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क्या है

ब्रह्मा क्या है?(36)

ब्रह्मा का अर्थब्रह्मा क्या है?ब्रह्मा का महत्व
सरल उत्तर

ब्रह्मदंड ब्रह्मा का दिव्य दंड है जो किसी भी अस्त्र को निष्प्रभावी कर देता है। वशिष्ठ के पास यह था — जब विश्वामित्र ने सेना से आक्रमण किया तब वशिष्ठ ने ब्रह्मदंड से सब कुछ निगल लिया।

स्रोत प्रश्न: ब्रह्मदंड क्या है ब्रह्मा का अस्त्र →
लोक

नैमित्तिक प्रलय में स्वर्लोक का क्या होता है?

नैमित्तिक प्रलय में ब्रह्मा के एक दिन (कल्प) के अंत में संवर्तक अग्नि से स्वर्लोक भी भस्म हो जाता है। तब स्वर्लोक के निवासी महर्लोक या जनलोक चले जाते हैं।

#नैमित्तिक प्रलय#स्वर्लोक#ब्रह्मा
लोक

सुमेरु पर्वत के शिखर पर क्या है?

सुमेरु पर्वत के शिखर पर ब्रह्मा जी की 'ब्रह्मपुरी' (शातकौम्भी) है जो 10,000 योजन विस्तृत है। इसे आठ दिक्पालों की नगरियाँ घेरे हुए हैं।

#सुमेरु पर्वत#ब्रह्मपुरी#ब्रह्मा
दिव्यास्त्र

ब्रह्मदंड क्या है ब्रह्मा का अस्त्र

ब्रह्मदंड ब्रह्मा का दिव्य दंड है जो किसी भी अस्त्र को निष्प्रभावी कर देता है। वशिष्ठ के पास यह था — जब विश्वामित्र ने सेना से आक्रमण किया तब वशिष्ठ ने ब्रह्मदंड से सब कुछ निगल लिया।

#ब्रह्मदंड#ब्रह्मा#वशिष्ठ
दिव्यास्त्र

ब्रह्मास्त्र क्या होता है

ब्रह्मास्त्र ब्रह्मा की शक्ति से संचालित अमोघ दिव्यास्त्र है। जिस पर चले उसका नाश निश्चित। दो ब्रह्मास्त्रों के टकराने से प्रलय का भय था। जहाँ प्रयुक्त हो वहाँ 12 वर्ष दुर्भिक्ष।

#ब्रह्मास्त्र#ब्रह्मा#दिव्यास्त्र
असित कल्प

असित कल्प क्या है?

असित कल्प पीतकल्प के बीत जाने के बाद प्रवृत्त ब्रह्मा का दूसरा कल्प बताया गया है।

#असित कल्प#कल्प#ब्रह्मा
अघोर महिमा

अघोर शिव कौन हैं?

अघोर शिव असित कल्प में कृष्णवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए महादेव हैं, जिन्हें ब्रह्मा ने देवदेवेश और ब्रह्मस्वरूप माना।

#अघोर#शिव#महादेव
पीतवासा कल्प

पीतवासा कल्प क्या है?

पीतवासा कल्प इकतीसवाँ कल्प बताया गया है, जिसमें ब्रह्मा ने पीला वस्त्र धारण किया था।

#पीतवासा कल्प#कल्प#ब्रह्मा
वामदेव कुमार

विरजा, विबाहु, विशोक और विश्वभावन कौन थे?

विरजा, विबाहु, विशोक और विश्वभावन ब्रह्मा के चार कुमार थे, जो विशुद्ध आत्मा और ब्रह्मतेज से सम्पन्न बताए गए हैं।

#विरजा#विबाहु#विशोक
वामदेव रूप

रक्तकल्प क्या है और इसमें शिव का कौन सा रूप प्रकट हुआ?

रक्तकल्प तीसवाँ कल्प बताया गया है, जिसमें शिव वामदेव रूप से रक्तवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए।

#रक्तकल्प#वामदेव#शिव रूप
सद्योजात महिमा

शिव का श्वेतलोहित रूप क्या है?

