विस्तृत उत्तर
विद्यारंभ श्लोक (छात्रों के लिए विशेष):
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
अर्थ: 'हे वरदान देने वाली और सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली माँ सरस्वती, आपको नमस्कार है। मैं अपनी विद्या/अध्ययन का आरंभ करने जा रहा हूँ, मुझे सदैव सिद्धि (सफलता) प्राप्त हो।'
प्रभाव: प्रतिदिन या परीक्षा से पूर्व इस श्लोक का मानसिक उच्चारण करने से मस्तिष्क की धारण क्षमता (Retention capacity) बढ़ती है और अकारण भय दूर होता है।
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