विस्तृत उत्तर
स्पष्ट उत्तर: नहीं।
गीता कर्मयोग: *'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन'* (2.47) — कर्म करो, फल की चिंता मत करो। कर्म (पढ़ाई) = अनिवार्य।
पूजा = कर्म का विकल्प नहीं
- ▸पूजा = मानसिक शांति, एकाग्रता, आत्मविश्वास देती है।
- ▸पूजा = बुद्धि प्रेरणा (गायत्री = बुद्धि मंत्र)।
- ▸पर पूजा = ज्ञान/पढ़ाई का विकल्प कभी नहीं।
सही तरीका: पढ़ाई + पूजा = सर्वश्रेष्ठ। पूजा से एकाग्रता बढ़ेगी → पढ़ाई बेहतर → परिणाम उत्तम।





