वाराहावतारवाराहकल्पविष्णु
शिव तत्त्व

शिवलिंग का प्राकट्य किस विवाद के बाद बताया गया है?

शिवलिंग का प्राकट्य ब्रह्मा और विष्णु के विवाद के बाद बताया गया है।

शिवलिंगप्राकट्यब्रह्मा
शिव तत्त्व

सदाशिव से ब्रह्मा विष्णु और कालरुद्र कैसे प्रकट होते हैं?

सदाशिव से रजोगुण के आश्रय से ब्रह्मा, सत्त्व के आश्रय से विष्णु और तमोगुण के आश्रय से कालरुद्र का प्रादुर्भाव बताया गया है।

सदाशिवब्रह्माविष्णु
गुण और देव रूप

तमोगुण रजोगुण सत्त्वगुण से कौन से रूप जुड़े हैं?

तमोगुण से कालरुद्र, रजोगुण से हिरण्यगर्भ, सत्त्वगुण से विष्णु और निर्गुण से महेश्वर रूप जुड़ता है।

तमोगुणरजोगुणसत्त्वगुण
पुराण कथा

कथा शुरू करने से पहले सूतजी ने किसे प्रणाम किया?

सूतजी ने शिव, ब्रह्मा, विष्णु और मुनीश्वर व्यासजी को नमस्कार करके कथा आरंभ की।

सूतजीशिवब्रह्मा
शिव तत्त्व

ब्रह्मा विष्णु शिव रूप का क्या अर्थ है?

ब्रह्मा-विष्णु-शिवरूप का अर्थ सदाशिव को सृष्टि, स्थिति और अंत से जुड़े परम रूप में समझना है।

ब्रह्माविष्णुशिव
लोक

हंस अवतार की कथा

हंस अवतार कथा में भगवान विष्णु हंस रूप में प्रकट होकर आत्मज्ञान का उपदेश देते हैं।

हंस अवतार कथासनकादिकब्रह्मा
लोक

अम्बरीष दुर्वासा कथा हिंदी

अम्बरीष-दुर्वासा कथा भक्त की क्षमा और भगवान की भक्त-रक्षा बताती है।

अम्बरीष दुर्वासा कथा हिंदीसुदर्शनविष्णु
लोक

अहं भक्तपराधीनो अर्थ

अहं भक्तपराधीनो का अर्थ है भगवान अपने भक्तों के प्रेम से बंध जाते हैं।

अहं भक्तपराधीनोभक्त पराधीनविष्णु

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।