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गरुड़ पुराण प्रश्नोत्तरी — 591 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित गरुड़ पुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 591 प्रश्न

मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डज शरीर कितने आकार का बनता है?

पिण्डज शरीर लगभग एक हाथ के आकार का बनता है।

पिण्डज शरीरआकारएक हाथ
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

दशगात्र में दिए गए पिण्ड के कितने भाग होते हैं?

दशगात्र के पिण्ड के चार भाग होते हैं।

दशगात्रपिण्ड के भागगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

दस दिन पिण्डदान न करने पर आत्मा की क्या स्थिति होती है?

पिण्डदान न होने पर आत्मा भूख से व्याकुल होकर वायव्य रूप में भटकती रहती है।

पिण्डदान न करनाआत्माभटकना
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूतक काल में संध्या-वंदन क्यों रोका जाता है?

संध्या-वंदन सूतक काल में इसलिए रोका जाता है ताकि परिवार प्रेत की सद्गति पर केंद्रित रहे।

सूतक कालसंध्या वंदनवर्जित
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूतक काल में आशीर्वाद देना क्यों वर्जित है?

सूतक काल में आशीर्वाद देना इसलिए वर्जित है ताकि परिजन प्रेत की सद्गति पर ध्यान दें।

सूतक कालआशीर्वादवर्जित
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

अंतिम पिण्ड हाथ में रखने के बाद आत्मा को क्या कहा जाता है?

अंतिम पिण्ड हाथ में रखने के बाद आत्मा को प्रेत कहा जाता है।

अंतिम पिण्डप्रेतप्रेतत्व
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

प्रेतत्व कब शुरू होता है?

अंतिम पिण्ड हाथ में रखने के बाद आत्मा प्रेत कहलाती है और प्रेतत्व शुरू होता है।

प्रेतत्वअंतिम पिण्डसपिण्डीकरण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

छः पिण्ड न देने पर क्या दोष बताया गया है?

छः पिण्ड न देने पर शव अग्निदाह योग्य नहीं माना जाता और अधिष्ठाता देवताओं के विनाश का दोष बताया गया है।

छः पिण्डदोषअग्निदाह
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

षट्पिण्ड विधान क्या है?

षट्पिण्ड विधान मृत्यु के दिन शवयात्रा के चरणों पर दिए जाने वाले छह पिण्डों का विधान है।

षट्पिण्ड विधानछः पिण्डशवयात्रा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के दिन छः पिण्ड क्यों दिए जाते हैं?

छः पिण्ड आत्मा की शांति, शव की शुद्धि और अग्निदाह की योग्यता के लिए दिए जाते हैं।

छः पिण्डषट्पिण्ड विधानशवदाह
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गरुड़ पुराण में विलाप करने से प्रेत को क्या कष्ट बताया गया है?

विलाप से गिरे कफ और आँसू प्रेत को खाने पड़ते हैं, जो उसके लिए कष्टदायक है।

गरुड़ पुराणविलापप्रेत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृतक के लिए बहुत रोना क्यों मना है?

अत्यधिक रोने से गिरे आँसू और कफ को भूख-प्यास से व्याकुल प्रेत को भक्षण करना पड़ता है।

मृतकविलापगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूत आत्मा को किससे बाँधते हैं?

यमदूत आत्मा को पाश यानी रस्सी से बाँधते हैं।

यमदूतपाशआत्मा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद पुण्यात्मा किसे देख सकती है?

पुण्यात्मा मृत्यु के बाद भगवान विष्णु के पार्षदों को देख सकती है।

पुण्यात्माविष्णु पार्षदमृत्यु के बाद
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा अंगूठे के आकार की क्यों कही गई है?

प्राण निकलते ही आत्मा अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म स्वरूप धारण करती है, जिसे यमदूत पाश से बाँधते हैं।

अंगुष्ठमात्र आत्मामृत्युसूक्ष्म शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मरणासन्न व्यक्ति के पास शालिग्राम शिला क्यों रखी जाती है?

शालिग्राम शिला मृत्यु-समय की पवित्रता और पारलौकिक शुद्धता के विधान में रखी जाती है।

शालिग्राम शिलामरणासन्नमृत्यु संस्कार
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मरणासन्न व्यक्ति के हाथों पर तुलसी क्यों रखी जाती है?

मरणासन्न व्यक्ति के हाथों पर तुलसी रखना मृत्यु-समय की शास्त्रीय पवित्रता-विधि का भाग है।

तुलसीमरणासन्नमृत्यु विधि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

शय्या या खाट पर प्राण त्यागना क्यों वर्जित है?

शास्त्रों में प्राण त्याग के लिए शय्या के बजाय गोमय-लेपित भूमि और कुशा का विधान है।

शय्याखाटप्राण त्याग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय कुशा क्यों बिछाई जाती है?

कुशा मरणासन्न व्यक्ति को पवित्र भूमि पर स्थापित करने के शास्त्रीय विधान का भाग है।

कुशामरणासन्नगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय गोमय लेपन क्यों किया जाता है?

गोमय लेपन मृत्यु के समय भूमि को शास्त्रीय रूप से पवित्र करने के लिए किया जाता है।

गोमयमृत्यु विधिगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मरणासन्न व्यक्ति को भूमि पर क्यों लिटाया जाता है?

मरणासन्न व्यक्ति को गोमय-लेपित भूमि पर कुशा बिछाकर लिटाना शास्त्रीय विधान है।

मरणासन्न व्यक्तिभूमिगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यातना देह में आत्मा को पीड़ा कैसे होती है?

यातना देह में आत्मा जलने, कटने, फटने, भूख-प्यास, थकान और यममार्ग के कष्टों को अनुभव करती है।

यातना देहआत्मा की पीड़ायममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वायुजा देह क्या होती है?

वायुजा देह मृत्यु के तुरंत बाद मिलने वाला वायव्य शरीर है, जिसमें आत्मा भटकती है पर स्थूल अन्न ग्रहण नहीं कर सकती।

वायुजा देहमृत्यु के बादप्रेत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा कैसे बताई गई है?

गरुड़ पुराण में आत्मा की यात्रा वायुजा देह, पिण्डज शरीर, सपिण्डीकरण, यमदूतों के पाश और 348 दिन की यमयात्रा के रूप में बताई गई है।

गरुड़ पुराणआत्मा की यात्राप्रेत खण्ड

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