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विस्तृत उत्तर
नहीं। गीता 2.47: 'कर्मण्येवाधिकारस्ते'=कर्म (पढ़ाई) करो। पूजा=मन शांत/एकाग्रता/आत्मविश्वास=पढ़ाई बेहतर। पढ़ाई=90%; पूजा=10% (शांति)। बिना पढ़ाई=0% (1000 पूजा भी)। भगवान मदद करते; जादू नहीं। 'भगवान उनकी मदद करते हैं जो स्वयं प्रयास करते।'
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