विस्तृत उत्तर
यमपुरी में प्रवेश के बाद आत्मा को चित्रगुप्त और यमराज के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। चित्रगुप्त अपनी अग्रसंधानी पुस्तिका खोलकर उस जीव के संपूर्ण जीवन का कर्म-वृत्तांत सुनाते हैं। इस पुस्तिका में प्रत्येक प्राणी के जन्म से मृत्यु तक के एक-एक क्षण का शुभ और अशुभ कर्म अंकित रहता है। चित्रगुप्त द्वारा प्रस्तुत इसी कर्म-वृत्तांत के आधार पर यमराज तत्काल निर्णय सुनाते हैं कि आत्मा को किस नरक में कितनी यातना भोगनी है या किस पुण्य के प्रताप से उसे कौन सा उच्च लोक प्राप्त होगा।
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