शिव का श्वेतलोहित रूप शिखाधारी श्वेतलोहित कुमार के रूप में प्रकट हुआ, जिसे ब्रह्मा ने परमेश्वर जाना।

#श्वेतलोहित#सद्योजात#कुमार
सृष्टि

स्थावर-जंगम जगत क्या है?

स्थावर-जंगम जगत वही सम्पूर्ण जगत है जिसे ब्रह्मा ने जरा-मरण से युक्त बनाया।

#स्थावर जंगम#जगत#ब्रह्मा
मनु और शतरूपा

स्वायम्भुव मनु और शतरूपा कौन थे?

स्वायम्भुव मनु और रानी शतरूपा का सृजन ब्रह्मा ने किया; शतरूपा अयोनिजा और पुण्यशालिनी कही गई हैं।

#स्वायम्भुव मनु#शतरूपा#ब्रह्मा
ऋषि और मानस पुत्र

ऋभु और सनत्कुमार कौन थे?

ऋभु और सनत्कुमार ब्रह्मा के अग्रजन्मा दिव्य पुत्र थे, जिन्हें नैष्ठिक ब्रह्मचारी और ब्रह्मवादी कहा गया है।

#ऋभु#सनत्कुमार#नैष्ठिक ब्रह्मचारी
ऋषि और मानस पुत्र

सनक, सनन्दन और सनातन कौन थे?

सनक, सनन्दन और सनातन ब्रह्मा द्वारा उत्पन्न श्रेष्ठ मुनि थे; सनत्कुमार का भी उल्लेख साथ आता है।

#सनक#सनन्दन#सनातन
अविद्या

पंचपर्वा अविद्या क्या है?

पंचपर्वा अविद्या वे पांच अविद्याएँ हैं जो ब्रह्मा से पहले उत्पन्न हुईं: तम, मोह, महामोह, तामिस्र और अन्धतामिस्र।

#पंचपर्वा अविद्या#अविद्या#तम
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा का दिन क्या होता है?

ब्रह्मा की प्राकृत सृष्टि का समय ही उनका दिन बताया गया है।

#ब्रह्मा#ब्रह्मा का दिन#कल्प
शिव तत्त्व

ब्रह्मा विष्णु शिव की विश्व प्राज्ञ तैजस अवस्थाएँ क्या हैं?

बीजरूप ब्रह्मा, योनिरूप विष्णु और प्रधानरूप शिव की विश्व, प्राज्ञ और तैजस अवस्थाएँ कही गई हैं।

#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
गुण और देव रूप

हिरण्यगर्भ क्या है?

हिरण्यगर्भ वह स्वरूप है जो रजोगुण से युक्त होने पर प्रकट बताया गया है।

#हिरण्यगर्भ#रजोगुण#ब्रह्मा
लोक

पंचपर्वा अविद्या क्या है

पंचपर्वा अविद्या अज्ञान के पाँच रूप हैं: तामिस्र, अंध-तामिस्र, तमस्, मोह और महा-मोह।

#पंचपर्वा अविद्या#अज्ञान#माया
लोक

गर्भोदकशायी विष्णु कौन हैं?

वे प्रत्येक ब्रह्मांड के भीतर स्थित विष्णु स्वरूप हैं।

#गर्भोदकशायी विष्णु#ब्रह्मांड#ब्रह्मा
लोक

तप शब्द का मतलब क्या है?

तप का अर्थ संयम और एकाग्र साधना है।

#तप#तपस्या#ब्रह्मा
लोक

कमल-नाल क्या होता है?

कमल-नाल नाभि-कमल का डंठल या स्रोत-मार्ग है।

#कमल-नाल#नाभि-कमल#ब्रह्मा
लोक

चार मुख और चार युग का संबंध क्या है?

चार मुख चार युगों का भी प्रतीक माने गए हैं।

#चार मुख#चार युग#ब्रह्मा
लोक

चार मुख और चार वेद का संबंध क्या है?

