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ग्रह दोष प्रश्नोत्तरी — 17 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित ग्रह दोष विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 17 प्रश्न

ज्योतिष दर्शन

ग्रह दोष और पितृ दोष में क्या संबंध?

पितृ दोष=विशेष ग्रह दोष। सूर्य/चंद्र/9वें पर राहु-केतु-शनि=संकेत। पूर्वजों अतृप्ति=कुंडली ग्रह दोष। उपाय: श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, कौवा/गाय रोटी। पितर तृप्ति=ग्रह दोष कम।

ग्रह दोषपितृ दोषसंबंध
ज्योतिष दर्शन

ग्रह दोष पूर्व जन्म के कर्मों का फल है क्या?

हाँ — कुंडली=प्रारब्ध कर्म(पूर्व जन्म)। 3 कर्म: संचित/प्रारब्ध(कुंडली)/क्रियमाण(वर्तमान)। वर्तमान कर्म=प्रारब्ध बदल सकता। 'अपना उद्धार स्वयं करो'(गीता)। कुंडली=संकेत, निर्णय नहीं।

ग्रह दोषपूर्व जन्मकर्म
ग्रह दोष निवारण

राहु महादशा में बटुक भैरव की उपासना कैसे करें?

राहु महादशा में कालाष्टमी पर भैरव के सामने दीपक जलाकर 'ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय...' मंत्र जपें। यह राहु दोष में गागर में सागर जैसा प्रभावी है।

राहु महादशाबटुक भैरवग्रह दोष
फलश्रुति और लाभ

नीलकंठ स्तोत्र से ग्रह दोष दूर होता है क्या?

हाँ, नीलकंठ स्तोत्र से सभी ग्रह दोष दूर होते हैं — विशेष रूप से ज्योतिषीय विष दोष (शनि-चंद्र संयोजन) के दुष्प्रभावों को नष्ट करने में यह अत्यंत प्रभावी है।

ग्रह दोषविष दोषज्योतिष
अभिषेक सामग्री

नीलकंठ पूजा में गन्ने का रस क्यों चढ़ाते हैं?

नीलकंठ पूजा में गन्ने का रस (इक्षु रस) तांत्रिक बाधाओं, नकारात्मक ऊर्जा और ग्रह दोषों को दूर करने के लिए चढ़ाया जाता है — इसके बाद जल अवश्य अर्पित करना चाहिए।

गन्ने का रसइक्षु रसतांत्रिक बाधा
स्तोत्र में ज्वर और रोग निवारण

ज्योतिषीय विष दोष क्या होता है?

ज्योतिषीय विष दोष शनि और चंद्रमा के संयोजन से उत्पन्न होता है जो मानसिक अशांति और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है।

ज्योतिषीय विष दोषशनि चंद्रमामानसिक अशांति
काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव की आराधना से क्या-क्या फल प्राप्त होते हैं?

फल — (1) असाध्य रोगमुक्ति और अकाल मृत्यु से रक्षा, (2) अष्टमेश-मारकेश ग्रह दशा शांति, (3) पितृ दोष-शाप निवारण, (4) संतान-रोजगार (40 सोमवार), (5) कैवल्य मोक्ष — शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं।

शंकुकर्णेश्वरफलश्रुतिअकाल मृत्यु
स्तोत्र एवं पाठ

ग्रह दोष शांति के लिए कौन से स्तोत्र प्रभावी

सूर्य=आदित्य हृदय; चंद्र=शिव; मंगल=हनुमान चालीसा; शनि=हनुमान/शनि स्तोत्र; राहु=दुर्गा; केतु=गणेश। सार्वभौमिक: महामृत्युंजय, नवग्रह स्तोत्र, हनुमान चालीसा।

ग्रह दोषशांतिस्तोत्र
मंत्र साधना

किस ग्रह दोष में कौन सा मंत्र सबसे प्रभावी है?

