ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
क्या है

पूर्वभाग अध्याय 9 क्या है?(18)

पूर्वभाग अध्याय 9 का अर्थपूर्वभाग अध्याय 9 क्या है?पूर्वभाग अध्याय 9 का महत्व
सरल उत्तर

पुरुष में वितृष्णा नाम से प्रसिद्ध भाव को गुणवैतृष्ण्य कहा गया है।

स्रोत प्रश्न: गुणवैतृष्ण्य क्या है? →
शैव पद और वैराग्य

गुणवैतृष्ण्य क्या है?

पुरुष में वितृष्णा नाम से प्रसिद्ध भाव को गुणवैतृष्ण्य कहा गया है।

#गुणवैतृष्ण्य#वितृष्णा#वैराग्य
औपसर्गिक ऐश्वर्य

ब्राह्म ऐश्वर्य क्या है?

बिना कारण जगत् की सृष्टि, अनुग्रह, प्रलय, अधिकार, लोकवृत्त प्रवर्तन और संसार का कर्तृत्व ब्राह्म ऐश्वर्य है।

#ब्राह्म ऐश्वर्य#सृष्टि#अनुग्रह
औपसर्गिक ऐश्वर्य

प्रजापति संबंधी ऐश्वर्य क्या हैं?

छेदन, ताडन, बन्ध, संसार परिवर्तन, सर्वभूतप्रसाद, मृत्यु और काल पर जय प्रजापति संबंधी आहंकारिक ऐश्वर्य हैं।

#प्रजापति ऐश्वर्य#आहंकारिक ऐश्वर्य#छेदन
औपसर्गिक ऐश्वर्य

मानस गुण क्या हैं?

इच्छित वस्तु की प्राप्ति, जहाँ चाहें जाना, गुप्त पदार्थ देखना, इच्छानुसार रूप धारण करना और जगत देखना मानस गुण हैं।

#मानस गुण#इच्छित वस्तु#रूप धारण
औपसर्गिक ऐश्वर्य

आकाश संबंधी ऐश्वर्य क्या है?

छाया न होना, आकाशगमन, दूरश्रवण, सभी शब्दों का ज्ञान, तन्मात्रा ज्ञान और सभी प्राणियों को देखना आकाश संबंधी ऐश्वर्य है।

#आकाश ऐश्वर्य#ऐन्द्र ऐश्वर्य#आकाश गमन
औपसर्गिक ऐश्वर्य

वायु संबंधी ऐश्वर्य क्या है?

मन की गति पाना, दूसरों के अन्तर्मन में निवास, हल्का-भारी होना, वायु पकड़ना और आकाश तत्त्व से देह धारण करना वायु ऐश्वर्य है।

#वायु ऐश्वर्य#मन की गति#हल्का भारी
औपसर्गिक ऐश्वर्य

तैजस ऐश्वर्य क्या है?

देह से अग्नि बनाना, अग्नि से निर्भय रहना, जल में अग्नि रखना, हाथ से आग पकड़ना और भस्म वस्तु को पूर्ववत करना तैजस ऐश्वर्य में आता है।

#तैजस ऐश्वर्य#अग्नि#आग पकड़ना
औपसर्गिक ऐश्वर्य

जल संबंधी ऐश्वर्य क्या है?

जल में निवास, जल से बाहर आने की शक्ति, समुद्र पान, जल दर्शन, रसयुक्त भक्षण और जलपिण्ड धारण जैसे गुण जल संबंधी ऐश्वर्य हैं।

#जल ऐश्वर्य#आप्य ऐश्वर्य#समुद्र पान
औपसर्गिक ऐश्वर्य

पार्थिव ऐश्वर्य क्या है?

शरीर की स्थूलता, ह्रस्वता, बालकपन, वृद्धता, यौवन, अनेक रूप, विशेष देहधारण और सुगन्ध ये पार्थिव गुण बताए गए हैं।

#पार्थिव ऐश्वर्य#शरीर परिवर्तन#स्थूलता
औपसर्गिक ऐश्वर्य

योग में आने वाले चौंसठ गुण क्या हैं?

आठ गुण वृद्धि क्रम से बढ़कर चौंसठ गुण कहे गए हैं; ये पार्थिव, जल, तेज, वायु, आकाश, मन, अहंकार और ब्राह्म ऐश्वर्य से जुड़े हैं।

#चौंसठ गुण#औपसर्गिक गुण#पार्थिव
उपसर्ग और सिद्धियाँ

वार्ता सिद्धि क्या है?

बुद्धि से दिव्य गन्धों का गन्धतन्मात्रा रूप में यथार्थ अनुभव करना वार्ता सिद्धि है।

#वार्ता सिद्धि#दिव्य गन्ध#गन्धतन्मात्रा
उपसर्ग और सिद्धियाँ

आस्वाद सिद्धि क्या है?

दिव्य रसों का सहज और यथार्थ ज्ञान होना आस्वाद सिद्धि है।

#आस्वाद सिद्धि#दिव्य रस#रस ज्ञान
उपसर्ग और सिद्धियाँ

दर्शना सिद्धि क्या है?

बिना प्रयास दिव्य रूपों का नेत्रेन्द्रिय से दिखाई पड़ना दर्शना सिद्धि है।

#दर्शना सिद्धि#दिव्य रूप#नेत्रेन्द्रिय
उपसर्ग और सिद्धियाँ

वेदना सिद्धि क्या है?

स्पर्श की अनुभूति को वेदना सिद्धि कहा गया है।

#वेदना सिद्धि#स्पर्श#अनुभूति
उपसर्ग और सिद्धियाँ

श्रवणा सिद्धि क्या है?

बिना प्रयास सभी शब्द, स्वर और गुह्य ध्वनि सुनकर उनका यथार्थ ज्ञान होना श्रवणा सिद्धि है।

#श्रवणा सिद्धि#शब्द ज्ञान#स्वर
उपसर्ग और सिद्धियाँ

प्रतिभा सिद्धि क्या है?

भूत, भविष्य, सूक्ष्म, अदृष्ट, दूरस्थ और समीप पदार्थों का ज्ञान देने वाली वृत्ति प्रतिभा सिद्धि कही गई है।

#प्रतिभा सिद्धि#भूत भविष्य ज्ञान#सूक्ष्म ज्ञान
योग बाधाएँ

दौर्मनस्य क्या है?

तमोगुण और रजोगुण से मिले मन में उत्पन्न दूषित भाव दौर्मनस्य है; इसे परम वैराग्य से नियंत्रित करना चाहिए।

#दौर्मनस्य#दुर्मन#तमोगुण
योग बाधाएँ

भ्रान्तिदर्शन क्या होता है?

समाधि के समीप पहुँचकर अज्ञान के कारण अनात्म पदार्थों में आत्मज्ञान रूप विपरीत ज्ञान रखना भ्रान्तिदर्शन है।

#भ्रान्तिदर्शन#विपरीत ज्ञान#अनात्म
और क्या है
अन्य शब्दों के क्या है

सनातन धर्म के सभी प्रमुख शब्दों के क्या है।

पूर्वभाग अध्याय 9 टैग
पूर्वभाग अध्याय 9 पर सम्पूर्ण संग्रह

सभी पूर्वभाग अध्याय 9 सम्बन्धित प्रश्नोत्तर एक स्थान पर।