ब्रह्मा के चार मुख चार वेदों के प्रतीक हैं।

#चार मुख#चार वेद#ब्रह्मा
लोक

नाभि-कमल क्या होता है?

नाभि-कमल विष्णु की नाभि से निकला सृष्टि-आधार कमल है।

#नाभि-कमल#ब्रह्मा#सृष्टि
लोक

4.32 अरब साल किसे कहते हैं?

४.३२ अरब वर्ष एक कल्प की अवधि है।

#कल्प#4.32 अरब#ब्रह्मा
लोक

ब्रह्मा के सौ वर्ष का अर्थ क्या है?

यह ब्रह्मांडीय आयु का विशाल काल है जिसके बाद महाप्रलय आता है।

#ब्रह्मा#काल#महाप्रलय
लोक

नैमित्तिक प्रलय क्या है?

ब्रह्मा के एक दिन के अंत का प्रलय नैमित्तिक प्रलय है।

#नैमित्तिक प्रलय#कल्प#ब्रह्मा
लोक

नैमित्तिक प्रलय क्या होता है?

नैमित्तिक प्रलय ब्रह्मा के दिन के अंत और रात्रि के आरंभ पर होने वाला प्रलय है।

#नैमित्तिक प्रलय#प्रलय#ब्रह्मा
लोक

सनकादि ऋषि कौन हैं?

सनकादि ऋषि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार हैं।

#सनकादि ऋषि#जनलोक#ब्रह्मा
लोक

विचक्षण सिंहासन क्या है?

विचक्षण सिंहासन सत्यलोक के अपराजिता भवन में ब्रह्मा जी का वह दिव्य आसन है जिस पर 'अमितौजस' (असीम तेज वाला) नाम का विशेष आसन है।

#विचक्षण#सिंहासन#ब्रह्मा
लोक

अपराजिता भवन क्या है?

अपराजिता सत्यलोक में सलज्ज नगर का वह दिव्य भवन है जहाँ ब्रह्मा जी विचक्षण सिंहासन पर विराजते हैं। अपराजिता = जो कभी पराजित न हो।

#अपराजिता#भवन#सत्यलोक
लोक

महाप्रलय में सत्यलोक का क्या होता है?

महाप्रलय में सत्यलोक भी नष्ट हो जाता है। ब्रह्मा जी और सभी सिद्ध आत्माएं सूक्ष्म शरीर त्यागकर शाश्वत वैकुंठ में प्रवेश करती हैं।

#महाप्रलय#सत्यलोक#ब्रह्मा
लोक

सत्यलोक का राजा कौन है?

सत्यलोक के अधिपति भगवान ब्रह्मा हैं जो माता सरस्वती के साथ यहाँ निवास करते हैं। यहीं से वेदों का ज्ञान और सृष्टि के नियम प्रवाहित होते हैं।

#सत्यलोक#ब्रह्मा#राजा
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग

४ मुखी रुद्राक्ष का देवता और मंत्र क्या है?

४ मुखी रुद्राक्ष ब्रह्मा स्वरूप है, इसका मंत्र 'ॐ ह्रीं नमः' है और यह नर-हत्या पाप का नाश कर चतुर्वर्ग फल देता है।

#4 मुखी#ब्रह्मा#बुध
वेद एवं यज्ञ

यज्ञ में ब्रह्मा होता विष्णु और महेश्वर की भूमिका क्या है

दो सन्दर्भ: (1) ऋत्विज्: ब्रह्मा = यज्ञ अध्यक्ष (अथर्ववेद), होता = आह्वान (ऋग्वेद), अध्वर्यु = कर्म (यजुर्वेद), उद्गाता = गान (सामवेद)। (2) त्रिमूर्ति: ब्रह्मा = यज्ञ विधान रचना, विष्णु = 'यज्ञो वै विष्णुः' (शतपथ) — यज्ञ स्वरूप/फलदाता, शिव = अग्नि रूप शुद्धिकर्ता।

#यज्ञ#त्रिमूर्ति#ब्रह्मा
और क्या है
अन्य शब्दों के क्या है

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