ग्रह मंत्र: सूर्य='ॐ ह्रां...' 7K, चन्द्र='ॐ श्रां...' 11K, मंगल='ॐ क्रां...' 10K, बुध='ॐ ब्रां...' 9K, गुरु='ॐ ग्रां...' 19K, शुक्र='ॐ द्रां...' 16K, शनि='ॐ प्रां...' 23K, राहु='ॐ भ्रां...' 18K, केतु='ॐ स्रां...' 17K। गायत्री = सर्वग्रह शांति।

ग्रह दोषग्रह मंत्रबीज मंत्र
ग्रह शांति

शुक्र ग्रह शांति पूजा कैसे करें

शुक्र शान्ति: (1) बीज मंत्र जप (16,000) + हवन (श्वेत चन्दन, तिल)। (2) लक्ष्मी पूजा/श्री सूक्त — अधिदेवता। (3) शुक्रवार व्रत। उपाय: श्वेत वस्तुएँ दान, गाय सेवा, स्त्री सम्मान। रत्न: हीरा/ओपल। शुक्र = सौन्दर्य, विवाह, ऐश्वर्य कारक।

शुक्रग्रह दोषलक्ष्मी
ग्रह शांति

केतु दोष शांति के लिए कौन सी पूजा करवाएं

केतु शान्ति: (1) केतु बीज मंत्र जप (17,000) + हवन। (2) गणेश पूजा — केतु के देवता। (3) महामृत्युंजय जप। (4) नवग्रह शान्ति। (5) नागबलि पूजा (त्र्यम्बकेश्वर)। उपाय: कुत्ते की सेवा, दूर्वा दान। रत्न: लहसुनिया। ज्योतिषी से कुण्डली दिखाकर करवाएँ।

केतुग्रह दोषशांति पूजा
ग्रह शांति

बुध ग्रह शांति के लिए कौन सी पूजा करवाएं

बुध शान्ति: (1) बुध बीज मंत्र जप (9,000/17,000) + हवन (अपामार्ग)। (2) विष्णु सहस्रनाम — बुध के अधिदेवता। (3) नवग्रह पूजा। (4) बुधवार व्रत। उपाय: हरे मूंग/वस्त्र दान, बच्चों को भोजन। रत्न: पन्ना (Emerald)। बुध शुभ-अशुभ दोनों — कुण्डली देखकर करें।

बुधग्रह दोषशांति पूजा
शिव पूजा

शिव की पूजा में राहु केतु दोष निवारण कैसे करें?

राहु: महामृत्युंजय सवा लाख जप+हवन, शिवलिंग पर काले तिल, काल भैरव पूजा। केतु: कुश से जलाभिषेक, गणेश पूजा, सप्तधान्य अर्पण। दोनों: रुद्राभिषेक, प्रदोष व्रत, 8/9 मुखी रुद्राक्ष, काल सर्प दोष हेतु त्र्यम्बकेश्वर/महाकाल पूजा। ज्योतिषी से कुंडली परामर्श उचित।

राहु केतुग्रह दोषनिवारण
ज्योतिष मार्गदर्शन

रत्न पहनने से ग्रह दोष पूरी तरह ठीक होता है क्या?

नहीं — रत्न सहायक, पूर्ण समाधान नहीं। शुभ ग्रह मजबूत करता, अशुभ पूरा शांत नहीं। सम्पूर्ण=रत्न+मंत्र+दान+सेवा+हवन+कर्म। बिना ज्योतिषी कभी न पहनें।

रत्नग्रह दोषसीमा
ज्योतिष दर्शन

ग्रह दोष और कर्म दोष में क्या संबंध?

ग्रह दोष=कर्म दोष का प्रतिबिंब। कुंडली=कर्मों का नक्शा। ग्रह=डाकिया, कर्म=पत्र — ग्रह कर्मफल पहुँचाते। मंत्र/दान=तीव्रता कम। मूल समाधान=कर्म सुधार। अच्छे कर्म=शुभ ग्रह।

ग्रह दोषकर्मसंबंध
ज्योतिष उपाय

ग्रह दोष में हवन करने का विशेष लाभ क्या?

अग्नि=देवमुख, आहुति सीधे ग्रहों तक। मंत्र+आहुति=दोहरा प्रभाव। वायु शुद्धि(94% बैक्टीरिया)। नवग्रह हवन=9 ग्रह शांत। साढ़ेसाती/कालसर्प/गृहप्रवेश। योग्य पंडित अनिवार्य।

हवनग्रह दोषअग्निहोत्र
शिव पूजा

शिव की पूजा से ग्रह दोष निवारण कैसे होता है?

शिव = महाकाल, नवग्रह नियंत्रक। शनि: शनि प्रदोष + काले तिल। राहु-केतु: त्र्यंबकेश्वर/नागेश्वर। चंद्र: सोमवार + दूध। सर्व: महामृत्युंजय सवा लाख + रुद्राभिषेक + 'ॐ नमः शिवाय' 108 दैनिक।

ग्रह दोषनिवारणनवग्रह

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।