विस्तृत उत्तर
अहं भक्तपराधीनो का अर्थ है कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम से अधीन हो जाते हैं। यह श्लोक श्रीमद्भागवत में दुर्वासा और अम्बरीष प्रसंग में आता है। भगवान विष्णु दुर्वासा से कहते हैं कि वे सर्वशक्तिमान होते हुए भी अपने साधु-भक्तों के प्रेम से बंधे हुए हैं। भक्त अपना सब कुछ भगवान को समर्पित कर देता है, इसलिए भगवान भी उसे अपना हृदय बना लेते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि भगवान कमजोर हैं, बल्कि यह कि वे प्रेम और भक्ति को अपनी सबसे बड़ी शक्ति मानते हैं। अम्बरीष की रक्षा इसी भक्त-पराधीनता का प्रमाण है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक



