विस्तृत उत्तर
हंस अवतार की कथा सृष्टि के प्रारंभ और आत्मज्ञान से जुड़ी है। ब्रह्मा जी ने सृष्टि के संचालन के लिए पंचपर्वा अविद्या की रचना की, जिससे जीव अपने वास्तविक स्वरूप को भूलकर देह और विषयों में बंध जाए। बाद में सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार ने ब्रह्मा जी से पूछा कि मन और विषयों का यह बंधन कैसे टूटे। ब्रह्मा जी रजोगुणी सृष्टि-कर्म में उलझे होने के कारण उत्तर न दे सके। उन्होंने भगवान विष्णु का ध्यान किया। तब भगवान दिव्य हंस रूप में प्रकट हुए और हंस गीता के रूप में आत्मज्ञान का उपदेश दिया।
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